नवरात्रि पर्व ( चैत्र ) द्वितीय / तृतीय दिवस
नवरात्रि पर्व ( चैत्र ) द्वितीय / तृतीय दिवस
नवरात्रि पर्व ( चैत्र ) द्वितीय / तृतीय दिवस
समय का चक्र निरंतर अपने
हिसाब से चलता रहता हैं ।
भुवाल माता का स्मरण
आश्वासन , विश्वास ,
संबंध और सरसता की
समष्टि कराता रहता हैं
वह साथ में समयानुसार
आगे अध्यात्म का अवसर
भी आता रहता हैं ।
जिससे विचार थम
जाते हैं और विचार
को अवकाश मिलता हैं ।
अवकाश का दरवाजा
बंद होता हैं तो विचार
विराम में चले जाते हैं ।
भुवाल माता का स्मरण
जीवन को सदैव
आनन्दमय बनाता रहता हैं ।

प्रदीप छाजेड़
( बोरावड़)
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