Kavita Man to Man Hai

मन तो मन है | Kavita Man to Man Hai

मन तो मन है

( Man to Man Hai )

मन तो मन है, पर मेरे मन!
मान, न कर नादानी।
वल्गाहीन तुरंग सदृश तू,
चले राह मनमानी।
रे मन!
मान, न कर नादानी।

सुख सपनों की मृग मरीचिका,
का है यह जग पानी।
प्रतिक्षण जीवन घटता जाये,
मोह त्याग अभिमानी।
रे मन!
मान, न कर नादानी।

अवसर बीते पछितायेगा,
होगी शेष कहानी।
सब सम्बन्ध स्वार्थ के जग में,
तज दे आश बिरानी।
रे मन!
मान, न कर मनमानी।

अब भी भज ले राम नाम को,
वही है सब सुख खानी।
रे मन!
मान, न कर मनमानी।

sushil bajpai

सुशील चन्द्र बाजपेयी

लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

यह भी पढ़ें :-

हे प्रभु राम | Kavita Hey Prabhu Ram

 

Similar Posts

  • मित्र दिवस | Kavita Mitra Divas

    मित्र दिवस ( Mitra Divas ) चेहरा भूल जाओगे तो, शिकायत नहीं करेंगे। नाम भूल जाओगे तो, गिला नहीं करेंगे। और मेरे दोस्त, दोस्ती कि कसम है तुझे। जो दोस्ती भूल जाओगे, तो कभी माफ नहीं करेंगे। खुशी से दिल, आबाद करना मेरे दोस्त। और गम को दिल से आज़ाद करना। हमारी बस इतनी, गुजारिश…

  • यादें | Kavita

    यादें ( Yaaden )   बड़ी सुहानी लगती यादें, प्रेम भरी मनभावन सी। उर उमंग हिलोरे लेती, झड़ी बरसते सावन सी।   सुख-दुख के मेंघ मंडराये, यादें बस रह जाती है। घड़ी घड़ी पल पल रहकर, यादें पुरानी आती है।   हंसी खुशी के सुंदर पल, रह रहकर याद आते हैं। जैसे बहती सरिता धारा,…

  • हिन्दी | Poem on Hindi

    हिन्दी ( Hindi )   हिन्दी के सम्मान मे मित्रो ,लिख लो कह लो आज । एक वर्ष के बाद पुनः फिर, होगी इस पर बात ॥ ** बडे`बडे सम्मेलन होगे, ढोल मंझीरे साथ । बडे-बडे बैनर पर होगा,हिन्दी दिवस है आज॥ ** बोली जाती बहुत ही बोली,भारत के सम्मान मे । पर हिन्दी को…

  • दिल से आगाज़ | Poem on valentines day in Hindi

    दिल से आगाज़ ( Dil se aagaaz ) दिल से आगाज़ , रूह पर अंजाम हो ऐसा ‘फसाना लिख जाता है यह…. इश्क खुद ना मुक्कम्मल रहकर भी मुक्कम्मल कर जाता है यह….इश्क कभी दीदार-ए-चांद,कभी इक ‘ बूंद ‘की खातिर चकोर सा कभी, तो किसी को पपीहा सा तरसा जाता है यह… इश्क #HappyValentinesDay लेखिका…

  • विश्वासघात | Vishwasghaat kavita

    विश्वासघात ( Vishwasghaat )   छल कपट विश्वासघात का दुनिया में है बोलबाला हंसों का दाना काग चुग रहे छीने मुंह का निवाला   स्वार्थ सिद्ध करने वाले बोल मधुर से बोल रहे अपनापन अनमोल जता जहर हवा में घोल रहे   दगाबाजी धोखाधड़ी वंचना देशद्रोह और गद्दारी विश्वासघात के रूप कई अपघात और भ्रष्टाचारी…

  • आँसू | Aansoo

    आँसू ह्रदय के हरेक भाव का द्रव भी,बह कर बन जाता है आँसू ।प्यार घृणा करुणा के विरोध का,द्रवित रूप होता है आँसू ।। सभी भावों की अभिव्यक्तियों पर,टपक आँख से जाता आँसू ।मन हँसता तो हँसे है वक्त भी,गिर जाता है आँख से आँसू ।। उसका स्थान नियत है कर डाला,मनुज आँख में बसता…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *