• हल छठ पर हाइकू

    हल छठ पर हाइकू माह पावन भाद्रपद षष्ठी को छठ पूजन, पुत्र पुत्री के लंबी उम्र के हित व्रत रखते, छट की पूजा करते हिलमिल प्रकृति पूजा, लगता भोग चावल पसही का है उपयोग, महुआ लाते दूध दही भैंस का खाया करते। कर अर्पण सतंजा अनाज को भर कुल्हड़, महुआ पत्ते और उसके दोने शुभ…

  • मुंतज़िर रहता खुशी को | Ghazal Muntazir Rahta

    मुंतज़िर रहता खुशी को ( Muntazir Rahta ) मुंतज़िर रहता खुशी को मन बहुत कट रहा है गम भरा जीवन बहुत प्यार की खुशबू से मैं वीरान हूँ है कहीं उल्फ़त भरा गुलशन बहुत एक मैं हूँ प्यार से भीगा नहीं प्यार का बरसा कहीं सावन बहुत जिंदगी में भेज दे कोई हसीं जिंदगी में…

  • महान कर्मयोगी: : योगेश्वर श्रीकृष्ण

    श्री कृष्ण के नाम से कोई भी ऐसा भारतीय नहीं होगा जो उनसे परिचित न हो । उनका नाम अवतारी सत्ता के रूप में प्रमुखता के साथ लिया जाता है । जो व्यक्ति यह समझता है कि वह भगवान थे और उनके जीवन में कोई परेशानी नहीं होगी तो ऐसा नहीं है। श्री कृष्ण का…

  • नन्हे कन्हैया | Nanhe Kanhaiya

    नन्हे कन्हैया ( Nanhe Kanhaiya ) यशोदा के लला नंद बाबा के प्यारे नन्हे कन्हैया छोटी दंतिया दिखाएं पग घुंघरू बांध इत उत डोले प्यारी प्यारी मुरली की तान सुनाएं मोर पंख मस्तक पर सुंदर सजाएं दूध दही संभालो मटकी फोड़न को आए कदंब के झूलों में वृंदावन की गलियों में आए कन्हैया को ढूंढने…

  • घर नहीं मिला | Ghazal Ghar Nahi Mila

    घर नहीं मिला ( Ghar Nahi Mila ) हमसे मुसाफिरों को कहीं घर नहीं मिला रस्ते बहुत थे राह में रहबर नहीं मिला वीरान रास्तों में पता किससे पूछते राह-ए-सफ़र में मील का पत्थर नहीं मिला दिन रात हम उसी के ख़यालों में ही उड़े तन्हाइयों में चैन तो पल भर नहीं मिला उसके सितम…

  • पानी पूरी | Kavita Pani Puri

    पानी पूरी ( Pani Puri ) देखते ही जी ललचाए मुंह में पानी गजब आए तीखी , खट्टी ,चटपटी सी मीठी मीठी चटनी के साथ खाए बिन रहा ना जाए ।। भूख में और लगती ये स्वादिष्ठ आलू मसाला डालकर फुटकी झट से भूख को मिटाने वाली पानी – पूरी यह कहलाती है ।। जगह…

  • कैनवस के पास | Kavita Canvas ke Paas

    कैनवस के पास ( Canvas ke Paas ) कैनवस पर तस्वीर बनाते समय ‘कैनवस के पास’ सिर्फ़ रंग और ब्रश ही नहीं बिखरे होते और भी बहुत कुछ होता है- तुम्हारी यादें , टूटे सपनों के टुकड़े, गुज़री मुहब्बत पानी की बोतल, नज़दीक का चश्मा, पीले पत्ते… धूप, कुर्सी, घास, बड़ी छतरी , कैप, पैन,…

  • अस्मत | Asmat

    अस्मत ( Asmat ) हर तरफ एक कोहराम मचा है, लगता है हर दिल में आग लगा है। नरभक्षी जैसे झपट रहे एक दूसरे पर, मानो इंसान के अंदर का जानवर जगा है। सभी शामिल हो गए फरेबी भीड़ में, अब किसी का साफ नहीं गिरेबान बचा है। अपने ही अपनों का हक़ खाने लगा…

  • हमदम मेरे | Humdum Shayari

    हमदम मेरे ( Humdum Mere ) हमदम मेरे कब आओगे या ऐसे ही तड़पाओगे वक़्त है अब भी आ जाओ तुम वक़्त गया तो पछताओगे उतना ही उलझेंगी काकुल जितना इनको सुलझाओगे आ भी जाओ बाहों में अब कब तक यूं ही तरसाओगे फोन पे ही फ़रमा दो दिलबर हम पे करम कब फ़रमाओगे खोल…

  • यहाँ संहार राखी का | Ghazal Sanhar Rakhi ka

    यहाँ संहार राखी का ( Sanhar Rakhi ka ) मनाएँ हम यहाँ कैसे बता त्यौहार राखी का । नहीं बहनें हिफ़ाज़त में यहाँ बाज़ार राखी का ।। १ मिटा दो पर्व राखी का कहाँ अब मान होता है । जहाँ बहनें गई लूटी वहाँ त्यौहार राखी का ।। २ सभी की हैं यहाँ बहनें कलाई…