• खिलखिलाया करो | Khilkhilaya Karo

    खिलखिलाया करो ( Khilkhilaya karo )    तलब इतनी न अपनी बढ़ाया करो, दाग-ए-दिल न किसी को दिखाया करो। गर्म आँसू हैं आँखों में देखो बहुत, घुट -घुटके न जीवन बिताया करो। अच्छे लोगों से दुनिया है भरी-पटी, रोज संग में तू भी खिलखिलाया करो। जाँ को बेचो नहीं, दिल को बेचो नहीं, दिल दुखाने…

  • प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद | Dr. Rajendra Prasad

    प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ( Pratham rashtrapati Dr. Rajendra Prasad ) आज़ादी पश्चात भारत के जो प्रथम राष्ट्रपति बनें, गाॅंधी जी के बेहद करीबी और सहयोगी भी रहे। भारत छोड़ो आंदोलन के समय जो जेल भी गए, एक मात्र ऐसे व्यक्ति जो दो बार इसी पद पे रहे।। जो ३ दिसम्बर १८८४ को जन्में…

  • हैरान हूं | Hairan Hoon

    हैरान हूं ( Hairan hoon )    हो गई हैरान हूं इस जिंदगी को देखकर दोस्ती को देखकर इस दुश्मनी को देखकर। आ गए वो अंजुमन में साथ लेकर रौनकें हो गया मालूम सबको रौशनी को देखकर। रोज़ होते वो ख़फ़ा अबके मनाया भी नहीं दिल भरा इस बार उनकी बेरुख़ी को देखकर। इक फ़कत…

  • यादें तेरी दिल की धड़कन

    यादें तेरी दिल की धड़कन यादें तेरी दिल की धड़कनें झकझोर हमें रुला गई। सरहद के सच्चे सेनानी जब याद तुम्हारी आ गई। तुम माटी के सच्चे सपूत हौसलों की मिसाल हो। वीरों में वीर शिरोमणि जय घोष ऊंचा भाल हो। सरहद के तुम रण बांकुरे भारत मां के लाल हो। सीमा के सजग प्रहरी…

  • अभिव्यक्ति पथ | Abhivyakti Path

    अभिव्यक्ति पथ ( Abhivyakti path )    अभिव्यक्ति पथ मनोज्ञ, प्रियम्वदा शब्द श्रृंगार से हिय चिंतन नैतिक सहज भाव सकारात्मकता ओतप्रोत । यथार्थ अवबोधन संबोधन , पटाक्षेप झूठ पाखंड श्रोत । कारण प्रभाव परिणाम अहम, संप्रेषण उपमा अमिय सार से । अभिव्यक्ति पथ मनोज्ञ, प्रियम्वदा शब्द श्रृंगार से ।। वय लिंग समूह शिक्षा ज्ञान, परम…

  • ढेरा | Dhera

    ढेरा ( Dhera )    सवालों का ढेरा है बस दुआओं का सहारा है।। मंजिल की राहों में बसेरा है बस वक्त का चेहरा है।। सवालों ने घेरा है जिम्मेदारियों का पहरा है।। ख़्वाब में तो आसमान की उड़ान है खुदकी बनानी पहचान है।। सवाल है दिल में फैला, क्यू चल रहा तू दलदल में…

  • सब बदल रहा है | Sab Badal Raha hai

    सब बदल रहा है ( Sab badal raha hai ) राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस देख रहे है आज सभी यह आधुनिक कलाकृति, इसके साथ बिगड़ रही है प्रदूषण से यह प्रकृति। भूल रहे है रीति-रिवाज एवं अपनो की ये स्मृति, जिससे सभी में बढ़ रहीं है हिंसा की ‌यह प्रवृति।। धूल धूंआ एवं बढ़ रहा…

  • टूटे हुए सपने | Toote hue Sapne

    टूटे हुए सपने ( Toote hue sapne )   तोड़ता भी रहा जोड़ता भी रहा टूटे सपनों को मैं रात भर खुली आंख जब सहर हुई टुकड़े ही टुकड़े थे बचे सामने उम्र भीं काबिल न थी जोड़ पाने में बहत्तर छेदों की गुदड़ी थी मिली सिल सिल कर भी सिलते रहे जर्जर दीवारें भी…

  • मुहब्बत से भर गई | Muhabbat Shayari in Hindi

    मुहब्बत से भर गई ( Muhabbat se bhar gayi )    रंगीनिये -हयात के मंज़र से भर गई बस इक नज़र मिली थी कि दिल में उतर गई प्यासों की प्यास और बढ़ा कर गुज़र गई लेकर सरापा-हुस्न के साग़र जिधर गई उसकी निगाहे-नाज़ बड़ा काम कर गई खाली था दिल का जाम मुहब्बत से…

  • कुंभलगढ़ दुर्ग | Kumbhalgarh Durg

    कुंभलगढ़ दुर्ग ( Kumbhalgarh durg )   शूरवीरों की तीर्थस्थली है, हिंद की महान दीवार शत शत वंदन अभिनंदन , मेवाड़ पुनीत पावन धरा । प्रताप शौर्य सदा परम, साक्षात गवाह हर कतरा । दर्शन मेवाड़ी आंख उपमा, कुंभलगढ़ महिमा सदैव अपार । शूरवीरों की तीर्थस्थली है, हिंद की महान दीवार ।। तेरह मई चौदह…