• अपनी आँखों में आसूँ खुशी के

    अपनी आँखों में आसूँ खुशी के अपनी आँखों में आसूँ खुशी केस्वप्न सच हो गये ज़िन्दगी के उनके आते ही आयीं बहारेंलौट आये हैं दिन आशिकी के कुछ तो मजबूरियां होगीं उनकीपास जाते न यूँ वो किसी के बात क्या है जो तू डर रहा हैतूने देखे हैं दिन बेबसी के जिन बहारों का मौसम…

  • ये देश | Yeh Desh

    ये देश ( Yeh Desh ) ये देश है वीर जवानों का,कुर्बानी औ बलिदानों का।आ तुझे सुनाऊं ओ यारा,कुछ गाथा उन अभिमानों का। अपनी नींद गंवा के वे सब,देश की रक्षा करते हैं,वतन की खातिर मर मिटते हैं,नहीं मौत से डरते हैं। जो हुए शहीद थे सरहद पे,वे किसी की आँख के तारे थे।जो हुए…

  • कायनात के संकेत और मेरा विश्वास

    सुनो दिकु, तुमसे कोई बात नहीं हुई, न कोई खबर आई है, न ही किसी ने कुछ बताया, पर फिर भी मेरे दिल के किसी कोने में एक अजीब-सा यकीन घर कर गया है कि तुम लौटने वाली हो। मुझे लगता है, जैसे कायनात मुझे संकेत दे रही है, जैसे हर तरफ से मुझे यह…

  • अतिक्रांत छंद – विषममात्रिक

    जय गणेश जय गणेश गणपति दाता, तुम्हीं हो मेरे अपने,कर जोड़े द्वारे ठाढ़ी, कर दों पूरे सपने l हो प्रसन्न जग के स्वामी, फलित कर्मों में जलती ,मैं पापी लम्पट लोभी, अगणित करती गलती l अज्ञानी पर हूँ बालक, लगा चरणों से अपने ,अंजानी राहें चल कर, लागे माला जपने l प्रभु ज्ञानी अंतरयामी, प्रणामी…

  • विश्व स्तरीय रामलीला नरईपुर की

    आजमगढ़, तहसील और ब्लाक मार्टिनगंज के अंतर्गत अपनी ग्राम पंचायत नरई-सुल्तानपुर की रामलीला जो नरईपुर में आज भी मंचित होती है इसकी शुरुआत कब और कैसे हुई,ठीक-ठीक से कहना मुश्किल है। इस सिलसिले में जब मैंने मुंबई से आदरणीय श्री मदन मोहन चौबे जी तथा आदरणीय कैलाश मिश्र जी से ऑनलाइन बात की तो उन्होंने…

  • हर तरफ़ उजाला है | Har Taraf Ujala Hai

    हर तरफ़ उजाला है ( Har Taraf Ujala Hai ) आज जो हर तरफ़ उजाला हैमेरी ग़ज़लों ने रंग डाला है रोज़ करता हूँ मैं ग़ज़ल गोईशायरों का यही निवाला है हमने पुरखों की इस विरासत कोजैसे तैसे भी हो सँभाला है तब कहीं जाके शायरी आईदिल के भीतर बहुत खँगाला है लोग उड़ने लगें…

  • कोई अपना तो जग में हुआ ही नहीं

    कोई अपना तो जग में हुआ ही नहीं कोई अपना तो जग में हुआ ही नहींप्यार क्या है मुझे यह पता ही नहीं आज वो भी सज़ा दे रहें हैं मुझेजिन से अपना कोई वास्ता ही नहीं मैं करूँ भी गिला तो करूँ किसलिएकोई अपना मुझे तो मिला ही नहीं जिनसे करनी थी कल हमको…

  • दीद-ए-तर | Dida-e-Tar

    दीद-ए-तर ( Dida-e-Tar ) वो मेरे लिए दीद-ए-तर है के नहीं है।उल्फ़त का मिरी उसपे असर है के नहीं है। रस्मन तो उसे आना था फिर भी नहीं आया।उसको मिरे मरने की ख़बर है के नहीं है। तारीकियों इतना तो बता दो कभी मुझको।शाम-ए-ग़मे-हिज्रां की सह़र है के नहीं है। आजाऊंगा,आजाऊंगा इतनी तो ख़बर दो।मेह़फ़िल…

  • मन बसी झुंझलाहट

    मन बसी झुंझलाहट मेरे दुःख दर्द का तुज पर हो ऐसा असर ,कि आईना तुम देखो और चहरा मेरा दिखे l सबसे ज्यादा दर्द तो तब हुवा ,जब तुम्हे देखे बिना लौट आया l इतना दर्द देकर भी मन को भाती हो ,अगर हमदर्द होती तो क्या आलम हो l क्या कहूँ ,एक ही हमदर्द…

  • डॉ.सत्यवान सौरभ की सात बाल कवितायेँ

    1. छोटे-छोटे पंछी छोटे-छोटे पंछी लेकिन,बातें बड़ी-बड़ी सिखलाते।उड़ते ऊँचे आसमान में,मंजिल की ये राह दिखाते।।ये छोटे-छोटे जीव मगर,इनसे ये नभ भी हारा है।आत्मबल से ओत-प्रोत ये,मिल उड़ना इनको प्यारा है।बड़े-बड़े जो ना कर पाए,पल भर में ये है कर जाते।छोटे-छोटे पंछी लेकिन,बातें बड़ी-बड़ी सिखलाते।लड़ते हैं ये तूफानों से,उड़ सूरज से भी बात करें।पंख रुकते हैं…