• सबसे बड़ी समस्या-‘शुगर (डायबिटीज)’

    “मैडम जी, कल आप स्कूल नहीं आई। आप तो मुझसे स्कूल आने को बोल रही थी, फिर अचानक ऐसा क्या हुआ? घर परिवार में सब खैरियत से तो है?” असद सर ने रूमा मैडम से पूछा। “क्या बताऊं भैया? मैं तो अपने एकलौते बेटे जुनैद(28 वर्ष) की ओर से बहुत दुखी हूँ। कमबख्त कहना ही…

  • इतने शून्य उफ इतने शून्य

    इतने शून्य उफ इतने शून्य इतने शून्य उफ इतने शून्यये शून्य जीवनये जीवन का शून्यये आसमान शून्यये आसमानों में शून्यये रिश्ते शून्यये लहू में बहता शून्यइतने शून्य.. उफ इतने शून्यशून्य ही शून्यदुनिया का नही पता मगर मैं तो रह गया दंग.इतने शून्य उफ इतने शून्य.लड़ने को कहते सब मगर शून्य से कैसे करे कोई जंगदुनिया…

  • ‘एकता’

    “भैया, पापा जी और ताऊ जी में झगड़ा हो गया है। बहुत शोर शराबा मचा हुआ है। कोई किसी से कम नहीं है। ताऊ जी घर में रखा डंडा निकालकर ले आए हैं। ताऊ जी पापा को जान से मारने के लिए कह रहे हैं। हमें बहुत डर लग रहा है भैया। आप जल्दी से…

  • एक अधूरी कहानी का दस्तावेज: ‘राज सर आईपीएस’

    प्रेम की सबसे सच्ची परीक्षा तब होती है जब वह समय, समाज और सत्ता की सख्त दीवारों से टकराता है। ‘राज सर आईपीएस’ केवल एक प्रेम कथा नहीं, बल्कि एक उच्च शिक्षित, भावुक और समर्पित युगल की ऐसी आत्मकथा है, जिसमें प्रेम के बीज अंकुरित होते हैं, पनपते हैं, एक पवित्र रिश्ते में बदलते हैं…

  • “भविष्य बताने वाले, वर्तमान से बेख़बर क्यों”

    (देश में इतने बड़े-बड़े भविष्य वक्ता… फिर भी किसी बड़े हादसे की ख़बर तक नहीं मिलती?) जब आपदा आई और बाबा ऑफलाइन थे, जो लोग दावा करते हैं कि उनका “ऊपर वाले से सीधा संपर्क” है, वे हर बड़ी आपदा, दुर्घटना या संकट के समय चुप क्यों हो जाते हैं? क्या उनका दिव्य नेटवर्क केवल…

  • हीर-रांझा और नेटवर्क

    एक दिन हीर रांझे से नाराज हो गई। हुआ यूं कि शाम के वक्त जब हीर और रांझा फोन पर बात कर रहे थे, तब हीर की माताजी और भाई हीर के इर्द-गिर घूम रहे थे। उनकी हीर पर नज़र थी। हीर रांझे को अपनी सहेली बताकर बतिया रही थी। रांझा हीर से खुलकर बात…

  • निवेश

    एक था धनीराम और एक था सुखीराम। दोनों में गाढ़ी मित्रता थी। दोनों ही शुगर के मरीज थे। दोनों की माली हालत अच्छी नहीं थी। उन्होंने साथ में बहुत काम किये लेकिन सफलता नहीं मिली। फिर उनके किसी मित्र ने उन्हें प्रॉपर्टी(जमीन) खरीदने-बेचने के काम की सलाह दी और बताया कि जमीन के रेट दिन…

  • अनाथ

    “कहाँ मर गयी? और कितनी आवाज लगानी पड़ेगी? जल्दी से भैया का दूध गर्म करके लेकर आ। देख नहीं रही कि भैया भूख के कारण लगातार रोता जा रहा है।” राधा ने गुस्से से तेज़ आवाज में दस वर्षीय आराध्या से कहा। “बस अभी लायी मम्मी। थोड़ा सा स्कूल का काम बाकी रह गया था,…

  • शूल शैया

    शूल शैया पर लेटे भीष्म पितामह के इच्छा मृत्यु के वरदान को आज अभिशप्त साबित करता ये एक-एक पल, एक -एक युग सा भीष्म पितामह को महसूस हो रहा था।         दर्द जिस्म के पोर – पोर  से लहू बनकर सैलाब ला चुका था।       विडंबना यह कि मुख से आह भी निकालना स्वयं का…

  • पितृ दिवस: एक दार्शनिक चिंतन

    पिता, यह केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक ऐसी सत्ता है जो हमारे जीवन के ताने-बाने को बुनती है। मातृ दिवस पर जितना भावुक उद्रेक और काव्यमय अभिव्यक्ति होती है, पितृ दिवस पर उतनी सहजता से नहीं दिखती। शायद इसलिए कि पिता का प्रेम अक्सर मौन, अदृश्य और कठोरता की चादर ओढ़े होता है। यह…