मुश्किल है | Mushkil Hai

मुश्किल है

( Mushkil hai ) 

 

मुश्किल है समझना किसी को
मीठी बोली की मुस्कान मे भी
उलझनें हैं जलेबी की तरह

सीधी तनी हुई रस्सियां भी
गुजरी हैं कई घुमावदार रास्तों से
कई गांठें पेवस्त हैं हृदय में

सहज कोई नही सरल कोई नही
चेहरे पर चेहरे की परतें हैं जमी हुई
शराफत का लबादा ओढ़े बैठे हैं लोग

खुशी मिले भी तो कैसे मिले
कांटों की लगाई बाड़ मे से
खुद को भी भागना मुश्किल होता है

गलत का अंजाम भी गलत हो होगा
जानते सभी हैं इस बात को
तब भी रोप गलत ही लगाते हैं

मीठे फल कभी वृक्ष से नही होते
मिठास तो बीज मे होती है
शाखाएं तो महज फैलती हैं
फल होने तक

आदमी को आदमी बनना मुश्किल है
हैवानियत के लिए ही पढ़ाई जरूरी नही होती

 

मोहन तिवारी

( मुंबई )

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