• डॉ. सत्यवान सौरभ की कविताएं | Dr. Satyawan Saurabh Hindi Poetry

    “ये कांवड़ उठाने से कुछ नहीं होगा” कांवड़ उठाए घूम रहा है,कंधों पे धर्म लादे जा रहा है,गांव का होनहार मर गया,माँ बेटे की राख छू रही है……और सरकार चुप है। शिक्षक था बाप, फिर भी मौन रहा,सिखा न सका—कि आस्था नहीं, पढ़ाई बचाती है!पर वो चुप रहा…क्योंकि आस-पास मंदिर थेऔर इलेक्शन नज़दीक था। बच्चा…

  • दोस्त | Kavita Dost

    दोस्त ( Dost ) ( 2 ) दोस्त बिना है जीवन अधूरा लड्डू सी है गजब दोस्ती आटा संग जैसे रमे बूरा बिन कहे पहचान सब जाए ह्दय मन हलचल का हाल पूरा मित्रता नमक और पानी धरती और फसल धानी ना शर्म झिझक ना कोई बने ज्ञानी कृष्ण सुदामा की अनुपम कहानी बचपन से…

  • मित्र दिवस | Kavita Mitra Divas

    मित्र दिवस ( Mitra Divas ) चेहरा भूल जाओगे तो, शिकायत नहीं करेंगे। नाम भूल जाओगे तो, गिला नहीं करेंगे। और मेरे दोस्त, दोस्ती कि कसम है तुझे। जो दोस्ती भूल जाओगे, तो कभी माफ नहीं करेंगे। खुशी से दिल, आबाद करना मेरे दोस्त। और गम को दिल से आज़ाद करना। हमारी बस इतनी, गुजारिश…

  • गठबंधन | Kavita Gathbandhan

    गठबंधन ( Gathbandhan ) तेरे मेरे मिलन से हम लोग खुश है। मानो जैसे जिंदगी अब करीब आ गई हो। जतन किये थे हमने इसलिए मिल गये हो। और मेरी जिंदगी में फूल खिला दिये हो।। प्यार मोहब्बत करते नही तो हम दोनों मिल नहीं पाते। जिंदगी की हकीकत को हम समझ नही पाते। और…

  • तेरी अदाएं | Geet Teri Adayein

    तेरी अदाएं ( Teri Adayein ) बहुत ख़ूबसूरत हैं तेरी अदाएं। कहां तक सनम तुझसे नज़रें चुराएं। ये काजल की डोरी,ये माथे की बिंदिया। चुराती हैं रह-रह के आंखों की निंदिया। तिरे अबरुओं के ये मंज़र निराले। तसव्वुर में आ-आ के दिल गुदगुदाएं। कहां तक सनम तुझसे नज़रे चुराएं। बदन तेरा जैसे गुलाबों की डाली।…

  • हे राजन | Ghazal Hey Rajan

    हे राजन ( Hey Rajan ) हे, राजन तेरे राज में,रोजगार नही है, मुफ़लिसों को वाजिब, पगार नही है। ==================== है खास जिनके धन के अंबार लगे है, देखो गरीब तुम्हारे, गुनाहगार नही है। ==================== ये कोई दुश्मन नही है तेरे तरस करो, भूखे है शोहरत के,तलबगार नही है। ==================== भर पेट खाना,बदन को छत…

  • आप की याद | Ghazal Aap ki Yaad

    आप की याद ( Aap ki Yaad ) शादमानी का एक लशकर है। आप की याद सब से बेहतर है। दिल ही मिट जाएगा मिटाएं तो। आप का नाम दिल के अन्दर है। किसकी किससे मिसाल दें बोलो। एक से एक जग में बरतर है। मोह लेता है आन में दिल को। आप का ह़ुस्न…

  • सावन की फुहार | Kavita Sawan ki Fuhar

    सावन की फुहार ( Sawan ki Fuhar ) सावन की पड़ें फुहार तन मन में मस्ती छा जाए मेघा गाएं राग मल्हार जियरा धक-धक करता जाए ।। जियरा धक-धक करता जाए दिल में कोई हूक उठाए धरती अंबर का ये प्यार जियरा धक-धक करता जाए।। सावन की पड़े फुहार तन-मन में मस्ती छा जाए ।।…

  • आज़ादी | Hindi Poem Azadi

    आज़ादी ( Azadi ) है कोई सैनानी सड़कों पर आ कर हम को भी दिलाऐ मंहगाई,बेरोजगारी, अशिक्षा और असमानता से, भूखमरी, अल्प पगारी, मिलावट और मक्कारी से, आज़ादी,,,!!! है कोई सैनानी सड़कों पर आ कर हम को भी दिलाऐ पूंजीवाद, जमाखोरी, भ्रम और भ्रष्टाचारी से, घृणा,अपमान, छूआछूत की बिमारी से, आज़ादी,,,!!! है कोई सैनानी सड़कों…

  • बलजीत सिंह : खेती करते हुए दस किताबें लिखने वाले अद्भुत लेखक की कहानी

    अलग-अलग विधाओं में दस पुस्तकें लिख चुके हांसी के राजपुरा के बलजीत सिंह; पेशे से किसान होने के साथ ही मन और आत्मा से एक सच्चे साहित्यकार भी हैं। हिसार के जाने-माने साहित्यकार डॉ० रामनिवास ‘मानव’ को अपना गुरुवर मानते है और हिसार के छाजूराम मेमोरियल जाट कॉलेज में उनसे हिंदी पढ़े हैं। काॅलेज के…