Uthti hai Mere Chehre par

उठती है मेरे चेहरे पर | Uthti hai Mere Chehre par

उठती है मेरे चेहरे पर

( Uthti hai mere chehre par )

 

उठती है मेरे चेहरे पर उसकी नजर नहीं
लेकिन वह मेरे हाल से भी बेखबर नहीं।

रोके ना रुक सकेगा हमारा वह प्यार है
पाबंदियां जहान की भी पुरअसर नहीं।

चाहत है आसमान में परिंदों सा उड़ चले
पर घोंसलों के बिन भी जहां में बसर नहीं।

गहरा जमा हुआ है मुहब्बत का यह दरख़्त
आंधी गिरा के तोड़ दे ऐसा शजर नहीं।

जन्नत मेरी उजाड़ के रख दी रकीब ने
बरबादियों में छोड़ी कहीं कुछ कसर नहीं

 

डॉ शालिनी शर्मा ‘मुक्ता’
( बरेली )
यह भी पढ़ें:-

उनकी आँखों में प्यार | Geet Nava Geet ki Parampara mein

 

 

Similar Posts

  • वो नहीं ज़िद ठानता | Zid Shayari

    वो नहीं ज़िद ठानता ( Wo nahi zid thanta )    वो नहीं ज़िद ठानता तो मुख़्तलिफ हालात होते इस चमन में ग़ुल भी खिलता महकते लम्हात होते। अब बहुत ही मुख़्तसर सी गुफ़्तगू होती हमारी दिन हुए कुछ इस तरह रस्म़न ज़रा सी बात होते। जीतने की थी हमें आदत मगर अब हाल है…

  • दिल फ़रेब इस हंसी का क्या कहना

    दिल फ़रेब इस हंसी का क्या कहना दिल फ़रेब इस हंसी का क्या कहना।आपकी दिलकशी का क्या कहना। आपके मरमरी से क़ालिब पर।चांद की चांदनी का क्या कहना। दिल परेशान हैं गुलाबों के।आपकी नाज़ुकी का क्या कहना। लूट लेती है आन में दिल को।ह़ुस्न की कजरवी का क्या कहना। इस पे क़ुर्बान सीमो-ज़र सारे।प्यार की…

  • गिले-शिकवे की रीत

    गिले-शिकवे की रीत पहर-दर-पहर वो मुझे शिद्दत से याद आते रहे, वो क्या जाने ये चांँद-सितारे किस कदर उनकी यादों के नश्तर मेरे सीने में चुभाते रहे, बहुत चाहा था कि भूल जाएं उस बेवफ़ा को, मगर ख़्याल उनके दिल से निकलते ही नहीं, बनाकर आशियाना इस कदर वो दिल में हलचल मचाते रहे, शब-ए-हिज्रा…

  • सुना दी हमने | Suna di Hamne

    सुना दी हमने ( Suna di Hamne ) शम्अ उल्फ़त की जला दी हमनेपर सज़ा दिल को सुना दी हमने राह हमदम की सजा दी हमनेउनकी दुनिया ही बसा दी हमने रोशनी की थी जिन्होंने शब भरउन चरागों को दुआ दी हमने बन गया ग़ैर ज़माना लेकिनयार की यारी निभा दी हमने दौर-ए-हिज़्रा में भी…

  • परिवार अपना | Parivar Shayari

    परिवार अपना ( Parivar Apna ) जहाँ से निराला है परिवार अपनाइसी पे लुटाता रहूँ प्यार अपना कदम बेटियों के पड़े घर हमारेमहकने लगा है ये संसार अपना ये बेटे बहू कब हुए है किसी केजो इनपे जताऊँ मैं अधिकार अपना मजे से कटी ज़िन्दगी भी हमारीचला संग मेरे जो दिलदार अपना करूँ मैं दुआएं…

  • तेरा इक दिवाना हूँ

    तेरा इक दिवाना हूँ तेरा इक दिवाना हूँ क़ाफ़िर नहीं हूँअसल में जो मैं हूँ वो जाहिर नहीं हूँ जुबाँ हूँ अदा-ए-फिजा हूँ फ़ना हूँयक़ीनन मैं जो हूँ क्यों आखिर नहीं हूँ जहाँ तक तिरा साथ मुझको चलूँगायुँ कुछ वक्त का मैं मुसाफ़िर नहीं हूँ लिखूँगा मैं लिखता नया ही रहूँगाथकूँ राह में ऐसा शाइर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *