• आ गया फिर चुनाव उत्सव | Geet Chunaav Utsav

    आ गया फिर चुनाव उत्सव आ गया फिर चुनाव उत्सव, करो मतदान जाकर के। आ गया फिर चुनाव उत्सव, करो मतदान जाकर के । करो मतदान जाकर के… करो मतदान जाकरंके ….. करो मतदान जाकर के, आ गया फिर चुनाव उत्सव…… कहीं भी तुम रहो भैया , कहीं भी तुम रहो बहना, कहीं भी तुम…

  • माँ सब दुनिया से प्यारी | Hindi Poem on Maa

    माँ ( Maa )   माँ दुनिया का सबसे छोटा शब्द सही पर इससे बढ़कर शब्द नहीं माँ तो इस दुनिया से बेखबर मांँ होती सबसे अलग बेटा बेटी में भेद न करती प्रेम से हम सबको रखती गर किसी पर दुख आ जाएं उसका दिल तिलमिला जाएं मांँ होती है हरा वृक्ष सदा उसकी…

  • गुमान | Kavita Gumnam

    गुमान ( Gumnam ) पहुँच जाओगे एवरेस्ट की उचाई तक नाप लोगे पाताल की गहराई भी पर, गिरने या डूबने पर बचाने वाले लोग भी हों ख्याल इस बात का भी रखना होगा हर मौसम अनुकूल नहीं होता हर कोई प्रतिकूल नही होता बनाकर चलते हैं जो उन्हे कुछ भी मुश्किल नहीं होता लहरों की…

  • कागा की कविताएं | Kaga Hindi Poetry

    राखड़ी पूनम पर्व भाई बहिन का पावन पर्व राखड़ी पूनम बहिन भाई का गोर्व गर्व राखड़ी पूनम सावन पूर्ण-मास का अंतिम पखवाड़ा पवित्र बहिन बांधे राखड़ी भाई कलाई पावन पवित्र चूनडी़ की चाहत छोड़ मांगना एक वचन मात पिता की सेवा मांगना एक वचन बहिना आप करना सास ससुर की सेवा जीवन होगा सफल सुखी…

  • आदर्श आचार संहिता | Kavita Adarsh Aachar Sanhita

    आदर्श आचार संहिता ( Adarsh Aachar Sanhita ) सबको रोकेगी, सब पर कानून लगायेगी। देश में चुनावी दंगल से पहले, आचार संहिता लग जायेगी। सबको पाबंद करेगी, सबको यह समझायेगी- उद्दण्ड़ करोगे; तो पछताओगे, आयोग के अधिकारों की डंड़ी, गलती करने वाले पर आचार संहिता का डंड़ा चलायेगी। उल्लंघन की गलती, इतनी भारी पड़ेगी, देखे,…

  • सुनो दिकु | Kavita Suno Diku

    कभी ना कभी कभी ना कभी तो लौटोगी तुम,इन सूनी राहों पर चलती हुई,जहाँ हर मोड़ पे तेरा नाम लिखा हुआ है,आवाज़ है मेरी खामोशी में पलती हुई। कभी ना कभी तो समझोगी तुम,इन अधूरे अल्फ़ाज़ों की पीर,जो हर रोज़ तुझसे मिलने को,तकिये के नीचे सोता हैं चुपचाप रखकर अपना सिर। कभी ना कभी तो…

  • दर्द अपने सनम | Kavita Dard Apne Sanam

    दर्द अपने सनम ( Dard Apne Sanam ) दर्द अपने सनम पराए क्यों हो गए। रिश्ते हमने है निभाए क्यों खो गए। पीर पर्वत से भारी हुई क्यों सनम। खुशियां बांटी हमने छुपाए है गम। खिल जाता चेहरा देख हमको जरा। दिल दीवाना कहो कहां वो प्यार भरा। बदली दुनिया तुम ना बदलना सनम। कैसे…

  • लोकतंत्र के महायज्ञ | Kavita Loktantra ke Mahayagya

    लोकतंत्र के महायज्ञ ( Loktantra ke Mahayagya )   लोकतंत्र के महायज्ञ में,मतदान आहुति अहम अष्टादश वय पार हर नागरिक, अधिकृत अप्रतिम मत प्रयोग । निर्वहन सजग अनूप भूमिका, निर्मित लोकतंत्र सुखद जोग । राष्ट्र धर्म प्रतिज्ञा अनुपालन, उरस्थ चित्र समृद्ध हिंद पैहम । लोकतंत्र के महायज्ञ में, मतदान आहुति अहम ।। देश सेवा तत्पर…

  • कविता कैसे लिखूं | Kavita Kaise Likhun

    कविता कैसे लिखूं ( Kavita Kaise Likhun )   कविता कैसे लिखूं मन तो हजारों गोते लगा रहा कविता कैसे लिखूं ? मन कभी घर के अंदर लगा रहता तो कभी घर के बाहर कविता कैसे लिखूं ? मन कभी माता-पिता में लगा रहता तो कभी बच्चों में कविता कैसे लिखूं ? मन में उठती…

  • आग | Kavita Aag

    आग ( Aag ) आग में हि आग नहीं होती पानी में भि होता है दावानल धातुयें भी बहती हैं जमीं मे धारा की तरह आसमान से भी बरसती है आग धूप बनकर आग का होना भी जरूरी है हिम्मत, हौसला, जुनून के लिए बिना ऊर्जा के शक्ति मिलती नही बिना आग के ज्योत जलती…