• दिखावा | Kavita Dikhawa

    दिखावा ( Dikhawa )   शुभचिंतक हैं कितने सारे बाहर गोरे भीतर कारे मुखरा-मुखरा बना मुखौटा मिट्ठू दिखते जो हैं सारे लेकर आड़ झाड़ को काटे नए और पैने हैं आरे तन तितली मन हुआ तैयार ऐसे लोगों के पौ बारे सब कुछ दे देते हँसकर गए हाशिये में वे प्यारे दृष्टि हो गयी इतनी…

  • इतिहास | Kavita Itihas

    इतिहास ( Itihas )   उड़ती हैं नोट की गड्डियाँ भी दरख़्त के सूखे पत्तियों की तरह होती है नुमाइश दौलत की फ़लक पे चमकते सितारों की तरह बेचकर इमां धरम अपना बन गई है सिर्फ खेल यह जिन्दगी अय्याश का भोग हि जीवन बना धरी की धरी रह गई है बंदगी शिक्षा जरिया बनी…

  • अब बेटियांँ भी कंधे देने लगी है सच मानो

    अब बेटियांँ भी कंधे देने लगी है सच मानो   अब बेटियांँ भी कंधे देने लगी है सच मानो बेटे नहीं हैं तो क्या बेटी को ही छत जानो। बदलते परिवेश में जीना कोई गुनाह नहीं बेटियांँ लहू में समाई है सुरक्षा कवच मानो। जो व्यवस्था महत्व नहीं दे बेटियों को जानों उसे व्यवस्था के…

  • अछूतो का भगवान | Kahani Achuto ka Bhagwan

    चारों तरफ मैले कुचैले कपड़े पहने बच्चे दिखाई दे रहे थे । बदबू ऐसी आ रही है कि एक-दो मिनट बैठना मुश्किल है । कैसे रहते होंगे ये लोग ? क्या लोगों की जिंदगी ऐसे भी हो सकती है ?जहां जानवर भी ना रहना चाहे वहां मनुष्य रह रहे हैं। सुरेश को आज नींद नहीं…

  • सफर का अकेलापन | Kavita Safar ka Akelapan

    सफर का अकेलापन ( Safar ka Akelapan )   भीड़ में भी अकेला हूं अकेले में भी भीड़ बहुत है इसे कहूँ बाजार, या तन्हाई या कहूँ अकेलापन! कोई पढ़ रहा है मुझे कोई लिख रहा मुझपर कोई समझ रहा है कोई लगा है परखने में अजीब सी कश्मकश है कईयों की नज़र मे रहकर…

  • निर्झर | Kavita Nirjhar

    निर्झर ( Nirjhar )   काश……..तेरी तरह ही मैं भी बन जाऊँ माँ, निर्झर की मानिंद कल-कल बहती जाऊँ माँ, तेरी ही तरह दामन में समेट लूँ ये दुनिया माँ, अपनी शीतलता से जहां नहलाती जाऊँ माँ, इतनी वसअतें खुद में मैं पैदा कर जाऊँ माँ, समन्दर से भी ज़्यादा गहरी मैं बन जाऊँ माँ,…

  • सादगी | Ghazal Saadgi

    सादगी ( Saadgi )   अब नुमाइश की हुकूमत और हारी सादगी हम को तो हर तौर ले डूबी हमारी सादगी। रंग से खुशबू धनक से फूल जुगनू चांद से दो जहां से ख़ूबसूरत है तुम्हारी सादगी। शख़्स था सादा बहुत वो क्या मगर उसको हुआ जाने उसने छोड़ दी क्यों अपनी सारी सादगी। बज़्म…

  • कसाई हाथ बछिया

    कसाई हाथ बछिया   कउने संग पगहा धरउला ये बाबूजी, कइसन हम्में दुलहा खरीदला ये बाबूजी। धन कै बड़ा लोभी बाटें हमरो ससुरवा, सासु औ ननद रोज खानी मोर करेजवा। कउने खोंतनवाँ बसउला ये बाबूजी, कइसन हम्में दुलहा खरीदला ये बाबूजी। कउने संग पगहा धरउला ये बाबूजी, कइसन हम्में दुल्हा खरीदला ये बाबूजी। माँगनै दहेज…

  • मतदान का अधिकार | Kavita Matdan ka Adhikar

    मतदान का अधिकार ( Matdan ka Adhikar )   लोकतंत्र देश हमारा। है संविधान सर्वोपरि देश का। देकर मतदान अधिकार, मान बढ़ाया जनशक्ति का।। जो बालिग हो वह, देकर अपना मत, मन पसंद नेता चुन सकता है। ऐसा गौरवपूर्ण अधिकार, मिला हमें संविधान से है।। सदुपयोग इसका करें हम। जागरूक सदा रहें हम। जन-जन अलख…

  • मत प्रणय अनंत | Kavita Mat Pranay Anant

    मत प्रणय अनंत ( Mat Pranay Anant )   मत प्रणय अनंत, ई वी एम को निहार कर लोकतंत्र नव यौवन अंगड़ाई, मतदाता उर भाव नवल । उत्सविक प्रभा परिवेश उत्संग, कामना राष्ट्र भविष्य मंगल । अंतःकरण स्वर करस्थ स्पंदन, प्रलोभ स्वार्थ विसार पर । मत प्रणय अनंत, ई वी एम को निहार कर ।।…