Kavita Arunoday

अरुणोदय | Kavita Arunoday

अरुणोदय

( Arunoday )

 

सूरज ने अरूणिम किरणों से
वातायन रंग डाला !
लगे चहकने पंछी नभ में
अनुपम दृश्य निराला !!

ताल तलैया नदी सरोवर
मिल स्वर्णिम रस घोले!
लगे चमकने खेत बाग वन
पुरवाई है डोले !!

देख विहंगम दृश्य प्रकृतिका
खिलने लगी हैं कलियां !
तरूके शिर्ष पर चान नाच कर
मनारहीं रगं रलियां!!

बालक बूढ़े जीव जंतु सब
आह्लादित हो जाते !
वसुधाचंल में ‘जिज्ञासु’जन
हैं सारे सुख पाते !!

Kamlesh  Vishnu

कमलेश विष्णु सिंह “जिज्ञासु”

यह भी पढ़ें :-

https://thesahitya.com/kavita-sneh-ka-sanchar/

Similar Posts

  • फिर लौट कर नहीं आते | Patriotic poem in Hindi

    फिर लौट कर नहीं आते ( Phir laut kar nahin aate )   मर मिटते वो सरजमीं पर समर में शौर्य दिखलाते बलिदानी पथ जाने वाले फिर लौटकर नहीं आते   शौर्य पताका जिनके दम से व्योम तलक लहराती महावीर जब रण में उतरे बैरी दल सेनायें थर्राती   गोला बारूद खेल खेलकर पराक्रमी रण…

  • रद्दी | Raddi

    रद्दी ( Raddi )   माना की जरूरत नहीं किसी की आपको समर्थ है स्वयं में ही खुद के प्रति तब भी आप पूर्णता में ईश्वर तो नहीं है किसी से हाथ मिलाकर के तो देखिए साथ से चलकर तो देखिए किसी के होकर तो देखिए हो जाएगा आभास आपको भी अपनी पूर्णता का सहयोग…

  • आहिस्ता आहिस्ता | Aahista Aahista

    आहिस्ता आहिस्ता ( Aahista aahista )   आहिस्ता आहिस्ता बदली जीवन की तस्वीर। छोड़ धरा को चले गए बलवीर और महावीर। शनै शनै सब बदल रहे कुदरत के हर रंग। मानव की फितरत बदली रहन सहन के ढंग। धीरे-धीरे बदल गई हम सबकी जीवनधारा। कहां कुटुंब परिवार रहा वो अपनापन प्यारा। बदल दिए हालात ने…

  • उपकार

    उपकार   भारत में हमें जन्म दिया , सबसे बङा तेरा उपकार। इसी पुण्य -भूमि पर , सदा लिया तुमने अवतार।।   सब जीवों में श्रेष्ठ बनाया, दिया सबकी रक्षा का भार। चौरासी का जो बंधन काटे , भव से तरने की पतवार।।   सूरज-चंदा दोनों मिलकर, स्वस्थ रखते ये संसार। समीर-भूमि इन दोनों पर,…

  • चल अब घर चल | Children’s Hindi Literature

    चल अब घर चल ( Chal ab ghar chal )    चल चल अब घर चल सरपट सरपट घर चल, मत बन नटखट चल झटपट झटपट घर चल। उछल उछल कर न चल अब नटखट मत बन, मत कर चक चक मत कर पक पक घर चल।। समय समय पर पढ एवम नए नए जतन…

  • मशाल | Mashaal

    मशाल ( Mashaal )   बढ़ रह सैलाब इधर तुम्हे अभी रहनुमा चाहिए उठा लो खड़ा हाथों मे तुम अब हमे निजी सुरक्षा चाहिए.. लगी आग जिन घरों मे देखो भीतर से खिंचती बेटियां देखो देखो न अब केवल रोटियां तुम गर्त मे गिरती पीढियां देखो… रसूख, न दौलत , न जात देखो हो रहे…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *