मेरी पहचान बता

मेरी पहचान बता

मेरी पहचान बता

 

मैं लड़की हूं

इसे छोड़ मेरी पहचान बता

घर मेरा मायका है या ससुराल मेरा मका

बस एक बार तू मेरा पता बता

 

मैं लड़की हूं

इसे छोड़ मेरी पहचान बता

मैं अमृत हूं विष समझकर न सता

मौन कर दिया तूने मुझे बेटे के समान बता

 

मैं लड़की हूं

इसे छोड़ मेरी पहचान बता

तू इतने जुल्म करता है

तू इतने जुल्म करता है क्या है आखिर मेरी खता

हर कदम पर ठुकरा कर तु मुझे ना यूं प्यार जता

 

मैं लड़की हूं

इसे छोड़ मेरी पहचान बता

क्यों डरता है तू देवी के समान मुझे बता

मैं तो हूं एक पेड़ की छोटी सी कली और लता

इसे छोड़ मेरी पहचान बता

?

लेखिका : अमृता मिश्रा

प्रा०वि०-बहेरा, वि०खं०- महोली

सीतापुर (उत्तर प्रदेश)

यह भी पढ़ें : 

रक्षक

Similar Posts

  • लव-कुश का दर्द | Lav Kush ka Dard

    लव-कुश का दर्द ( Lav-Kush ka dard ) पुत्र की पाती पिता के नाम   आदरणीय पिताजी, दुनिया कहती हैं, आप भगवान है, मैं भगवान का बेटा हूं, जो सबका मालिक है, जो संसार के दुःखों को हरता है, जो कण कण में समाया हुआ है, जो न्यायकारी है, मैं उन्हीं भगवान का बेटा हूं,…

  • ई वी एम का बटन दबाना है

    ई वी एम का बटन दबाना है   चलो पड़ोसी आज सुबह,हमें ईवीएम बटन दबाना है। जनता का विश्वास जीत,अब नई सरकार बनाना है। बेरोजगारी को जड़ से मिटा,भारत  संपन्न बनाना है। बेटा बेटी दादा दादी मम्मी पापा संग जाना है। अपना अधिकार जान कर,अब ईवीएम बटन दबाना है। अपने मर्जी के हैं मालिक, अपनी…

  • राजा रंक सभी फल ढोते | Kavita Raja Runk

    राजा रंक सभी फल ढ़ोते ( Raja runk sabhi phal dhote )    राजा रंक सभी फल ढ़ोते,  होता कर्ज़ चुकाना।  कर्मों के अनुसार जीव को, पड़े दंड भुगताना।। मानव दानव पशु पक्षी बन,  इस धरती पर आता।  सत पथ गामी मंच दिया है,  बिरला नर तर पाता। कोई जीवन सफल बनाता,  ले जाता नजराना।…

  • पूनम का चांद | Poonam ka Chand

    पूनम का चांद ( Poonam ka chand )    आसमान का चांद आज कुछ ऐसा चमचमा रहा है मानो नहा कर चांदनी से बिल्कुल अभी आ रहा है। ए चंदा, चांदी से चमक कर चले हो किस ओर कहीं मिलने तुमसे आज आने वाला है कोई चकोर। फूलों की डाली से झांकते ऐसे लग रहे…

  • आपकी सीमा | App ki Seema

    आपकी सीमा ( App ki seema )    पृथ्वियां तो बहुत हैं ब्रम्हांड मे किंतु,जल और वायु के प्रभाव मे ही होती है श्रृष्टि की रचना… आपकी संगत और योग्यता के आधार पर ही होती है आपके व्यक्तित्व की पहचान….. व्यक्तिगत मे आप कैसे हैं इससे समाज को कोई फर्क नहीं पड़ता किंतु ,आप समाज…

  • Shiksha Kavita | Shiksha Par Kavita | Poem On Shiksha -शिक्षा

    शिक्षा ( Shiksha )   जगत में शिक्षा है आधार। शिक्षा बिना धुंध सा जीवन शिक्षा मुक्ती द्वार।। जगत में० ।। अनपढ़ मूढ़ निरक्षर क्या -क्या शव्द बुलाये जाते, इन  लोगों  से  भेड़  बकरियां  पशु चरवाये जाते, पढ़ें – लिखे मुट्ठी भर लोग तब करते अत्याचार।। जगतमें० ।। शिक्षा बिना न मिले नौकरी दर-दर ठोकर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *