जमाना आजकल | Jamana Aaj Kal
जमाना आजकल ( Jamana Aaj Kal ) जमाना आजकल बदल रहा है, जो कल था,वह आज नहीं रहा है हो रहा है, नित नया प्रयास हर रोज बंध जाती है, जीने की आस l कैसा बीत रहा है आज कल की खबर नहीं क्या होगा कल आज जी को मस्ती भरे नगमे गा लो…
जमाना आजकल ( Jamana Aaj Kal ) जमाना आजकल बदल रहा है, जो कल था,वह आज नहीं रहा है हो रहा है, नित नया प्रयास हर रोज बंध जाती है, जीने की आस l कैसा बीत रहा है आज कल की खबर नहीं क्या होगा कल आज जी को मस्ती भरे नगमे गा लो…
अधूरी चाहत, अमर प्रेम तेरे लिए दिल हमारा,कल की तरह ही धड़कता है।साँसें सँवरकर, रुक-रुक कर,तेरी ही बातों पर मरता है। रूप तेरा चाँद-सा,चाहत में हर पल निखरता है।पतझड़, बसंत, बहार-सा,गुलशन में याद तिरी महकता है। धूप में तन्हा, उदास,जल-जलकर मन रह जाता है।तू बदल जा, जा बेख़ौफ़,लेकिन दिल तुझ पर तरसता है। यह दिल…
गंगा की पावन धरती ( Ganga ki Pawan Dharti ) गंगा की पावन धरती को , हम-सब स्वर्ग बनाएंगे! भ्रष्टाचार मिटाकर जगसे , रामराज्य अब लाएंगे !! दीन-दुखी ना कोई होगा, स्वस्थ सुखी होंगे प्यारे ! दैहिक दैविक संतापों से , बच जाएंगे हम सारे !! देखेगी दुनियाँ सारी जब , परचम अपना फहराएंगे…
लोग ( Log ) टेढ़ा मेढ़ा कटाक्ष, लिखा फिर भी, समझें लोग, सीधा सीधा मर्म, लिखा ही लिखा, जरा न समझें लोग। वक्तव्यों मे अपने, सुलझे सुलझे, रहते लोग, मगर हकीकत मे, उलझे उलझे, रहते लोग, खातिरदारी खूब कराते, मेहमानी के, शौकीन लोग, खातिरदारी जरा न करते, मेजबानी से, डरते लोग, अपना समझें और…
रुड़की-विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ के उपकुलपति श्रीगोपाल नारसन ने भारतीय ब्रह्मसभा रुड़की के अध्यक्ष अरविंद भारद्वाज के सहयोग से ब्रह्माकुमारीज मिडियविंग के चेयरपर्सन राज्ययोगी बीके करुणाभाई को उनके अहिन्दी भाषी क्षेत्र से होने के बावजूद हिंदी के प्रति आध्यात्मिक एवं रूहानी करने पर उन्हें वैश्विक सकारात्मक पत्रकारिता प्रेरक व्यक्तित्व सम्मान से विभूषित किया गया है। उन्हें…
इस दिल पर पहरा है एक रंग एक रूप का इस दिल पर पहरा है उसी दिल का दिया हुआ यह उदासी सा चेहरा है पढ़ना दिल से इस कविता को दिखेगा उसकी दिल पर डेरा है उसने मानी की नहीं मानी मुझे हम सफर पता नहीं लेकिन मैंने माना कि वह सिर्फ मेरा है…
अर्थ जगत ( Arth Jagat ) अर्थ जगत अनुपमा, प्रेरणा पुंज मारवाड़ी समाज ************ उद्गम राजस्थानी मरुथल धरा, न्यून वृष्टि संसाधन विहीन । तज मातृभूमि आजीविका ध्येय अंतर्मन श्रम निष्ठ भाव कुलीन । प्रायः राष्ट्र हर क्षेत्र श्री गमन , लघु आरंभ बुलंद आर्थिक आवाज । अर्थ जगत अनुपमा, प्रेरणा पुंज मारवाड़ी समाज ।।…
फूल तितली सनम हुए बे-रंग क़ाफ़िया – ए स्वर की बंदिश रदीफ़ – बे-रंग वज़्न – 2122 1212 22 फूल तितली सनम हुए बे-रंग इंद्रधनुषी छटा दिखे बे-रंग तेरी खुशबू जो ज़िंदगी से गई रात-दिन मेरे हो गए बे-रंग ये मुहब्बत सज़ा बनी है आज दौर-ए-हिज़्राँ लगे मुझे बे-रंग याद जब तेरी आती है मुझको…
एक अस्पताल में नर्स और डाक्टर की कहा सुनी चल रही थी – नर्स ने बड़े गुस्से से मेज पर फाइल पटक कर कहा- आप भी सफेद कोट पहनते हो मैं भी सफेद कोट पहनती हूँ, जितना काम आप कर लेते हो उससे कहीं ज्यादा काम मैं भी कर लेती हूँ- पता नहीं आप लोग…
मर जायेगा ( Mar Jayega ) तू जो छोड़ेगा तो बेमौत ही मर जायेगा शाख से टूट के पत्ता ये किधर जायेगा। उसके वादे का क्या है वो तो करेगा लेकिन ऐन वो वक्त पे वादे से मुकर जायेगा। इन दिनों ही है खुली उसकी हकीक़त मुझ पे लग रहा अब वो मेरे दिल…