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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • विश्व तंबाकू निषेध दिवस
    कविताएँ

    विश्व तंबाकू निषेध दिवस

    ByAdmin May 31, 2024May 31, 2024

    विश्व तंबाकू निषेध दिवस   बस एक कदम, खुशियों की ओर तंबाकू सर्वदा हानिकारक, तन मन धन हीनार्थ बिंदु । विचलित दशा दिशाएं, दूरी यथार्थ आनंद सिंधु । क्रोध वैमनस्य घृणा संग, हर पल नैराश्यता सराबोर । बस एक कदम, खुशियों की ओर ।। तंबाकू मिश्रित विविध पदार्थ, सर्वत्र सहज सुगम उपलब्ध । आरंभ शौक…

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  • Sabke Ram
    कविताएँ

    हे आर्य पुत्र | Kavita He Arya Putra

    ByAdmin May 31, 2024May 31, 2024

    हे आर्य पुत्र ( He Arya Putra ) हे आर्य पुत्र, तूफानों में दीप जला दर्श पथ कंटक बाधा , किंचित नहीं घबराना । थोड़ा चिंतन मनन कर, मूल कारण पत्ता लगाना । फिर लगा दुगुनी ताकत, दिखा मनुज जलजला । हे आर्य पुत्र, तूफानों में दीप जला ।। बुलंद हौसलों संग होती, हर मंजिल…

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  • Shree Ram ki Vanshavali
    कविताएँ

    घर में राम पधारे | Kavita Ghar me Ram Padhare

    ByAdmin May 31, 2024May 31, 2024

    घर में राम पधारे पावन दिवस जनवरी बाईस घर में राम पधारे ! विजई हुआ ये सत्य सनातन धन-धन भाग्य हमारे !! बंदी बना दिया पटना में अवध में गोली चलवाई ! धिक्कार तुम्हें छद्मवेशियों क्या लाज तुम्भें ना आई !! लाल हुआ सरयू का पानी माँ का कोख उजाड़ दिया ! मानवता हो गई…

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  • भीषण गर्मी
    छंद

    भीषण गर्मी | रोला छन्द

    ByAdmin May 31, 2024

    भीषण गर्मी कहती है सरकार , आज है भीषण गर्मी । पर भाषण में आज , नही है कोई नर्मी ।। हो विद्यालय बंद , हुए हैं बच्चे मूर्छित । खबर यही हो फ्रंट , सभी के मन हो हर्षित ।। हम भी हैं इंसान , करें हम सब मजदूरी । लू की लगे लपेट…

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  • पर्यावरण संरक्षण | विश्व पर्यावरण दिवस विशेष
    कविताएँ

    पर्यावरण संरक्षण | विश्व पर्यावरण दिवस विशेष

    ByAdmin May 31, 2024

    पर्यावरण संरक्षण पर्यावरण संरक्षण,आज जरूरी प्रकृति,पर्यावरण सखा हमारी, छेड़-छाड़ लाएगा, विभीषिका, कोरोना काल है दृष्टांत,भयंकर।।। वन,जंगल,वृक्ष,बगीचा,हितैषी, फल-फूल,इंधन,डालपात,ऋषि संजीवनी बुटी,औषधी, भंडार, पर्यावरण से मिले,सुकून,उपहार।।। पीपल,बरगद,तुलसी,मूल्यवान, जरा,आधि,व्याधि,निजात धन वातावरण रहे ठंडा,उर्जावान, पथिक को मिले हवा,छाया,रमण।। वृक्ष सहायक लाने मानसून,राम कटाई से जलसंकट का ख़तरा, जन-जीवन के आगे चुनौती, व्यष्टि नहीं समष्टि से,निदान।।। शहरीकरण से इजाफ़ा,उद्योग, प्रदूषण बढ़ता,सांस…

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  • अरुणोदय काल | Kavita Arunoday Kaal
    कविताएँ

    अरुणोदय काल | Kavita Arunoday Kaal

    ByAdmin May 31, 2024

    अरुणोदय काल ( Arunoday Kaal )   निगल रहा सूरज अंधियारी, अहा भोर कितनी प्यारी, उभरा सूर्य अक्स सरोवर, छिटक गईं किरणें पानी पर, अरुणोदय का काल सुहाए, निखरी छटा प्रकृति की भाए, खुली ऑख अंगड़ाई संग, शुरू हुई जीवन की जंग, भानू महायोग है लाया, किरणों ने सब रोग भगाया, नित प्रभात की किरणें…

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  • जिक्र होता रहा सियासत का
    ग़ज़ल

    जिक्र होता रहा सियासत का

    ByAdmin May 31, 2024

    जिक्र होता रहा सियासत का   जिक्र होता रहा सियासत का औ दिखावा किया हिफ़ाजत का दिल मे पाले रहे सदा नफरत और बहाना किया सदाकत का जुल्म पर जुल्म की बरसात हुई ढोंग चलता रहा सलामत का पास तो बैठे थे वो पहलू में जज्बा पाले हुए अदावत का मेरे ही संग उनकी साँसे…

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  • शुभम मैमोरियल साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था
    साहित्यिक गतिविधि

    शुभम मैमोरियल साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह हुआ सफल

    ByAdmin May 31, 2024

    शुभम मैमोरियल साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था की अध्यक्षा सत्यवती सिंह सत्या ने मासिक कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन ख़ुश लोक सभागार में शायर विनय साग़र जायसवाल की अध्यक्षता में आयोजित किया । मुख्यातिथि रहे रणधीर प्रसाद गौड़ धीर संचालन मनोज दीक्षित टिंकू ने किया। मां शारदे की वंदना संस्था अध्यक्ष सत्यवती सिंह सत्या…

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  • Indian
    कविताएँ

    लोकतंत्र | Kavita Loktantra

    ByAdmin May 30, 2024May 30, 2024

    लोकतंत्र ( Loktantra )   हम घुट घुट कर जियें मरें, क्या यही हमारा लोकतंत्र है! बहती जहां सियासी गंगा, चेहरा जिसका राजतंत्र है!! जनसेवा का भाव लिये जो, चरते हैं मानवता को ! लगा मुखौटा राष्ट्रप्रेम का, दिखलाते दानवता को !! सुविधा शुल्क के चक्कर में, दिख रहा चतुर्दिक लूटतंत्र है! हम घुट घुट…

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  • तेरे साथ ये लम्हे | Tere Sath ye Lamhe
    कविताएँ

    तेरे साथ ये लम्हे | Tere Sath ye Lamhe

    ByAdmin May 30, 2024

    तेरे साथ ये लम्हे ( Tere Sath ye Lamhe )   बुझते को ज्योति हो जैसे, भूखे को रोटी हो जैसे, तेरे साथ ये लम्हे ऐसे, सीप मे मोती हो जैसे, श्री हरि की पौड़ी जैसे, राधा कृष्ण की जोड़ी जैसे, इन लम्हों मे मै हो जाऊॅ चंदा की चकोरी जैसे, मिसरी की मीठी डलियों…

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