Samay par Kavita in Hindi

वक्त से बड़ा कुछ भी नहीं | Samay par Kavita in Hindi

वक्त से बड़ा कुछ भी

( Waqt se bada kuchh bhi nahin ) 

 

आओं मिलकर आज सभी एक यह संकल्प करें,
हर मनुष्य को आदर देकर सभी का सम्मान करें।
खुद जागरुक होकर के सबको भी जागरुक करें,
एक-दूसरे का उत्साह बढ़ाकर जो बनें मदद करें।।

सारे जगत में अपनी भी ऐसी एक पहचान बनाएं,
नफ़रत का अंकुर न पनपे ऐसा सभी पेड़ लगाएं।
गलतियां हुई हो कैसी भी उन्हें ना वापस दोहराएं,
विपदा आए कोई किसी को मदद में हाथ बढ़ाएं।।

कौशिश करते रहें हमेशा हार चाहें हो दसवीं बार,
हारते-हारते जीत भी होगी कभी मिलेगा उपहार।
ग़रीब-ग़रीब होकर भी हंसता अमीर हमेशा रोता,
हृदय में कभी तो उमड़ेगा शत्रु व अपनों के प्यार।।

डरना नही कभी किसी से और अहंकार न करना,
प्रफुल्लित हो सबका मन ऐसा कार्य करते रहना।
षड्यंत्र रचने वालें से सदा ही दूरी बनाकर रखना,
कठोर व अपमानित शब्द जीभ पर आने न देना।।

चलता रहता कभी न थकता वक्त अपनी चाल से,
वक्त से बड़ा कुछ नही है सच्च बता रहे ईमान से।
यह वक़्त और अध्यापक सिखलाई दोनों ही देता,
वक़्त पहले और अध्यापक बाद में परीक्षा लेता।।

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

 

Similar Posts

  • राम दरबार | Kavita

    राम दरबार ( Ram darbar )   अमरावती  पृथ्वी  पे  जैसे, इन्द्र का दरबार। अद्भुत सुहाना सरस हो, श्रीराम का दरबार।   भवहीन तन आनंद मन,सौन्दर्य नयनभिराम, श्रीराम का मन्दिर जहाँ, मन जाए बारम्बार।   साकेत दमके पुनः पथ, दर्पण का हो एहसास। श्रीराम जी आए है जैसै, तन में थम गयी सांस।   तोरण…

  • मौसम | Beautiful Ghazal In Hindi

    मौसम ( Mausam )   फिर बदलने को है हवा सर्द होने जो लगे धूप सुस्ताने लगे चलो ,आओ, इन कपड़ों, पापड़, आचार के संग फूफूंद लग रहे ये अपने रिश्ते भी कुछ देर धूप में रख दें फिर से ये ताजा दम हो कुछ निखर जायेंगे कुछ संवर जायेंगे….   लेखिका :- Suneet Sood Grover…

  • जीवन की सत्यता | Jeevan ki Satyata

    जीवन की सत्यता ( Jeevan ki satyata )    सतत ओस के झरते कण दिखाई तो नही देते पर,बना देते हैं महा सागर को जैसे ऐसे ही कर्म के प्रवाह मे दुआओं बद्दुआओं के स्वर किसी को मार देते हैं बेमौत तो किसी को अमर बना देते हैं… अलौकिक भाषा और संकेत सूक्ष्म एहसास ही…

  • यह नक चढ़ी नाक | Nak Chadhi

    यह नक चढ़ी नाक ( Ya nak chadhi nak )    यह नक चढ़ी नाक गजब ढा गई। तेवर तीखे वह हमको दिखा गई। अंदाज मस्ताने नैना चले तीर से। आहट से लगा कि आंधी आ गई। यह नक चढ़ी नाक नखरो वाली। बड़े चाव से मुसीबत हमने पाली। मोरनी सी चाल घुंघरू पायल के।…

  • चिड़ियों से सीखें | Chidiyon se Sikhen

    चिड़ियों से सीखें चिडियों से सीखे हम वैज्ञानिक युग के विक्षिप्त विकसित कुत्सित मानव प्रेम-प्रीतिकी रीति गीत पेड़ की डाली की महकती चहकती दुनिया बेबस,बंटे,झुलसे,त्रस्त मानव को मुक्ति-मंत्र का संदेश जो हमें देते बहुजन हिताय की नीति बरबस हमें सिखाती द्रोह-भावना को मिटाती पाप,लाभ,लोभ-भोग की परवाह किए बिना सब मिल आशियां बनाते शेखर कुमार श्रीवास्तव…

  • देर कर दी आते आते | Geet der kardi aate aate

    देर कर दी आते आते ( Der kardi aate aate )   खूब कमाया धन दौलत, थक गए तुम्हें बुलाते। प्राण पखेरू उड़ गए उनके, जन्मदाता कहलाते। उठ गया साया सर से तेरा, कभी पुत्र धर्म निभाते। बुढ़ापे का सहारा भी कैसा, आशीष नहीं ले पाते। देर कर दी आते आते,देर कर दी आते आते…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *