• दो छोटे कीमती मोती | Do Chhote Kimti Moti

    कहते है कि अगर किसी व्यक्ति को मदद की जरूरत होती है तो उसको तुरन्त देना चाहिये । मन की कोमलता और व्यवहार में विनम्रता से वह कार्य भी बन जाते हैं जो कठोरता से नहीं बन पाते हैं। किसी ने सच ही कहा है =डरा -धमकाकर, अहसान जताकर किसी को जीते तो क्या जीते?…

  • मैं तुम्हें चाहने लगा | Main Tumhe Chahne Laga

    मैं तुम्हें चाहने लगा ( Main tumhe chahne laga ) प्रणय अनुबंध पर,मैं तुम्हें चाहने लगा प्रेम पथ जगी लगन , तन मन अथाह मगन । देख दिव्य अक्स तुम्हारा, हृदय मधुर गाने लगा । प्रणय अनुबंध पर,मैं तुम्हें चाहने लगा ।। मुझे लगी जो सनक , सबको हो गई भनक । हर पल जीवन…

  • कीमती | Kimti

    कीमती ( Kimti )   जीवन के उलझे धागों के, सुलझे हुए रिश्ते हो, नए मोड़ के फरिश्ते कहलाते हो.. बहुत डर था दिल में, मानो मन को सवालों ने घेरा था, मगर जवाब में खुदाने मुझे कीमती तोफे को दिया था।। दिल की धड़कने बढ़ने लगती, तो मुझे वह मुझे गले लगाती , उलझती…

  • भीगी पलकें | Bheegi Palken

    भीगी पलकें ( Bheegi palken )    पलके भीग जाती है, बाबुल की याद में, तन्हाई बड़ी सताती है, अब मायके के इंतजार में।। यह कैसे रीत तूने खुदा है बनाई, बचपन का आंगन छोड़, होजाती है परियो की विदाई।। जिम्मेदारी के ढांचे में ढलना ही होता है, पलके पर आंसू छुपकर , हर फर्ज…

  • सासू मां का बहु के लिए अनमोल तोहफा

    राधा की शादी एक अच्छे परिवार में हुई थी वह अपनी ससुराल में इकलौती बहू थी। बस एक छोटी नंद थी और सास ससुर। ससुराल में सभी बहुत अच्छे थे। राधा को अपनी बेटी की तरह ही मानते थे। पति भी उसको बहुत प्यार करता था उसकी सभी जरूरतों का ध्यान रखता था। नंद तो…

  • चाय पर : हाइकु

    चाय ( Chai )    गरमाहट लाती हैं चुस्कियां गर्म चाय की ।। बातें भी होती गरमा गर्म चाय के साथ सभी ।। कुछ पुरानी कुछ नई बाते हैं, मुलाकाते हैं ।। सबको बुलाए आओ चाय बनाएं ताजा हो जाएं।। पकौड़े साथ मसाला वाली चाय आज हो जाएं।। किस्से सुनाते, विसराए पल भी , हाँ…

  • राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त | Maithili Sharan Gupt

    राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त ( Rashtrakavi Maithili Sharan Gupt )   खड़ी बोली के महत्वपूर्ण एवं प्रथम-कवि थें आप, हिंदी-साहित्य में दद्दा नाम से पहचानें जाते आप। बांग्ला हिन्दी और संस्कृत भाषाऍं जानते थें आप, अनेंक उपाधियों से सम्मानित हुऍं गुप्त जी आप।। मैथिलीशरण गुप्त जी था जिनका प्यारा ‌यह नाम, महावीरप्रसाद द्विवेदी की प्रेरणा से…

  • भ्रष्ट नेता | Bhrasht Neta

    भ्रष्ट नेता! लहू जनता का पीता ******** सभी बड़ी हस्तियां शामिल हैं यहाँ के भ्रष्टाचार में फूटी कौड़ी नहीं दी है जनता ने,किसी को उधार में! लाखों करोड़ों की गड्डियां जो निकलती हैं, उनके दराजों से… आम आदमी का लहू है, मटिया तेल नहीं! जो ये टिन के डब्बे में छिपा कर रखते हैं अपने…

  • भागो नहीं, जागो | Bhago Nahi Jago

    परिस्थितियों कभी समस्या नहीं बनती , समस्या इसलिए बनती हैं क्योंकि हमें उन परिस्थितियों से सही से लडना नहीं आता है । परिस्थिति तो अपने आप मे एक ही होती है, सबके अलग- अलग नजरिये होते है कि वो उसको किस रूप में लेता है। वैसे काफी हद तक इसमें हमारे कर्म-संस्कार के कारण हमारे…

  • चाहत | Chaahat

    चाहत ( Chaahat )    चाहत के मौन गलियारों में, नेह का मृदुल स्पंदन उर तरंग नवल आभा, प्रसून सदृश मुस्कान । परम स्पर्शन दिव्यता, यथार्थ अनूप पहचान । मोहक स्वर अभिव्यंजना, परिवेश सुरभि सम चंदन । चाहत के मौन गलियारों में, नेह का मृदुल स्पंदन ।। अनुभूति सह अभिव्यक्ति , मिलन अहम अभिलाषा ।…