Khalvat-o-jalvat

ख़ल्वत-ओ-जल्वत | Khalvat-o-jalvat

ख़ल्वत-ओ-जल्वत

( Khalvat-o-jalvat )

ख़ल्वत-ओ-जल्वत में यारों फ़र्क ही कितना रहा
उसकी यादों का सदा दिल पर लगा पहरा रहा।

मुझमें ही था वो मगर किस्मत का लिक्खा देखिए
अंजुमन में गैऱ के पहलू में वो बैठा रहा।

कुछ कमी अर्ज़ -ए – हुनर में भी हमारी रह गई
वो नहीं समझा था दिल की बात बस सुनता रहा।

यूॅं तो ज़ाहिर कर रहा था मुत्मइन खुद को बहुत
चाॅंद सा वो रुख़ मगर हर वक्त ही उतरा रहा।

की ज़माने ने गिराने की बहुत साजिश मगर
हौसलों की भर के मैं परवाज़ बस उड़ता रहा ।

बज़्म में उसके हवाले से पढ़े क्या शेर दो
आज बस इस वाकये का शहर में चर्चा रहा।

इम्तिहां में नाम लिखने थे फरिश्तों के नयन
मैं मुसलसल नाम उस इक शख़्स का लिखता रहा।

सीमा पाण्डेय ‘नयन’
देवरिया  ( उत्तर प्रदेश )

ख़ल्वत-ओ-जल्वत – भीड़ और तन्हाई
अंजुमन – सभा
अर्ज-ए -हुनर – कहने का तरीका
मुत्मइन – निश्चिंत
परवाज़ – उड़ान
मुसलसल – लगातार

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • बदले की कहानी किसलिए

    बदले की कहानी किसलिए ( Badle ki Kahani Kisliye ) वक़्त दुहराता है बदले की कहानी किसलिएदिल दुखायें जो वो बातें दिल में लानी किसलिए ज़ुल्म ढ़ाकर मेरे दिल पर रो रहे हैं आप क्यों,मेरे बंजर दिल पे आख़िर मेहरबानी किसलिये । जब मुकम्मल ही नहीं होने ये किस्से इश्क़ केफिर शुरू मैं भी करूँ…

  • जाइए सो जाइए | Jayie so Jayie

    जाइए सो जाइए ( Jayie so Jayie ) छोड़िए भी अब ज़राफ़त जाइए सो जाइए। हो गयी काफ़ी शरारत जाइए सो जाइए। जानेमन जान-ए-मसर्रत जाइए सो जाइए। बन्द कीजे बाबे उल्फ़त जाइए सो जाइए। नींद सा आराम दुनिया की किसी शय में नहीं नींद है अल्लाह नेअ़मत जाइए सो जाइए। मैं तो पागल हूं न…

  • दर्द ए जुदाई | Dard – E – Judai

    दर्द ए जुदाई ( Dard – E – Judai )    दर्द ए जुदाई सहता बहुत हूँ मैं कुछ दिनों से तन्हा बहुत हूँ दुश्मन मेरा क्यों बनता है वो ही मैं प्यार जिससे करता बहुत हूँ उल्फ़त से मुझसे तुम पेश आना मैं नफ़रतों से डरता बहुत हूँ मिलती नहीं है खुशियाँ कहीं भी…

  • यह कहानी फिर सही | Phir Sahi

    यह कहानी फिर सही ( Yeh kahani phir sahi )    हमने कब किसको पुकारा यह कहानी फिर सही किसको होगा यह गवारा यह कहानी फिर सही आबरू जायेगी कितनों की तुम्हें मालूम क्या किसने किसका हक़ है मारा यह कहानी फिर सही रिश्तों को मीज़ान पर लाकर के जब रख ही दिया क्या रहा…

  • परिवार अपना | Parivaar Apna

    परिवार अपना ( Parivaar Apna ) जहाँ से निराला है परिवार अपनाइसी पे लुटाता रहूँ प्यार अपना कदम बेटियों के पड़े घर हमारेमहकने लगा है ये संसार अपना ये बेटे बहू कब हुए है किसी केजो इनपे जताऊँ मैं अधिकार अपना मजे से कटी ज़िन्दगी भी हमारीचला संग मेरे जो दिलदार अपना करूँ मैं दुआएं…

  • कहां ढूंढू | Kahan Dhundu

    कहां ढूंढू ( Kahan dhundu )   गौतम, नानक-राम कहां ढूंढू मजहब के चार धाम कहां ढूंढू अमन के जैसे गुजरे है दिन वैसी सुबहो – शाम कहां ढूंढू मुंह में राम है बगल में खंजर ‘ सत्यवादी ‘ इक निज़ाम कहां ढूंढू मजहब-मजहब लड़ने वाले हैं सब ‘इंसानियत ‘ का पैगाम कहां ढूंढू झूठ-फरेब…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *