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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Kavita Ye Kaisa Ram Rajya hai
    कविताएँ

    ये कैसा रामराज्य है | Kavita Ye Kaisa Ram Rajya hai

    ByAdmin April 23, 2024

    ये कैसा रामराज्य है  ( Ye Kaisa Ram Rajya hai )   आम आदमी कंगाल हुआ है, नेता सारे मालामाल हुए हैं, किसान और मजदूर देश के, देखो कैसे बदहाल हुए हैं। न तन पर है कपड़े, न खाने को सूखीं रोटी, देश की जनता कल भी भूखी-प्यासी थी, आज भी भूखी-प्यासी है। ये कैसा…

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  • .रौद्र रस | Raudra Ras Kavita
    कविताएँ

    .रौद्र रस | Raudra Ras Kavita

    ByAdmin April 23, 2024

    .रौद्र रस  ( Raudra Ras )   मन करता है कभी, ज़ुबां के ताले अब खोल दूँ, है दुनिया कितनी मतलबी जाके उनको बोल दूँ, उतार फेंकूँ उनके चेहरे से चापलूसी के मुखौटे, सच के आईने दिखा बदसूरती के राज़ खोल दूँ, कैसी हवस है यह पैसे की जो ख़त्म नहीं होती, चाहूँ तो सच…

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  • जनता की जागरूकता आई काम
    गीत

    मतदान करने जरूर जाना | Geet Matadan Karne Jarur Jana

    ByAdmin April 22, 2024

    मतदान करने जरूर जाना ( Matadan Karne Jarur Jana )   चुनाव फिर से आ गया । अब करना न कोई बहाना चुनाव फिर से आ गया । सही व्यक्ति को पहले चुन लो । गुण सारे तुम उसके गुन लो । फिर उस पर मुहर लगाना । चुनाव फिर से आ गया । अधिकार…

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  • किस पर लिखूँ
    गीत

    कलम ही हथियार है | Geet Kalam hi Hatiyar Hai

    ByAdmin April 22, 2024

    कलम ही हथियार है ( Kalam hi Hatiyar Hai ) कल्पनाओं का सागर है, शब्दों का भंडार है। सृजन ही शक्ति हमारी, कलम ही हथियार है। कलम ही हथियार है आंधी तूफानों से टकराती, लेखनी की धार है। चेतना का दीपक जलाता, सदा कलमकार है। ओज की हुंकार भरे, बरसे प्रीत की फुहार है। गीत…

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  • भूत एक वहम | Kahani Bhoot ek Waham
    कहानियां

    भूत एक वहम | Kahani Bhoot ek Waham

    ByAdmin April 22, 2024

    वर्तमान समय में देखा जाए तो भूत प्रेत की मान्यता से लगभग सारा संसार जकड़ा हुआ है। किंतु भूत प्रेत आदि क्या है? कैसे हैं ? या नहीं हैं? इस विषय में कोई प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक तथ्य तक नहीं पहुंच पाया है। इसीलिए समाज में तरह-तरह के भूत- प्रेत के नाम पर नौटंकीया चलती रहती…

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  • Ghazal Main Khubsurat Nahi
    ग़ज़ल

    मैं खूबसूरत नहीं | Ghazal Main Khubsurat Nahi

    ByAdmin April 22, 2024

    मैं खूबसूरत नहीं  ( Main Khubsurat Nahi )   कोई मुझे पसंद करे इतना मैं खूबसूरत नहीं ! देखता यहां कोई ज़माने में भली मूरत नहीं ! गोरी घनी सूरत के सब कायल रहे होते सदा, मेरी ज़माने को यहां, कोई जरुरत ही नहीं ! होते वो किस्मत के धनी जिन्हे मिले कोई परी, कोई…

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  • Laghu Katha Dard
    कहानियां

    दर्द ढोते हैं हम | Laghu Katha Dard

    ByAdmin April 22, 2024

    घर की स्थिति ठीक नहीं थी तो रमेश का कौन नहीं मजाक उड़ाता था कि पढ़ – लिखकर आखिर क्या करेगा, वह। रमेश फिर भी उनकी बातों पर ध्यान दिए बिना आगे बढ़ने के लिए प्रयास करते रहा। ऐसे ही दिन में अपने-पराए पहचाने जाते हैं। उसकी नौकरी लगी और जब वह घर आता तो…

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  • वनिता सुरभि, पारिजात ललांत सी
    कविताएँ

    वनिता सुरभि, पारिजात ललांत सी

    ByAdmin April 22, 2024

    वनिता सुरभि,पारिजात ललांत सी   कोमल निर्मल सरस भाव, अंतर प्रवाह विमल सरिता । त्याग समर्पण प्रतिमूर्ति, अनंता अत्युत्तम कविता । सृजन उत्थान पथ पर, महिमा मंडित सुकांत सी । वनिता सुरभि, पारिजात ललांत सी ।। स्नेहगार ,दया उद्गम स्थल, अप्रतिम श्रृंगार सृष्टि का । पूजनीय कमनीय शील युत, नैतिक अवलंब दृष्टि का । उमा…

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  • Ghazal Bikhar na Jaoon
    ग़ज़ल

    बिखर न जाऊँ | Ghazal Bikhar na Jaoon

    ByAdmin April 22, 2024

    बिखर न जाऊँ ( Bikhar na Jaun )   तेरा फ़िराक़ है इक मौजे जाँसितां की तरह बिखर न जाऊँ कहीं गर्दे-कारवां की तरह न डस लें मुझको ये तारीक़ियाँ ये सन्नाटे उजाला बन के चले आओ कहकशां की तरह मेरे फ़साने में रंगीनियां ही हैं इतनी सुना रहे हैं इसे लोग दास्तां की तरह…

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  • रिवाज़
    शेरो-शायरी

    रिवाज़ | Poem Riwaz

    ByAdmin April 22, 2024

    रिवाज़ ( Riwaz ) जब चाहा अपना बना लिया, जब चाहा दामन छुड़ा लिया, रिश्तों को पामाल करने का, ये रिवाज़ किसने बना दिया, रोज़ ही निकलने लगे एहसासों के जनाजे, क़त्लगारी का, यह कैसा चलन बना दिया, किसी की ख़ुशियाँ न देखी जाती किसी से, हर कोई किसी ने दो गज़ कोना बना लिया,…

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