• अनेकांतवाद | Anekantavada

    कहते है जिसने जीवन में अनेकांतवाद को सही से अपना लिया उसने जीवन में सुखो की राह को खोल लिया। उत्कृष्ट चिन्तक और विचारक, दार्शनिक,लेखक, उच्च कोटि के ध्यान तपस्वी आदि अहिंसा व अनेकांतवाद के अथक पुजारी होते है तभी तो वे परम दार्शनिक महामनस्वी कहलाते है। वैचारिक मतभेदों, उलझनों, झगड़ो आदि से बचने के…

  • सुर असुर | Katha Sur Asur

    प्राचीन काल में सुर और असुर दो भाई थे । दोनों सहोदर थे।। जो भाई काम से जी चुराते थे। किसी प्रकार काम निकाल लेते थे । वह सभी सुर कहलाए। सुर वह लोग थे जो मुख्य रूप से सुरा और सुंदरी में हर समय मस्त रहकर अपनी शक्ति को क्षीण कर देते थे। सुरों…

  • ईद मुबारक़ | Kavita Eid Mubarak

    ईद मुबारक़ ( Eid Mubarak )   ईदुल फ़ितर मुबारकबाद अल्लाह रखे आबाद ईदुल फ़ितर मुबारकबाद अल्लाह रखे शादाब माहे पाक रमज़ान में रोज़े रखे अ़क़ीदत से बड़े स़िदक़ से रखे वक़्त पर स़िह़री इफ़्तार का ख़्याल ईमान नही होने दिया ज़रा पायमाल आई ईद ख़ुशियां लाई ईद मुबारक़ दीन की दावत लाई ईद मुबारक़…

  • शादी में दावत | Kavita Shadi me Dawat

    शादी में दावत ( Shadi me Dawat ) शादी हो बेटा बेटी की दावत खाएं हम सब खर्च हो मां-बाप का मजा उड़ाएं हम सब शादी का निमंत्रण आते ही देखें तारीख प्रतिभोज फिर मन में आता ख्याल अब तो व्यंजनों की होगी मौज तरह-तरह के पकवान रखे वहां फिर भी आंखें ढूंढे और नये…

  • मन की डायरी | Kavita Man ki Diary

    मन की डायरी ( Man ki Diary ) मन की डायरी में लिखे है कुछ अनकहे अलफ़ाज़ जिन्हे पढ़ने के लिए जरूरत होगी तुमको रूह में उतरने की, हृदय समंदर में डूबकर अहसासों के सीप चुनने की, क्या तुम चुन पाओगे मेरे मन को पढ़ पाओगे !! डी के निवातिया यह भी पढ़ें:- हे, मनुज…

  • मेहनत के बावजूद | Laghu Katha Mehnat ke Bawajood

    जीवन जन्म से ही एक पांव से कुछ दबता है और उसे गरीबी भी विरासत में मिली हुई है। लेकिन उसका घर अपना शहर में है। उसकी शादी हुई तो उसकी पत्नी छः माह बाद अपने घर के ही बगल में गोपाल बाबू के यहांँ वर्तन- वासन करने लगी। पेट की रोटी में कुछ राहत…

  • मेरी प्यारी माँ | Meri Pyari Maa

    मेरी प्यारी माँ ( Meri Pyari Maa ) रोज़ ही धीमे कदमों से मेरे ख़्वाबों में आती है, हौले-हौले सुरो में “लोरी” वह मुझे सुनाती है, दुनिया के झमेलों से निकल “आँखें “बंद करूँ, माँ का तसव्वुर बेसुकूनी को सुकून दे जाती है, ज़िन्दगी की धूप के थपेड़े ‘रूह’ को जलाती है, तब माँ के…

  • गुणगान | Kavita Gungaan

    गुणगान ( Gungaan )   मिलते रहो मिलाते रहो सभी से जाने कब जिंदगी की शाम हो जाये फुरसत हि मिली नहीं काम से कभी जाने कब आराम हि आराम हो जाए लोभ, लाभ, धन, बैर रह जायेंगे यहीं भूल जायेंगे अपने भी चार दिन के बाद ही बनती हि चली आई है गृहस्थी आज…

  • ऐसा न हो कि सारे आसार टूट जाए | Geet Aisa Na Ho

    ऐसा न हो कि सारे आसार टूट जाए   ऐसा न हो कि सारे आसार टूट जाए जो हिस्से में मिली है, दीवार छूट जाए। हम नहीं कहते हैं कि तुम साथ रहो मेरे ऐसा न हो नदी का किनार छूट जाए। लोग तो बहुत मिलेंगे तुझे समझाने वाले ऐसा न हो हँसने का आधार…

  • मां जगदंबे | Kavita Maa Jagdambe

    मां जगदंबे ( Maa Jagdambe )   मां जगदंबे प्रथम रूप पर, सारा जग बलिहारी ************ शैलपुत्री मंगल आगमन, सर्वत्र आध्यात्म उजास । नवरात्र शुभ आरंभ बेला, परिवेश उमंग उल्लास । योग साधना श्री गणेश, साधक मूलाधार चक्र धारी । मां जगदंबे प्रथम रूप पर, सारा जग बलिहारी।। हिमालय सुता भव्य दर्शन, मनमोहक असीम फलदायक…