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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • महान कर्मयोगी: : योगेश्वर श्रीकृष्ण
    विवेचना

    महान कर्मयोगी: : योगेश्वर श्रीकृष्ण

    ByAdmin August 25, 2024

    श्री कृष्ण के नाम से कोई भी ऐसा भारतीय नहीं होगा जो उनसे परिचित न हो । उनका नाम अवतारी सत्ता के रूप में प्रमुखता के साथ लिया जाता है । जो व्यक्ति यह समझता है कि वह भगवान थे और उनके जीवन में कोई परेशानी नहीं होगी तो ऐसा नहीं है। श्री कृष्ण का…

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  • नन्हे कन्हैया | Nanhe Kanhaiya
    कविताएँ

    नन्हे कन्हैया | Nanhe Kanhaiya

    ByAdmin August 25, 2024

    नन्हे कन्हैया ( Nanhe Kanhaiya ) यशोदा के लला नंद बाबा के प्यारे नन्हे कन्हैया छोटी दंतिया दिखाएं पग घुंघरू बांध इत उत डोले प्यारी प्यारी मुरली की तान सुनाएं मोर पंख मस्तक पर सुंदर सजाएं दूध दही संभालो मटकी फोड़न को आए कदंब के झूलों में वृंदावन की गलियों में आए कन्हैया को ढूंढने…

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  • घर नहीं मिला
    ग़ज़ल

    घर नहीं मिला | Ghazal Ghar Nahi Mila

    ByAdmin August 25, 2024

    घर नहीं मिला ( Ghar Nahi Mila ) हमसे मुसाफिरों को कहीं घर नहीं मिला रस्ते बहुत थे राह में रहबर नहीं मिला वीरान रास्तों में पता किससे पूछते राह-ए-सफ़र में मील का पत्थर नहीं मिला दिन रात हम उसी के ख़यालों में ही उड़े तन्हाइयों में चैन तो पल भर नहीं मिला उसके सितम…

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  • पानी पूरी | Kavita Pani Puri
    कविताएँ

    पानी पूरी | Kavita Pani Puri

    ByAdmin August 25, 2024

    पानी पूरी ( Pani Puri ) देखते ही जी ललचाए मुंह में पानी गजब आए तीखी , खट्टी ,चटपटी सी मीठी मीठी चटनी के साथ खाए बिन रहा ना जाए ।। भूख में और लगती ये स्वादिष्ठ आलू मसाला डालकर फुटकी झट से भूख को मिटाने वाली पानी – पूरी यह कहलाती है ।। जगह…

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  • कैनवस के पास | Kavita Canvas ke Paas
    कविताएँ

    कैनवस के पास | Kavita Canvas ke Paas

    ByAdmin August 24, 2024August 24, 2024

    कैनवस के पास ( Canvas ke Paas ) कैनवस पर तस्वीर बनाते समय ‘कैनवस के पास’ सिर्फ़ रंग और ब्रश ही नहीं बिखरे होते और भी बहुत कुछ होता है- तुम्हारी यादें , टूटे सपनों के टुकड़े, गुज़री मुहब्बत पानी की बोतल, नज़दीक का चश्मा, पीले पत्ते… धूप, कुर्सी, घास, बड़ी छतरी , कैप, पैन,…

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  • अस्मत | Asmat
    ग़ज़ल

    अस्मत | Asmat

    ByAdmin August 24, 2024

    अस्मत ( Asmat ) हर तरफ एक कोहराम मचा है, लगता है हर दिल में आग लगा है। नरभक्षी जैसे झपट रहे एक दूसरे पर, मानो इंसान के अंदर का जानवर जगा है। सभी शामिल हो गए फरेबी भीड़ में, अब किसी का साफ नहीं गिरेबान बचा है। अपने ही अपनों का हक़ खाने लगा…

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  • हमदम मेरे | Humdum Shayari
    ग़ज़ल

    हमदम मेरे | Humdum Shayari

    ByAdmin August 24, 2024

    हमदम मेरे ( Humdum Mere ) हमदम मेरे कब आओगे या ऐसे ही तड़पाओगे वक़्त है अब भी आ जाओ तुम वक़्त गया तो पछताओगे उतना ही उलझेंगी काकुल जितना इनको सुलझाओगे आ भी जाओ बाहों में अब कब तक यूं ही तरसाओगे फोन पे ही फ़रमा दो दिलबर हम पे करम कब फ़रमाओगे खोल…

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  • यहाँ संहार राखी का | Ghazal Sanhar Rakhi ka
    ग़ज़ल

    यहाँ संहार राखी का | Ghazal Sanhar Rakhi ka

    ByAdmin August 23, 2024August 23, 2024

    यहाँ संहार राखी का ( Sanhar Rakhi ka ) मनाएँ हम यहाँ कैसे बता त्यौहार राखी का । नहीं बहनें हिफ़ाज़त में यहाँ बाज़ार राखी का ।। १ मिटा दो पर्व राखी का कहाँ अब मान होता है । जहाँ बहनें गई लूटी वहाँ त्यौहार राखी का ।। २ सभी की हैं यहाँ बहनें कलाई…

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  • दिल को छूने वाली ग़ज़ल
    कहानियां

    ख़ुद को शीशे में ढाल के रखना | दिल को छूने वाली ग़ज़ल

    ByAdmin August 23, 2024August 23, 2024

    ख़ुद को शीशे में ढाल के रखना। ख़ुद को शीशे में ढाल के रखना। अपनी पगड़ी संभाल के रखना। डस न ले तीरगी कहीं तुमको। घर में दीपक उजाल के रखना। सांप इनमें ही छुप के पलते हैं। आस्तीनें संभाल के रखना। हो न ताख़ीर उनको देने में। हाथ पर दिल निकाल के रखना। दोस्त…

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  • पारदर्शी दृष्टि | Laghu Katha Paradarshi Drishti
    कहानियां

    पारदर्शी दृष्टि | Laghu Katha Paradarshi Drishti

    ByAdmin August 22, 2024

    पारदर्शी दृष्टि ( Paradarshi Drishti ) दो मित्र के लिए अपने पसंद की दो राजनीतिक पार्टियांँ हो सकती है, लेकिन मित्रता अपनी जगह पर कायम रहती है, इसमें पार्टियां नहीं आती, आती हैं तो बस मित्रता। इसे कभी भी टूटने नहीं देना चाहिए। लेकिन बहुत कम ही लोग होते हैं जो इस बात को समझते…

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