Nawal Dhara

ये नवल धरा है रसिकों की | Nawal Dhara

ये नवल धरा है रसिकों की 

( Ye Nawal Dhara Hai Rasiko Ki ) 

 

तुम लक्ष्मीकांत मैं रमाकांत,
तुम गुणी पूज्य मैं भी हूं शांत।
तुम हंसी ठहाकों की दुनिया,
महफ़िल में रंग जमा जाना।
ये नवल धरा है रसिकों की,
तुम आकर पुष्प खिला जाना।

मैं मनमौजी मतवाला गीतों में,
फागुनी रस राग सुनाऊंगा।
दिल के दरवाजे खुल जाए,
भाव सुमन थाल सजाऊंगा‌।
होली में रंग बरसे भावन,
बहारें प्रेम भरी मै लाऊंगा।

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :

होळी आई रे भोळा भंडारी | Holi Aayi re Bhola Bhandari

Similar Posts

  • वो नन्ही सी चींटी | Cheenti par kavita

    वो नन्ही सी चींटी ( Wo nanhi si cheenti )   एक ना एक दिन ज़रूर आता है चींटी का भी वक्त, हिला देती है वो नन्हीं सी चींटी ताज और ये तख्त। समय पलटते देर न लगता किसी का भी उस वक्त, परेशानियां दूरी बना लेती चाहे वह हो बहुत सख़्त।। वो परमपिता सभी…

  • Hindi Kavita | Best Hindi Poetry -चमौली हादसा

    चमौली हादसा ( Chamoli Haadsha ) ********** टूटा ग्लेशियर फिसला हिमयुक्त पर्वत शिखर बाढ़ नदियों में आई, कीचड़युक्त मलबे में फंस कईयों ने जान है गंवाई। टनल में कार्यरत कई मजदूर अब भी हैं लापता, जाने कहां से आई ऐसी ये आपदा? शासन, प्रशासन ने दु:ख है जताया, आपदा प्रबंधन दल ने पूरी मुस्तैदी से…

  • स्नेह सुधा बरसाने वाली

    स्नेह सुधा बरसाने वाली मन मन्दिर अपना है खाली, दिल का सिंहासन भी खाली। तरुणी कहां छुपी जा बैठी स्नेह सुधा बरसाने वाली।। मन को तुम भरमाने वाली, दिल को तुम तरसाने वाली। तरुणी कहां छुपी जा बैठी, स्नेह सुधा बरसाने वाली।। चंचल चितवन से तुम अपने, अनुपम नाच नचाने वाली। तरुणी कहां छुपी जा…

  • नशा | Kavita Nasha

    नशा ( Nasha ) नशा एक जलती चिता, नशे का नशा, जिस किसी को लगा, कवेलू तलक, उसके घर का बिका! नशा —— एक जलती चिता, नन्हें बच्चों का भविष्य, दांव पर लगा! घर स्वर्ग से नरक का रूप, धारण करने लगा! अन्न मिलता नहीं, तड़पते हैं बच्चे भूख से, विधवा उसकी पत्नी, लगती है…

  • लोहड़ी | lohri kavita

    लोहड़ी ( Lohri ) ( 2 )  लोहड़ी सिख व हिंदू का प्रमुख त्यौहार, मनाते हैं, इस त्यौहार पर बेहद खुशी व उत्साह दिखाते हैं। लोहड़ी से फसलों की कटाई शुरू हो जाती है, इसी वजह से फसल कटाई का जश्न मनाते हैं।। यह त्यौहार हमारे लोककथाओं को बतलाता है, पारिवारिक परंपराओं से इसका गहरा…

  • अनोखा आंदोलन!

    अनोखा आंदोलन! **** कृषि कानूनों के खिलाफ अन्नदाता आंदोलनरत हैं, भीषण सर्दी में ही- दिल्ली बार्डर पर दिए दस्तक हैं। भीड़ बढ़ती जा रही है! ठसाठस सड़कों पर डटे हैं, सरकारी दमनचक्र के बावजूद- टस से मस नहीं हो रहे हैं। तू डाल डाल, मैं पात पात की नीति पर चल रहे हैं, शासन की…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *