• बंजारा की नौ नवेली कविताएँ

    गली (एक) ————- एक जुलाहे ने बुनी थी दूसरी यह — ईट-गारे और घर-आंगन से बनी है . यह भी मैली है नुक्कड़ तक फैली है फटी है और सड़कों से कटी है . इसमें भी रंगों-से रिश्ते हैं और धागों-से अभागे लोग — जो जार जार रोते हैं ओढ़कर तार तार इसी चादर में…

  • रोशनी | Kahani Roshni

    मनुष्य को गरीबी क्या ना कराएं । रोशनी के पिता इतने गरीब थे कि दो वक्त की रोटी का जुगाड़ हो सके इसलिए उसे एवं उसकी बहन को अनाथालय छोड़ दिया। इसी बीच उसकी छोटी बहन इतनी बीमार हुई कि उसके पिता छोटी बहन को उठा ले गए लेकिन वह वहीं रह गई। एक-एक दिन…

  • ख्वाहिशें | Kavita Khwahishen

    ख्वाहिशें ( Khwahishen ) ख्वाहिशों को जरूरत न बनाइये अपनी बन भी जाए अगर, तो उसे कभी अपनी लत न होने दीजिये, हो भि जाए लत यदि तो उसे न बनाइये कभी मजबूरी अपनी मजबूरी भी बना देती है मजबूर इतना कि हाथ सेंकने को घर अपना हि जला देती है ऐसे हालात में भुला…

  • अरमान बाकी है | Armaan Baki Hai

    अरमान बाकी है ( Armaan Baki Hai )   इक अरसे जो तेरे बगैर चली वो साँस काफी है, बिछड़ कर भी तू मेरा रहा ये एहसास काफी है, सब पूछते हैं कैसे सफ़र किया तन्हा, मैंने कहा ज़िंदा रहने केलिए आख़िरी मुलाकात काफी है, तेरे ख़्याल से ही रौशन रहीं मेरी तन्हाईयाँ सदा, तुझे…

  • परीक्षा का डर कैसा | Kavita Pariksha ka Dar

    परीक्षा का डर कैसा   लो परीक्षाएं आ गई सर पर अब कर लो तैयारी। देने हैं पेपर हमको प्रश्नों की झड़ियां बरसे भारी। घबराहट कैसी संकोच छोड़े परीक्षा से डर कैसा। पढ़ाई हमने भी की माहौल ना देखा कभी ऐसा। विनय भाव धारण कर नियमित पढ़ते जाएं। विषय बिंदु पर ध्यान केंद्रित आगे बढ़ते…

  • संघर्ष जीवन के | Sangharsh Jivan Shayari

    संघर्ष जीवन के ( Sangharsh Jivan ke )   बचपन गुज़रा और जवानी ने दस्तक दिया, बस तभी से संघर्ष जीवन का है शुरू हुआ, इस संघर्ष का सिलसिला साँसों संग टूटता, हयात-ए-सफ़र आज़माइशों के नज़र किया, उम्र के साथ-साथ ये संघर्ष भी बढ़ता जाता, ज़िन्दगी की ख़ुशियों को, हरपल मंद किया, स्याह बालों में…

  • कोई नेक | Kavita Koi Nek

    कोई नेक ( Koi Nek )   कमी निकाले जो काम मे, करे सुधार की बात समझिये बना रहा वह आपको, देगा भी वही साथ मिलते सलाहकार बहुत, पर दिखाते नही राह थामिये तुम हाथ उसका, जिसमे है तुम्हारी चाह बगुलों की इस भीड़ में, दुर्लभ हंस का मिलना है होगा किससे कल उज्ज्वल, यही…

  • जागो जनता जागो | Kavita Jaago Janta Jaago

    जागो जनता जागो! ( Jaago janta jaago)    घंटों इंतजार क्यों करते हैं? सर्दी गर्मी बारिश सहते हैं पलकें बिछाए रहते हैं आप जनता मालिक हैं। लूटने वाले का जयकारा लुटने वाले ही लगाते हैं यह ठीक नहीं। दुर्भाग्य वतन का औ सौभाग्य राजवंशों का? लोकतंत्र हो आया, पर हकीकत बदल न पाया। अशिक्षा गरीबी…

  • निर्माणकर्ता अक्सर

    निर्माणकर्ता अक्सर   अक्सर निर्माणकर्ता , हांसिए पर छूट जाता है, लंका पर पुल बनाने वाले, नल नील आज भी, बंदर कहलाते हैं। आतताई रावण से, लोहा लेने वाला जटायु, आज भी गिद्ध कहलाता है अपने प्रतिभा के द्वारा, लंका को तहस-नहस करने वाले आज भी वानर कहकर अपमानित किए जाते हैं । अक्सर इतिहास,…

  • अपने वोट के हथियार से तस्वीर बदल दो

    अपने वोट के हथियार से तस्वीर बदल दो   सच सुनता नहीं है कोई भी जागीर बदल दो, अपने वोट के हथियार से तस्वीर बदल दो। कब तक सफर करोगे, मंज़िल को ढूंढने में, ये हौंसला तो ठीक है, तदबीर बदल दो। खोखली भी कैसे ना हो इंसाफ़ की बुनियाद, हाकिम ही कह रहा है…