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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Sita Maiya
    विवेचना

    सीता मैया | Sita Maiya

    ByAdmin May 24, 2024

    जानकी देवी कई वर्षों बाद बिहार के छोटे से कस्बा नुमा गांव लोदमा में अपनी छोटी बहन रूपाली के यहां कल रात्रि में आई और आज सवेरे सवेरे प्रातः बेला छोटी बहन के मकान के सामने खाली जमीन पर लगी हुई सब्ज़ियों कुछ गोभी कुछ मूली के पौधे कुछ धनिया पत्ती कुछ टमाटर कुछ बैगन…

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  • Buddha
    कविताएँ

    बुद्ध हो गयें । Buddh ho Gaye

    ByAdmin May 24, 2024

    बुद्ध हो गयें ( Buddh ho Gaye ) तन से मन से वचन से कर्म से मर्म से धर्म से जो शुद्ध हो गयें बुद्ध हो गयें। नरेन्द्र सोनकर ‘कुमार सोनकरन’ नरैना,रोकड़ी,खाईं,खाईं यमुनापार,करछना, प्रयागराज ( उत्तर प्रदेश ) यह भी पढ़ें :- माँ पर नरेन्द्र सोनकर की ४ कविताएँ

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  • मुझको पसंद करते हैं लाखों हजार लोग
    ग़ज़ल

    मुझको पसंद करते हैं लाखों हजार लोग

    ByAdmin May 24, 2024May 24, 2024

    मुझको पसंद करते हैं लाखों हजार लोग   मुझको पसंद करते हैं लाखों हजार लोग । अब वाह-वाह करके लुटाते हैं प्यार लोग ।। सुनकर ग़ज़ल पसंद उसे कर रहे सभी । मेरी नई ग़ज़ल का करें इंतजार लोग ।। कुछ ख़ास लोग याद रखेंगे मुझे सदा । गिनती में कम-से-कम वो रहेंगे हजार लोग…

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  • Ghazal Nigahen Mila Kar
    ग़ज़ल

    निगाहें मिलाकर | Ghazal Nigahen Mila Kar

    ByAdmin May 24, 2024

    निगाहें मिलाकर ( Nigahen Mila Kar )   देखों ना सनम तुम यूँ नज़रे घुमाकर करों ना सितम यूँ निगाहें मिलाकर ! करोगी कत्ल तुम कई आशिको का, ये जलवें हसीं यार उनको दिखाकर ! घटाओं सी जुल्फ़े बनाती है कैदी, करोगी हमें क्या कैदी तुम बनाकर ! ज़रा सा ये दिल है इसे बख़्श…

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  • भड़ास
    व्यंग्य

    भड़ास | व्यंग्य रचना

    ByAdmin May 24, 2024May 24, 2024

    भड़ास ( Bhadaas ) कंगाल देश को, खंगाल रहा हूं! माल और मलाई, खा गए मुर्गे! हाथ मेरे, कुछ न आया,, तो क्या करूं? खोटा सिक्का, उछाल रहा हूं! कंगाल देश को, खंगाल रहा हूं! लूटकर भरी तिजोरी, छोड़कर सदन और कुर्सी! सियासत के मोहरे, दफा हो गये! मैं अकेला ही सबकुछ, संभाल रहा हूं!…

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  • महेन्द्र सिंह प्रखर की ग़ज़लें
    दोहे

    महेन्द्र सिंह प्रखर के दोहे | Mahendra Singh Prakhar ke Dohe

    ByAdmin May 24, 2024June 21, 2025

    महेन्द्र सिंह प्रखर के दोहे ( 39 ) पीर छुपाकर जो हँसें , दें जीवन को दान । औरत ही क्यूँ मान तू , आदि शक्ति भी जान ।। प्रीत जताती हूँ सखी , करती हूँ मनुहार । गात सजानें को नहीं , करती हूँ शृंगार ।। आँसू ही हथियार है , कहते क्यों हो…

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  • बचा रहे गणतंत्र | Kavita Bacha Rahe Gantantra
    कविताएँ

    बचा रहे गणतंत्र | Kavita Bacha Rahe Gantantra

    ByAdmin May 24, 2024

    बचा रहे गणतंत्र ( Bacha rahe gantantra )   अंतिम चरण बचा है अब तो, अपना मत दे डारो ! बिगड़ न जाए बात कहीं अब, अपनी भूल सुधारो !! रहे सुरक्षित गणतंत्र हमारा , लोभी नेताओं से ! देश बचाना है हम सबको , सेक्युलर मक्कारों से !! चूक गए तो, जिज्ञासु ‘जन’ ,…

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  • जनता की जागरूकता आई काम
    कविताएँ

    तभी बचेगा लोकतंत्र

    ByAdmin May 24, 2024May 24, 2024

    तभी बचेगा लोकतंत्र   आओ हम संकल्प सभी लें , जन गण मन को जगानेका ! भारत मांता की गरिमा संग , लोकतंत्र बचाने का !! रावण ने की थी जो गल्ती , उसका क्या परिणाम हुआ ! धृतराष्ट्र में मोह के कारण , उसके कुल का नाश हुआ !! जयचंद की ईर्ष्या द्वेष के…

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  • Kavita Nahi Ghabrana Hain
    कविताएँ

    नहीं घबराना है | Kavita Nahi Ghabrana Hai

    ByAdmin May 24, 2024May 24, 2024

    नहीं घबराना है ( Nahi Ghabrana Hain )   समय कि दिशा व दशा को देख नहीं घबराना है हर स्थिति से लड़ते आगे बढ़ते जाना है नहीं रखना मन में किना स्वच्छ सुंदर भाव जगाना है निश्छल तन, मन से राह पर बढ़ते जाना है आज कठिन है तो कल सुलभ होगा यही सोच…

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  • Kavita Buddha Purnima
    कविताएँ

    बुद्ध पूर्णिमा | Kavita Buddha Purnima

    ByAdmin May 24, 2024May 24, 2024

    बुद्ध पूर्णिमा ( Buddha Purnima )   समरसता श्री वंदन, गौतम बुद्ध उपदेशों में धर्म कर्म आध्यात्मिक क्षेत्र, नर नारी महत्ता सम । जाति विभेद उन्मूल सोच, मानव सेवा परम धम्म । क्रोध घृणा द्वेष अनुचित, नेह समाधान उग्र आवेशों में। समरसता श्री वंदन,गौतम बुद्ध उपदेशों में ।। सम्यक दृष्टि संकल्प वचन, कर्म आजीविका परम…

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