App ki Seema

आपकी सीमा | App ki Seema

आपकी सीमा

( App ki seema ) 

 

पृथ्वियां तो बहुत हैं ब्रम्हांड मे
किंतु,जल और वायु के प्रभाव मे ही
होती है श्रृष्टि की रचना…

आपकी संगत और योग्यता के आधार पर ही
होती है आपके व्यक्तित्व की पहचान…..

व्यक्तिगत मे आप कैसे हैं
इससे समाज को कोई फर्क नहीं पड़ता
किंतु ,आप समाज के लिए क्या हैं
यही आपकी जरूरत को
सिद्ध करती है….

आप किसके साथ चल रहे हैं यह आम बात है
किंतु,आपके साथ कौन चल रहा है
आपकी विशेषता इसी मे है….

स्वयं के द्वारा
आप स्वयं को सिद्ध नही कर सकते
समाज को भी समझ मे आता है की
आपके समझ की सीमा का विस्तार
कहां तक है…

 

मोहन तिवारी

( मुंबई )

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