Skip to content
TheSahitya – द साहित्य
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
  • EnglishExpand
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • My ProfileExpand
    • Logout
    • Account
TheSahitya – द साहित्य
  • कागा की काव्य कृतियों का स्पीकर देवनानी ने किया विमोचन
    साहित्यिक गतिविधि

    कागा की काव्य कृतियों का स्पीकर देवनानी ने किया विमोचन

    ByAdmin July 17, 2024

    चौहटन के पूर्व विधायक व साहित्यकार डॉ. तरुण राय कागा द्वारा रचित काव्य कृतियों – “मानवता के मायने” व “माटी की महक” का विमोचन मंगलवार को राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी द्वारा किया गया। यह जानकारी देते हुए कागा के पुत्र ललित राय कागा ने बताया कि बजट भाषण चर्चा पर चल रहे सदन के…

    Read More कागा की काव्य कृतियों का स्पीकर देवनानी ने किया विमोचनContinue

  • मुक़द्दर से सामना है मेरा
    ग़ज़ल

    मुक़द्दर से सामना है मेरा | Muqaddar se Samna hai Mera

    ByAdmin July 17, 2024

    मुक़द्दर से सामना है मेरा ( Muqaddar se Samna hai Mera ) बड़े अजीब से मंज़र से सामना है मेरा बग़ैर कश्ती समुंदर से सामना है मेरा जहाँ जलाई गईं हसरतें मेरे दिल की उसी चराग़ उसी दर से सामना है मेरा अजीब दिल की ये हालत है क्या बताऊं तुम्हें किसी हसीन के पत्थर…

    Read More मुक़द्दर से सामना है मेरा | Muqaddar se Samna hai MeraContinue

  • बड़ा नादान है तू | Bada Nadan Hai tu
    ग़ज़ल

    बड़ा नादान है तू | Bada Nadan Hai tu

    ByAdmin July 17, 2024

    बड़ा नादान है तू ( Bada Nadan Hai tu ) बड़ा नादान है तू बेवजह हलकान होता है समझ पाना मिज़ाज -ए-यार क्या आसान होता है। लबों पे मुस्कुराहट कहर लेकिन दिल में रखते हैं नया इक रोज़ ज़ारी क़त्ल का फ़रमान होता है। हमारे दिल में क्या है क्या नहीं सब जानता है वो…

    Read More बड़ा नादान है तू | Bada Nadan Hai tuContinue

  • लाल मिट्टी
    कहानियां

    लाल मिट्टी | Lal Mitti

    ByAdmin July 16, 2024

    ठाकुर श्याम सिंह के पूछने पर कि हरिया तेरे घर में लड़का पैदा हुआ है कि लड़की, तो उसने अपनी छाती खुशी से ठोकते हुए कहा था-“बेटी हुई है लल्ला बेटी, हम बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं मानते और दहेज से भी नहीं कांपते कि कहाँ से लाएंगे देंगे दहेज। और ,,,, और जो दहेज…

    Read More लाल मिट्टी | Lal MittiContinue

  • समाज के नवनिर्माण में साहित्य की भूमिका
    निबंध

    समाज के नवनिर्माण में साहित्य की भूमिका

    ByAdmin July 16, 2024

    समाज के नवनिर्माण में साहित्य की भूमिका प्रस्तावना : साहित्य मानव समाज का एक महत्वपूर्ण अंग है। यह समाज के विभिन्न पहलुओं को प्रतिबिंबित करता है और समाज के नवनिर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। साहित्य न केवल मनुष्य के विचारों, भावनाओं, और अनुभवों का संग्रह है, बल्कि यह समाज के सुधार और विकास…

    Read More समाज के नवनिर्माण में साहित्य की भूमिकाContinue

  • प्यार चाहिए | Kavita Pyar Chahiye
    कविताएँ

    प्यार चाहिए | Kavita Pyar Chahiye

    ByAdmin July 16, 2024

    प्यार चाहिए ( Pyar Chahiye ) प्यार को प्यार से देखो तो प्यार बढ़ता है। दिल को दिल से मिलाओं तो दिल पिघलता है। है बहुत से लोग यहां जिनको प्यार मिलता नही। तो क्या उनका जीवन बिन प्यार के नीरस है।। जो प्यार मोहब्बत को यारों सिर्फ खेल समझते है। वो हसीन सपनों से…

    Read More प्यार चाहिए | Kavita Pyar ChahiyeContinue

  • जब से तेरी पायल छनक गयी
    कविताएँ

    पैरों की पायल | Kavita Pairon ki Payal

    ByAdmin July 16, 2024July 16, 2024

    पैरों की पायल ( Pairon ki Payal ) तेरे पैरों की पायल मुझे, दिन रात सताती है ! घुँघरू की लगा ठुमका, फिर मुझे बुलाती है !! सुनने पर बढ़ती बेचैनी, बिन सुने चैन नहीं आती ! प्रतिपल बढ़ती बेचैनी, चैन नहीं दे पाती !! रातों की निंद मेरी, लेकर उड़ जाती है ! चाहत…

    Read More पैरों की पायल | Kavita Pairon ki PayalContinue

  • मौन अभिव्यक्ति | Kavita Maun Abhivyakti
    कविताएँ

    मौन अभिव्यक्ति | Kavita Maun Abhivyakti

    ByAdmin July 16, 2024

    मौन अभिव्यक्ति ( Maun Abhivyakti ) जब सूर्य क्षितिज के नीचे होता है, और– आकाश में जब चमक होती है, उस शांति को सँजोये हुए, ये छायाएँ चाँदनी की कोमल, चमक में मिल जाती है, वही भावनाओं की एक ध्वनि, उड़ान भरती है, तब— मैं रात में अपने दिल की, फुसफुसाहट सुनती हूँ। मेरे अन्तःकरण…

    Read More मौन अभिव्यक्ति | Kavita Maun AbhivyaktiContinue

  • मै राही संघर्ष का | Mai Rahi Sangharsh ka
    कविताएँ

    मै राही संघर्ष का | Mai Rahi Sangharsh ka

    ByAdmin July 16, 2024

    मै राही संघर्ष का ( Mai Rahi Sangharsh ka ) मै राही संघर्ष का, नित पथ में बढ़ता जाता हूं। हर आंधी तूफानों से, फौलादी सा टकराता हूं। मैं राही संघर्ष का तीर सहे तलवार सहे, शब्दों के हर तीखे वार सहे। हौसलों से दुश्चक्र मिटाए, जिंदा तन मन प्राण रहे। जोश जज्बा हृदय में…

    Read More मै राही संघर्ष का | Mai Rahi Sangharsh kaContinue

  • स्नेह सुधा बरसाने वाली
    कविताएँ

    स्नेह सुधा बरसाने वाली

    ByAdmin July 15, 2024July 15, 2024

    स्नेह सुधा बरसाने वाली मन मन्दिर अपना है खाली, दिल का सिंहासन भी खाली। तरुणी कहां छुपी जा बैठी स्नेह सुधा बरसाने वाली।। मन को तुम भरमाने वाली, दिल को तुम तरसाने वाली। तरुणी कहां छुपी जा बैठी, स्नेह सुधा बरसाने वाली।। चंचल चितवन से तुम अपने, अनुपम नाच नचाने वाली। तरुणी कहां छुपी जा…

    Read More स्नेह सुधा बरसाने वालीContinue

Page navigation

Previous PagePrevious 1 … 176 177 178 179 180 … 832 Next PageNext
  • Home
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • About Us
  • Contact us
  • Sitemap
Facebook X Instagram YouTube TikTok

© 2026 TheSahitya - द साहित्य

  • English
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
Search