• उच्चता

    उच्चता कितना आकर्षक शब्दकिन्तु जितना आकर्षकउतना ही दूर यह हैपुरुषार्थ और लगन सेकोई भी कार्य बेहतर होता हैसंकल्प और प्रतिबद्धतासे होता बेहतरीनकार्य को श्रेष्ठता काजामा पहनाने के लिएरहना पड़ता है सदैवउसमें तन-मन से लीनप्रतिभा और क्षमता केयोग से वो उच्चता पाता हैअपनी अलग पहचान बनाता हैचाहे जीवन विकास काकार्य हो याचाहे हो किसी मेंयोग्यता प्रदर्शन…

  • अहिंसक आंदोलन के सूत्रधार: महावीर स्वामी

    मानव समाज में हिंसा आतंक की जड़े बड़ी गहरी हैं। घर परिवार में बात बिना बात के बड़ों द्वारा छोटे को मारना, पति द्वारा पत्नी बच्चों को मारना पीटना छोटी-छोटी बातों में पिटाई कर देना सामान्य बात है। ऐसे ही सामान्य दिनचर्या में भी बात-बात में लड़ाई झगड़ा करना हिंसा के उदाहरण हैं। वर्तमान समय…

  • हिंदी ग़ज़ल और उर्दू ग़ज़ल में विभिन्नताएं

    एक आलोचनात्मक अध्ययन ग़ज़ल भारतीय उपमहाद्वीप की एक विशिष्ट काव्य विधा है, जिसकी जड़ें फारसी साहित्य में हैं और जिसकी शाखाएँ उर्दू और हिंदी साहित्य में समृद्ध रूप से फैली हुई हैं। यद्यपि हिंदी और उर्दू ग़ज़लों का मूल स्रोत समान है, फिर भी समय, भाषा, शैली, भाव-व्यंजना और सांस्कृतिक संदर्भों के कारण दोनों में…

  • हनुमान जयन्ती

    हनुमान जयन्ती शांति,गीत,श्रद्धा,समर्पणआदि गरिमामय जीवनऔर व्यक्तित्व सेधर्म का सुंदर समन्वयज्ञान सागर लहराने वालेआनंद के लोक में ले जाने वालेक़लम के कृति रत्न समुद्दभूतहनुमान जी को मेरा भावोंसे वंदन -अभिनंदन !शत- शत नमन ! प्रणाम !जो ज्ञाता है वहस्वयं अज्ञात है ।अज्ञात को ज्ञात करनेका प्रयत्न होना चाहिएविभिन्न माध्यमों के द्वाराक्योंकि आत्मा को भी अपनासही से…

  • ब्रह्माकुमारीज चीफ दादी रतनमोहिनी को दी श्रद्धांजलि

    स्वतंत्रता सेनानी परिवार कल्याण महापरिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीगोपाल नारसन ने ब्रह्माकुमारीज चीफ दादी रतनमोहिनी के शरीर छोड़कर परमात्मा शिव की गोद लेने पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। आध्यात्म और रूहानियत के क्षेत्र में बड़ी शख्सियत राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी ने श्रीगोपाल नारसन की कई पुस्तकों का विमोचन विभिन्न अवसरों पर किया था। गत…

  • अंधविश्वास तथ्य एवं वैज्ञानिक सत्य

    जिक परिवेश में प्रचलित अंधविश्वास की परंपराएं उसके व्यवहार एवं अन्य क्रियाकलापों को प्रभावित करते हैं । इससे यह स्पष्ट होता है कि अंधविश्वासी व्यवहार के पीछे अंधश्रद्धा , अज्ञान , विवेकशीलता की कमी, भ्रम ,वहम, भय अबौद्धिक परंपराएं, वैज्ञानिक चेतना का अभाव आदि मनो सामाजिक कारक मौजूद रहते हैं। यह भी मनोवैज्ञानिक तथ्य है…

  • मन

    मन बहुत शक्तिशाली हैव्यापक हैउसका साम्राज्यउसकोचुनौती देने वालाकोई नहीं हैअतः भलाई हैप्रकृति के नियम केसाथ चलने में हीसार नहींविपरीत दिशा में कोईमन में कालुष्य न आयेकर्म काट करइतना हिम बनकरचले कि खुद केसंगति वह जो नीति सिखायेवैराट्य प्रकट होवाणी में वैर-भावन उगने पायेराग- द्वेष से दूरहो जायें औरध्रुवतारा -सी चमकलिए सारे जगत मेंचमक सही सेआत्मा…

  • हिंदी और ग़ज़ल: एक आत्मीय संबंध की संभावनाएँ

    हिंदी भाषा भारत की आत्मा है, जिसकी विविधता, गहराई और सांस्कृतिक समृद्धि अद्वितीय है। यह भाषा न केवल संवाद का माध्यम है, बल्कि एक जीवंत परंपरा, साहित्य और भावनाओं की अभिव्यक्ति का स्रोत भी है। मुझे हिंदी से अत्यंत प्रेम है, क्योंकि यह मेरी मातृभाषा है – मेरे सोचने, महसूस करने और व्यक्त करने की…

  • साहित्यिक शिक्षक राष्ट्रनिर्माता होते हैं

    शिक्षक कभी भी साधारण नहीं होता I प्रलय और निर्माण उसकी गोद में खेलते हैं, आचार्य चाणक्य के ये शब्द आज भी उतने ही प्रासंगिक हैंI तक्षिला के आचार्य चाणक्य ने किस तरह पूरे भारत के इतिहास को बदला था, ये सभी जानते हैंl श्रेष्ठ साहित्य किसी ज्ञानवान की ही कृति होती आई हैंl भारत…

  • राम जी के दरबार मे

    आज तौबा गर्दी थी.. इतनी की पैर धरने तक कि जगह नही.. तिल तिल लोग खिसक रहे थे.. पसीने से सरोबार हो रहे थे.. हर मनुष्य दूसरे मनुष्य से लगभग रगड़ कर ही चल रहा था.. और यह गर्दी होनी भी थी.. प्रभु श्री रामचंद्र के जन्मोत्सव की घड़ी थी.. रामजी की भक्ति में दुनिया…