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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • विपदाओं के चक्रव्यूह
    कविताएँ

    विपदाओं के चक्रव्यूह

    ByAdmin April 30, 2024

    विपदाओं के चक्रव्यूह   बाधाएं तो आतीं हैं, औ आगे भी आएंगी ! अविचल बढ़ो मार्ग पर अपने खुद ही मिट जाएंगी !! विकट समस्याओं के सम्मुख तुम तनिक नहीं घबराना ! बुद्धि,विवेक,धैर्य, कौशल से तुमको निजात है पाना !! विपदाओं के चक्रव्यूह से निकलोगे तुम कैसे ! आओ बतलाता हूं तुमको व्यूह रचो कुछ…

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  • आपन तेज सम्हारो आपै
    विवेचना

    आपन तेज सम्हारो आपै

    ByAdmin April 30, 2024

    आपन तेज सम्हारो आपै, तीनों लोक हांक ते कापै अर्थात जो अपनी शक्ति को संभाल लेता है उसकी शक्ति के प्रताप से तीनों लोकों में लोग कांपने लगते हैं। वर्तमान समय में बढ़ते वैचारिक प्रदूषण के कारण छोटे-छोटे बच्चों में भी बुढ़ापे के लक्षण दिखने लगे हैं। आंखें धंसी हुई, चेहरों में झुर्रियां ,बालों में…

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  • Kavita Man to Man Hai
    कविताएँ

    मन तो मन है | Kavita Man to Man Hai

    ByAdmin April 30, 2024

    मन तो मन है ( Man to Man Hai ) मन तो मन है, पर मेरे मन! मान, न कर नादानी। वल्गाहीन तुरंग सदृश तू, चले राह मनमानी। रे मन! मान, न कर नादानी। सुख सपनों की मृग मरीचिका, का है यह जग पानी। प्रतिक्षण जीवन घटता जाये, मोह त्याग अभिमानी। रे मन! मान, न…

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  • Om Prakash lovevanshi
    कविताएँ

    ओम प्रकाश लववंशी की कविताएं | Om Prakash Lovevanshi Hindi Poetry

    ByAdmin April 29, 2024May 1, 2024

    तू चल तू अनजान भले हो पर तू चल चाहे राह तेरी टेढ़ी हो या सरल पर तू चल, चलेगा तो होगा सफल बैठकर यूं ही क्या निकलेगा हल, जिंदगी में उलझने तो आना ही है, आज नहीं तो कल मंजिल पाना ही है। और तूने खुली आँखों में सपने बुने हैं, ख्वाबों वाले सपने…

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  • पतझड़
    कविताएँ

    पतझड़ में होती, रिश्तों की परख

    ByAdmin April 29, 2024

    पतझड़ में होती, रिश्तों की परख मनुज जीवन अद्भुत प्रेहलिका, धूप छांव सदा परिवर्तन बिंदु । दुःख कष्ट सुख वैभव क्षणिक , आशा निराशा शाश्वत सिंधु । परिवार समाज परस्पर संबंध, स्वार्थ सीमांत निर्वहन चरख । पतझड़ में होती, रिश्तों की परख ।। आर्थिक सामाजिक अन्य समस्या, प्रायः संघर्षरत मनुज अकेला । घनिष्ठता त्वरित विलोपन,…

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  • Kavita Arunoday
    कविताएँ

    अरुणोदय | Kavita Arunoday

    ByAdmin April 29, 2024

    अरुणोदय ( Arunoday )   सूरज ने अरूणिम किरणों से वातायन रंग डाला ! लगे चहकने पंछी नभ में अनुपम दृश्य निराला !! ताल तलैया नदी सरोवर मिल स्वर्णिम रस घोले! लगे चमकने खेत बाग वन पुरवाई है डोले !! देख विहंगम दृश्य प्रकृतिका खिलने लगी हैं कलियां ! तरूके शिर्ष पर चान नाच कर…

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  • खुश लोक सभागार में गूंजे शब्दों की तालियां, शायर विनय सागर जायसवाल की अध्यक्षता में हुआ भव्य आयोजन
    साहित्यिक गतिविधि

    खुश लोक सभागार में गूंजे शब्दों की तालियां, शायर विनय सागर जायसवाल की अध्यक्षता में हुआ भव्य आयोजन

    ByAdmin April 29, 2024

    शुभम मैमोरियल साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था ने कविसम्मेलन व सम्मान समारोह का आयोजन शायर विनय साग़र जायसवाल (मेरी ) अध्यक्षता में ख़ुश लोक सभागार में आयोजित किया। मुख्यातिथि रहे डाक्टर विनोद पागरानी जी, विशिष्ट अतिथि के रूप में हिमांशु श्रोतिय निष्पक्ष जी तथा गजेंद्र पाल सिंह जी । संचालन किया हास्य कवि मनोज दीक्षित टिंकू…

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  • क्यो अख़बार हुए सफल
    विवेचना

    क्यो अख़बार हुए सफल? जबकि ढेर लगी हैं चैनलों की

    ByAdmin April 29, 2024April 30, 2024

    आज बेटे का जन्मदिन हैं। सुबह-सुबह उसे अख़बार पढ़ते देख, याद आया की आज तो 3 मई हैं! यानी विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस, उसके हाथो में अखबार देख मन ही मन में सोचने लगी- “हम 21वी शताब्दी में जी रहे हैं, हमारे पास मोबाइल, टीवी जैसे कई आधुनिक यंत्र हैं। पर फिर आज के आधुनिक…

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  • Kavita Maa ki Yaadein
    कहानियां

    क्योंकि वो मां थी | Kahani Kyonki wo Maa Thi

    ByAdmin April 29, 2024

    घर में सन्नाटा छाया हुआ था। सभी एक दूसरे का मुंह देख रहे थे। कोई किसी से कुछ बोल नहीं रहा था । अब क्या होगा? ऐसा क्यों किया ? जैसे विचार सबके मन में आ जा रहे थे। बात दरअसल यह थी कि मनीष ने कर्ज ले लिया था । कर्ज लेते समय घर…

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  • Kavita Purn Viram
    कविताएँ

    पूर्ण विराम अंत नहीं | Kavita Purn Viram

    ByAdmin April 29, 2024April 29, 2024

    पूर्ण विराम अंत नहीं ( Purn Viram Ant Nahi )   पूर्ण विराम अंत नहीं, नए वाक्य की शुरुआत है सकारात्मक सोच प्रशस्त, नवल धवल अनुपम पथ । असफलता अधिगम बिंदु, आरूढ़ उत्साह उमंग रथ । आलोचनाएं नित प्रेरणास्पद, श्रम साधना उत्तर धात है । पूर्ण विराम अंत नहीं, नए वाक्य की शुरुआत है ।।…

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