निशानी प्यार की 

निशानी प्यार की | Ghazal nishani pyar ki

निशानी प्यार की 

( Nishani pyar ki )

 

दें आया हूं मैं जिसे कल निशानी प्यार की

जिंदगी भर बन गयी दिल में रवानी प्यार की

 

दें गया है हिज्र आंखों में वो मुझे ऐसा यहाँ

रह गयी दिल में अधुरी वो कहानी प्यार की

 

जो नहीं लिक्खी मुहब्बत मेरी है   तक़दीर में

बन गयी दिल की मेरे गुजरी  कहानी प्यार की

 

मत कर  शक ए दोस्त तू  मेरी  वफ़ाओ पे मगर

है किसी की ये तो बस चिट्टि पुरानी प्यार की

 

तू कभी करना नहीं अपनी निगाहें बेवफ़ा

हाँ निगाहें मुझसे सनम यूं ही मिलानी प्यार की

 

नफ़रतों की सिर्फ़ आती है उसे बातें करना

बोलता ही वो नहीं यारों ज़ुबानी प्यार की

 

बन सका आज़म नहीं जो हम सफ़र मेरा सनम

धड़कने है ये उसी की  दीवानी प्यार की

 

 

✏

शायर: आज़म नैय्यर

(सहारनपुर )

 

यह भी पढ़ें : 

खूबसूरत हैं नज़ारे गांव में | Poem on gaon

Similar Posts

  • ख़फ़ा सी नज़र | Khafa si Nazar

    ख़फ़ा सी नज़र ( Khafa si nazar )   ख़फ़ा ख़फा सी नज़र सनम की बिला वज़ह के अड़ी हुई है टिकी रहे हर घड़ी हमीं पर नजर नहीं हथकड़ी हुई है। नहीं लिखा वो लक़ीर में जब भला मुकद्दर बने कहां से मगर वही दिल कि चाह है बस निगाह उस पर गड़ी हुई…

  • मेरे अहसास | Mere Ehsaas

    मेरे अहसास ( Mere ehsaas )   एक मुद्दत से उसने मेरा हाल नहीं पूछा कहते हैं लफ़्ज़ों की बरसात नहीं करता एक उम्र ही गुजर गई उससे मिले बगैर सुना है अब वो किसी से बात नही करता वो एक खिडकी जो सारे शहर में चर्चा थी कहते हैं अब परिंदा वहाँ ठिकाना नहीं…

  • राज़ गहरे | Raaz Gehre

    राज़ गहरे ( Raaz Gehre ) एक ही चेहरे में छुपे चेहरे बहुत हैं,लबों पे हँसी दिल में राज़ गहरे बहुत हैं, कौन अपना कौन है पराया जाने कैसे?अब जज़्बातों पर भी लगे पहरे बहुत हैं, मुसीबत में भी साथ छोड़ रहे हैं अपने,रिश्तों में रंज़िशों की उठ रही लहरें बहुत हैं, जिसको भी समझा…

  • मोहब्बत की दरिया | Mohabbat ki Dariya

    मोहब्बत की दरिया ( Mohabbat ki Dariya )   अदाओं का तेरा खजाना चाहता हूँ, जवानी का तेरा तराना चाहता हूँ। चलती जिधर फूल खिलते उधर ही, रजा चलके खुद जानना चाहता हूँ। दीवानगी कुछ चढ़ी इस कदर है, कदमों में आँखें बिछाना चाहता हूँ। भीगी-भीगी रातें जलाती हैं मुझको, लगी आग को मैं बुझाना…

  • गजल लिख रहा है

    गजल लिख रहा है   जिसकी माचिस से घर जल  रहा है, वो उसी पर गज़ल लिख रहा है।।   आपके आने का ये असर है, झोपड़ी को महल कह रहा है।।   अच्छी लगती नही बेरुखी अब, मैं नहीं मेरा दिल कह रहा है।।   शेष क्या हो गया है उसे अब, लब को…

  • मेरा सुकुं | Gustakh poetry

    मेरा सुकुं ( Mera sukoon )     मेरा  सुकुं  ओ  नींद  भी  मेरी उड़ाई है जबसे जवानी , टूट के जो तुझपे आई है   शोला बदन को देख के , गुलशन हुआ हैरां बूटे  भी  खिले  ,  आग ये कैसी लगाई है   यूं ही नहीं , गुलाब हुआ सुर्ख रू जालिम आरिज…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *