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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Geet Patjhad
    गीत

    पतझड़ सावन बन जाता है | Geet Patjhad

    ByAdmin April 28, 2024

    पतझड़ सावन बन जाता है दुआओं से झोली भरकर जब जीवन मुस्कुराता है। सारी बलाएं टल जाती पतझड़ सावन बन जाता है। पतझड़ सावन बन जाता है रोज शिवालय शिव की पूजा गंगाजल जो पाता है। हर हर महादेव कंठो से सुबह शाम जो भी गाता है। बिगड़े सारे काम बनते वो कीर्ति पताका लहराता…

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  • प्रकृति व स्त्री विमर्श
    पुस्तक समीक्षा

    “प्रकृति व स्त्री विमर्श”: स्त्रीत्व की नई रचना, डॉक्टर सुमन धर्मवीर की कलम से

    ByAdmin April 28, 2024April 28, 2024

    डॉक्टर सुमन धर्मवीर जी की पुस्तक – “प्रकृति व स्त्री विमर्श “ पढना शुरु किया — लेखिका के लेखन मे प्राण है। नया जीवन है—- 🙏🏻🙏🏻 मन लग जाता है पढते पढते। ऐसा है जीवन्त लेखन लेखिका का— 🙏🏻🙏🏻 बहूत अच्छा लिखती हैं सामाजिक परिवेश पर। लेखिका के लेखन को हम नमन करते है। अंधकार…

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  • Ghazal Akal Nahi Hai
    ग़ज़ल

    अक्ल नहीं है | Ghazal Akal Nahi Hai

    ByAdmin April 28, 2024April 28, 2024

    अक्ल नहीं है (Akal Nahi Hai )   अक्ल नहीं है उस जाहिल में खोया दिल उसका ग़ाफ़िल में रब टाल मुसीबत सर पे है जा है मेरी तो मुश्किल में बात छुपा न सनम तू कोई बोल ज़रा जो तेरे दिल में यादों की फुवारे आती है मोज़े उठती जो साहिल में सारे आये…

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  • हसद
    शेरो-शायरी

    हसद | ईर्ष्या

    ByAdmin April 28, 2024

    हसद ( Hasad )   हज़ारों रत्न उसके तकिये के नीचे हैं, मगर मेरे इक पत्थर पर वो मरता है, उसकी इक नज़र तरसते हैं रत्न उसके, उन्हें भूलके मेरे अदना पत्थर पे निगाह रखता है, यही आज इस दुनिया का चलन हो गया, जलन/हसद से भरा सारा ज़हन हो गया, दुनिया की सारी नेमतें…

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  • Shekhar Hindi Poetry
    कविताएँ

    शेखर की कविताएं | Shekhar Hindi Poetry

    ByAdmin April 28, 2024June 11, 2025

    पृथ्वी आज रोती पृथ्वी आज रोती करती हमसे विनती मत कर मेरा दोहन मैं हूं तेरा संजीवन पेड़-पौधे हैं मेरे वास मत कर इसका उपहास हिमनद हैं मेरी संरचना कर तू इसकी  अर्चना मत कर तू अबीर लगा एक पेड़ जरूर देर सबेर,देर सबेर टेर पर टेर,टेर पर टेर धरा का मैं नीला सागर धरा…

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  • स्नेहका संचार | Kavita Sneh ka Sanchar
    कविताएँ

    स्नेहका संचार | Kavita Sneh ka Sanchar

    ByAdmin April 28, 2024

    स्नेहका संचार ( Sneh ka Sanchar )   आदमी का मानवीय व्यवहार होना चाहिए ! हर हृदय में स्नेह का संचार होना चाहिए !! खिल सके अपना चमन, यह एकता के भाव से ! हो उल्लसित सारा जहां स्नेह व सद्भाव से !! त्यागकर इंसानियत को बढ़ नहीं पाएंगे हम ! अपनेपन से ही सभी…

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  • हाय रे बेरोजगारी | Kahani Berojgari
    कहानियां

    हाय रे बेरोजगारी | Kahani Berojgari

    ByAdmin April 28, 2024April 28, 2024

    एक पुस्तक की दुकान पर बहुत से बच्चे जाब का फॉर्म देख रहे थे। उसी में एक फॉर्म डोम की भर्ती का भी निकला हुआ था। बच्चों ने सोचा यह डोम क्या होता है ? एक ने कहा-” तुम डोम नहीं जानते-समझते। अरे भाई जो मुर्दों को जलाते हैं । जिसमें हर समय मुर्दों के…

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  • Bhojpuri Kavita Hamra Aankhi me
    भोजपुरी कविता

    हमरा आँखी में लोर के जहान बाटे | Bhojpuri Kavita Hamra Aankhi me

    ByAdmin April 27, 2024

    हमरा आँखी में लोर के जहान बाटे   जेकरा बाटे खाके पी के उतान बाटे आ हमरा घर में नून ना पिसान बाटे। केहू बाकि अंगूरी से चान देखावता हमरा आँखी में लोर के जहान बाटे। बड़ी मोसकिल से गंजी किना जाला उनुका एह पीर के का अनुमान बाटे। लाद के बात त लादे में…

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  • Kavita Shaswat Prashn
    कविताएँ

    शाश्वत प्रश्न | Kavita Shaswat Prashn

    ByAdmin April 27, 2024

    शाश्वत प्रश्न ( Shaswat Prashn )   मैं कौन हूं आया कहां से हूं यहां ! यह नहीं मालूम, है पुन: जाना कहां !! किसलिए हैं आए जगमें, और फिर क्यौं जाएंगे! इस राज को इस जन्म में, क्या समझ हम पायेंगे!! कुछ दिनों की जिंदगी के बाद होगा क्या मेरा ! नजाने फिर, कहां…

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  • Geet Bhulna Acha Lagta Hai
    गीत

    भूलना अच्छा लगता है | Geet Bhulna Acha Lagta Hai

    ByAdmin April 27, 2024

    भूलना अच्छा लगता है ( Bhulna Acha Lagta Hai )   वो काली अंधियारी रातें, अपनों की तीरों सी बातें। रह रहकर दर्द दे जाए, संकट में ना साथ निभाते। भूलना अच्छा लगता है बीत गई जो दुख की घड़ियां, यादें चैन नहीं दे पाती। चिंता चिता स्वाहा करके, जिंदगी को आग लगाती। अपमान ईर्ष्या…

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