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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • लेखनी को पलने और बढ़ने का माहौल देता उत्तराखंड का ‘लेखक गांव’
    आलेख

    लेखनी को पलने और बढ़ने का माहौल देता उत्तराखंड का ‘लेखक गांव’

    ByAdmin October 27, 2024October 27, 2024

    ‘लेखक गांव’ लेखकों, कवियों, साहित्यकारों और अन्य रचनाकर्मियों द्वारा महसूस की जा रही व्यावहारिक कठिनाइयों का निवारण करने की ओर एक अभिनव पहल है। उत्तराखंड में यह पहला लेखक गाँव भविष्य का पर्यटक गंतव्य बनकर उभरेगा। यह मंच उन लेखकों के लिए एक सुनहरा अवसर है जो अपने शब्दों के माध्यम से समाज को नयी…

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  • युवा कवि मोहम्मद मुमताज़ हसन को ” साहित्य भूषण सम्मान – 2024 “
    साहित्यिक गतिविधि

    युवा कवि मोहम्मद मुमताज़ हसन को ” साहित्य भूषण सम्मान – 2024 “

    ByAdmin October 27, 2024October 28, 2024

    हमरंग फाउंडेशन, नई दिल्ली द्वारा दिनांक 25 अक्टूबर को साहित्यकारों के उत्साहवर्धन हेतु, हिंदी और उर्दू साहित्य के विस्तार में अमूल्य योगदान देने वाले साहित्यकारों को “साहित्य भूषण सम्मान – 2024” प्रदान कर सम्मानित किया गया, जिसमें टिकारी ज़िला गया, बिहार निवासी युवा कवि और साहित्यकार श्री मोहम्मद मुमताज़ हसन को भी सम्मानित किया गया।…

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  • अब क्या छोडूं
    ग़ज़ल

    अब क्या छोडूं | Ab Kya Chodu

    ByAdmin October 27, 2024October 28, 2024

    अब क्या छोडूं ( Ab Kya Chodu ) हॅंसना गाना बाल बनाना छोड़ दिया सब अब क्या छोडूं,दुनिया भर से बैर तुम्हें तो बोलो तो अब दुनिया छोडूॅं। अपनी सब आशाइश प्यारी सारे शौक अभी तक ज़िंदामुझसे है उम्मीद मगर ये हर ख्वाहिश हर सपना छोड़ूॅं। भॅंवरा सिफ़त तबीयत लेकर हर गुलशन में जाते लेकिन,चाह…

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  • देखे हैं हमने
    ग़ज़ल

    देखे हैं हमने | Dekhe Hai Humne

    ByAdmin October 27, 2024October 27, 2024

    देखे हैं हमने ( Dekhe Hai Humne ) देखे हैं हमने घूम के दुनिया के सब गुलाब।मिलता नहीं कहीं भी सनम आपका जवाब। क्योंकर न उसको नाज़ हो अपने नसीब पर।जिसको तुम्हारे प्यार की दौलत है दस्तयाब। बैठी हुई है ऐसे वो सखियों के दरमियां।तारों में जैसे बैठा हो सजधज के माहताब। किसकी मिसाल किससे…

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  • गंगा-जमुनी कवि सम्मेलन, पुस्तक लोकार्पण और सम्मान समारोह का भव्य आयोजन
    साहित्यिक गतिविधि

    गंगा-जमुनी कवि सम्मेलन, पुस्तक लोकार्पण और सम्मान समारोह का भव्य आयोजन

    ByAdmin October 27, 2024October 27, 2024

    शायर पंडित देवी प्रसाद मस्त जी की 111 वीं जयंती पर गंगा जमुनी कवि सम्मेलन, पुस्तक लोकार्पण एवं सम्मान समारोह का आयोजन कविगोष्ठी आयोजन समिति ने शायर विनय साग़र जायसवाल (मेरी) अध्यक्षता में खुशहाली सभागार में आयोजित किया। मुख्यातिथि रहे डॉ विनोद पागरानी जी विशिष्ट अतिथि डॉ बिजेंद्र पाल शर्मा जी (सहारनपुर) तथा साहित्य भूषण…

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  • तेरे नयनों की बरसात
    कविताएँ

    तेरे नयनों की बरसात

    ByAdmin October 27, 2024October 27, 2024

    तेरे नयनों की बरसात तेरे नयनों की बरसातसावन भादो की है जैसे सौगातमैने रखी है जतन कर अपने पासतेरे नयनों की बरसात …विरह बिछोह बड़ी लंबी है आईआ जाओ तुम की ह्दय प्राण से मैने पूकार है लगाईयाद करे मन मेरा तुम्हे दिन-राततेरे नयनों की बरसात ….सावन भादो की है जैसे सौगातमैने रखी है जतन…

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  • महॅंगी हुई तरकारी
    कविताएँ

    महॅंगी हुई तरकारी

    ByAdmin October 27, 2024October 27, 2024

    महॅंगी हुई तरकारी आज बेहद-महॅंगी हो गई है देशों में ये तरकारी,क्या बनाएं, क्या खाएं सोच रही घरों की नारी‌।छू रहा दाम आसमान इन तरकारियों का सारी,बढ़ रही है मुसीबतें आम आदमी और हमारी।। कभी सोचूं ये शिकायत करुं मैं किससे तुम्हारी,आलू-प्याज़ ख़रीदना भी आज हो रहा दुश्वारी।ग़रीब अमीर जिसे रोज़ खाते आज़ दे रहें…

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  • अजब दोस्ती के गजब चर्चे
    ग़ज़ल

    अजब दोस्ती के गजब चर्चे

    ByAdmin October 27, 2024October 27, 2024

    अजब दोस्ती के गजब चर्चे मुकद्दर से मिली छाह दोस्ती की lजिंदगी से बुलंद राह दोस्ती की ll मौत से भी छीन कर लाएँगे lदोस्त की दोस्ती सभ में जगाएँगे ll वफ़ा और दोस्ती का कोई मोल नहीं lजब पता चला तो ओ मेरे पास नहीं ll फिर से खड़ी हुई दुनिया मेरी lपहला दर्पण…

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  • Ghar Ghar Deep jale Diwali
    कविताएँ

    आओ हम सब दीप जलाएं

    ByAdmin October 27, 2024October 27, 2024

    आओ हम सब दीप जलाएं आओ हम सब दीप जलाएं पहला घट में दूजा घर में ।अंधकार किसी तरह की रह ना पाए सभी नारी-नर में।। लक्ष्मी गणेश वंदना से पहले सुकर्मों को आत्मसात करें,उनका आचरण प्रदर्शित हो कुछ तो हम सबके कर में । राम से पहले लक्ष्मण,भरत,शत्रुघ्न, हनुमान बनें हम ,तब भवसागर पार…

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  • दीपक वोहरा की कविताएं
    कविताएँ

    दीपक वोहरा की कविताएं | Deepak Vohra Poetry

    ByAdmin October 27, 2024November 25, 2024

    कविता में वो कविता मेंकविता ढूंढ़ रहे हैंमैं मनुष्यता वो कविता मेंभाषा देख रहे हैंमैं तमीज़ वो कविता मेंशिल्प शैली छान रहे हैंमैं पक्षधरता छंद, रस, बिंब ,सौन्दर्य, लयन जाने क्या क्या कसौटी परवो परख रहे हैं कविता और मैं न बाज़ीगर हूं कविता कान ही तथाकथित बड़ा साहित्यकारबस मनुष्यता का पक्षधर हाथ वो हाथजो…

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