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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Aise Dhanteras Manaye
    कविताएँ

    धनतेरस का त्योहार आया

    ByAdmin October 29, 2024October 29, 2024

    धनतेरस का त्योहार आया जगमग जगमग चांद सितारेमाता लक्ष्मी के चरण पधारे। व्यापारियों के भाग्य संवारेधनतेरस पर बज रहे नगाड़े। हो रहा दीपावली का शुभारंभनव वर्ष का सफल प्रारंभ। सभी खुशी-खुशी गाये मल्हारधनतेरस का आया है त्यौहार। आज झालर दिपों से सजी सभी की गेहमन के नभ से बरसे माधुरीम नेह। पुजे कुबेर संग धनवंतरी…

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  • इन्हीं दिनों | Inhi Dino
    कविताएँ

    इन्हीं दिनों | Inhi Dino

    ByAdmin October 28, 2024October 28, 2024

    इन्हीं दिनों ( Inhi Dino ) अक्टूबर फिर गुज़रने को हैमेरे ज़ख़्म हरे करने को हैंपारिजात की बेलों परनीले फूल महक रहे थेउम्मीद की शाख़ों परआरज़ू के पंछी चहक रहे थे तुम ने इन्हीं दिनों दबे स्वर में कहाजा रहा हूँ सात समन्दर पारयदि हो सके तोतुम करना इन्तज़ारतुम्हें कैसे बताऊँउस लम्हे की कसकज़मीं पे…

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  • आसमान छोड़ गये
    ग़ज़ल

    आसमान छोड़ गये | Aasman Chhod Gaye

    ByAdmin October 28, 2024October 28, 2024

    आसमान छोड़ गये ( Aasman Chhod Gaye ) 1.ख़मोशियों का फ़कत आसमान छोड़ गयेकिसी की याद के पंछी मचान छोड़ गये2.महक रहा है उसी की महक से तन सारावो दिल दिमाग़ में जो जाफ़रान छोड़ गये3.घड़ी-घड़ी ही ये लगता है आसपास हो तुमदयारे-होश में कैसा गुमान छोड़ गये4.उसी सहारे से मंज़िल पे आ गया मैं…

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  • जगमग जगमग दीप जले है
    ग़ज़ल

    दीप जलते ही | Deep Jalate Hi

    ByAdmin October 28, 2024October 28, 2024

    दीप जलते ही ( Deep Jalate Hi ) छुप के बैठी थी कहीं शातिर हवा।दीप जलते ही, हुई हाज़िर हवा। तर्के-मय वाले परेशानी में हैं,बू-ए-मय अब मत उड़ा काफ़िर हवा। यक-ब-यक गुमसुम नदी क्यों हँस पड़ी,मौज से क्या कह गई आख़िर, हवा। क्या ठिकाना कब, कहाँ को चल पड़े,रुख़ बदलने में तो है माहिर हवा।…

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  • आचार्य श्री तुलसी का 111 वाँ जन्मदिवस ( अणुव्रत दिवस )
    कविताएँ

    आचार्य श्री तुलसी का 111 वाँ जन्मदिवस ( अणुव्रत दिवस )

    ByAdmin October 28, 2024October 28, 2024

    आचार्य श्री तुलसी का 111 वाँ जन्मदिवस ( अणुव्रत दिवस ) वि. सं. 1971 को कार्तिक शुक्ल द्वितीया आज के दिन 110 वर्ष पूर्व आचार्य श्री तुलसी का जन्म हुआ था । आचार्य श्री तुलसी को मेरा भावों से शत – शत वन्दन ! इस अवसर पर मेरे भाव – जीवन उज्ज्वल कर लेअज्ञान तिमिर…

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  • इस दिवाली हर दिल हो दीया
    कविताएँ

    इस बार दिवाली में | Is Baar Diwali Mein

    ByAdmin October 28, 2024October 28, 2024

    इस बार दिवाली में ( Is Baar Diwali Mein ) चौखट पर रख आना एक दिया इस बार दिवाली मेंप्राण निछावर कर दिए जिसने देश की रखवाली में तम ने है किया बसेरा दिन रात घनघोर काली मेंचौखट पर रख आना एक दिया इस बार दिवाली में बिंदी छूटा कंगन टूटा सुना सुना जीवन है…

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  • Hasrat Shayari
    ग़ज़ल

    तुम ही मेरी ह़सरत हो | Hasrat Shayari

    ByAdmin October 28, 2024October 28, 2024

    तुम ही मेरी ह़सरत हो ( Tum hi Meri Hasrat Ho ) तुम ही मेरी ह़सरत हो।तुम ही मेरी चाहत हो। तुम ही हो कशमीर मिरा।तुम ही मेरी जन्नत हो। तुम ही हो मुस्कान मिरी।तुम ही मेरी नख़वत हो। तुम को कैसे भूलूं मैं।तुम ही दिल की राह़त हो। तुम ही हो गुलशन की छब।तुम…

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  • ‘लेखक गांव’ में हिंदी साहित्य में योगदान के लिए डॉ. सत्यवान सौरभ को सम्मानित किया गया
    साहित्यिक गतिविधि

    ‘लेखक गांव’ में हिंदी साहित्य में योगदान के लिए डॉ. सत्यवान सौरभ को सम्मानित किया गया

    ByAdmin October 28, 2024October 28, 2024

    सिवानी के गाँव बड़वा में जन्मे और वर्तमान में हिसार में रह रहे युवा कवि और साहित्यकार डॉ सत्यवान सौरभ ने मुख्य वक़्ता के तौर पर शोध विषयों में भाग लिया। यही नहीं इस दौरान भारत के पूर्व शिक्षा मंत्री और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक के द्वारा डॉ सत्यवान सौरभ को…

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  • शुभम मैमोरियल की मासिक काव्यगोष्ठी और सम्मान समारोह, शायर विनय साग़र जायसवाल की अध्यक्षता में संपन्न
    साहित्यिक गतिविधि

    शुभम मैमोरियल की मासिक काव्यगोष्ठी और सम्मान समारोह, शायर विनय साग़र जायसवाल की अध्यक्षता में संपन्न

    ByAdmin October 28, 2024October 28, 2024

    शुभम मैमोरियल साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था की मासिक काव्यगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन शायर विनय साग़र जायसवाल की अध्यक्षता में ख़ुश लोक सभागार में आयोजित किया गया। संचालन ग़ज़लराज ने किया, मां शारदे की वंदना सत्यवती सिंह सत्या ने की। इस अवसर पर कामेश पाठक (बदायूं) क़दीर आलम (मुरादाबाद) को उनकी साहित्यिक सेवाओं के…

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  • तीर बरसाता है पर नायक नहीं है
    ग़ज़ल

    तीर बरसाता है पर नायक नहीं है

    ByAdmin October 27, 2024October 27, 2024

    तीर बरसाता है पर नायक नहीं है तीर बरसाता है पर नायक नहीं हैशायरी करता है संहारक नहीं है अनकहे अध्याय इंसा क्या पढ़ेगाज़िंदगी जीता है संचालक नहीं है वेदना ही वेदना है शायरी मेंवृक्ष यह भी कोई फलदायक नहीं है वो जो दौलत के लिए रिश्ते ही छोड़ेआदमी तो है मगर लायक़ नहीं है…

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