Naya Mod

नया मोड़ | Naya Mod

नया मोड़

( Naya Mod )

 

आंखों में बसी है नमी खुदा
क्यों हो रही हु मैं खुदसे जुदा

चाहती हूं कोई दिल से लगाए
हो रही हूं खुद मे ही जैसे गुमसुदा

अजीब सा डर है दिल में समाया हुआ
बोझ जिम्मेदारियों का भी आया हुआ

रोने लगी हैं आंखें अब बहुत
बस बदल रही है अब ज़िंदगी बहुत

फिजा भी छूकर बेचैन कर जाती हैं
तारो से गुफ्तगू मे भी आंखें रुलाती हैं

वे भी जिम्मेदारी के नियम बताती हैं
अंधकार मे भी होना रोशन सिखाती हैं

बातों को सुन हंसी सी छूट जाती है
ऐसे मे केवल बाबुल की याद आती है

ऐ खुदा ! है अजीब मोड़ यह भी ज़िंदगी का
बस ,तेरी रहमत है तेरी बंदगी का

 

नौशाबा जिलानी सुरिया
महाराष्ट्र, सिंदी (रे)

यह भी पढ़ें :-

कुछ | Kuch

Similar Posts

  • बड़े मामले में विफल होती सीबीआई!

    बड़े मामले में विफल होती सीबीआई! ****** हाईप्रोफाइल मामलों में विफल होती सीबीआई, यह बात कुछ हजम नहीं होती भाई ! बोफोर्स तोप घोटाला, 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला। कर्नाटक खनन घोटाला- जिसमें मुख्यमंत्री येदियुरप्पा थे अभियुक्त, या आरूषि हत्याकांड जिसमें सीबीआई थी नियुक्त; जांच नहीं कर पायी युक्तियुक्त। मस्जिद ढ़ांचा विध्वंस मामले में भी- सीबीआई…

  • वशीकॄत खामोशी | Vashikrit Khamoshi

    वशीकॄत खामोशी ( Vashikrit Khamoshi )    अनिश्चित अपरिचित भयावह सी खामोशी गहरे छाप छोड़ और हावी होकर मेरे अन्तर्मन पर मुझे धकेलने की कोशिश करती पश्चाताप और ग्लानि के निर्जन कुंए में.. अनियंत्रित अदमित जुनूनी सी मोहब्बत अमानचित्रित और निषेधित करती खामोशी के चिन्हों को वशीकरण से रूह को तर जाने के लिए प्रेेम…

  • कोरोना का रोना | Corona ke upar kavita

    कोरोना का रोना ( Corona ka rona ) –> कोरोना का रोना है , हाँ हाँ कार मची है दुनियां मे || 1.कोरोना वायरस फैल रहा,जाने कैसी बीमारी है | रोका नहीं गया इसको तो,आगे चल के महामारी है | इसके बारे मे कुछ पता नहीं,अभी ये बन्द अलमारी है | हमको ही मिलकर लडना…

  • उदासी | Udasi par Kavita

    उदासी ( Udasi )   बादल  जैसी  छाई  उदासी । घिर- घिर कर फिर आई उदासी ।।   दिन-दिन बढ़ती ही जाती है । जैसे  हो  महंगाई  उदासी ।।   सूने दिल में बजती जैसे । दूर कहीं शहनाई उदासी ।।   सागर की लहरों सी खुशियां सागर की गहराई उदासी ।।   शमा  जली …

  • पर्यावरण | Paryaavaran par kavita

    पर्यावरण ( Paryaavaran ) वृक्ष धरा का मूल भूल से इनको काटो ना , नदी तालाब और पूल भूल से इनको  पाटो ना! वृक्षों  से हमें फल मिलता है  एक सुनहरा कल मिलता है पेड़ रूख बन बाग तड़ाग , सब धरती के फूल …     भूल से इनको  काटो ना   ..  इनकी करो…

  • Romantic Kavita | तुझ संग जुड़े नेह के तार

    तुझ संग जुड़े नेह के तार ( Tujh sang jude neh ke taar )   जीवन पथ की हमसफर हो मेरे  दिल  का  तुम करार मधुर संगीत का साज हो तुम संग जुड़े नेह के तार   कितना प्यारा प्यारा लगता सुंदर   सुंदर   यह   संसार हर्षित मन का कोना कोना तुझ  संग जुड़ें नेह के…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *