• मन की दीवार | Man ki Deewar

    मन की दीवार ( Man ki deewar )   मर सी जाती हैं भावनाएं दिन रात की नित तकरार से हो जाता है खत्म सा सफर शुरू करते हैं जिसे प्यार से कभी शक की खड़ी दीवार कभी बदलते विचारों की भिन्नता कभी किसी का बढ़ता प्रभाव उपजा ही देते हैं मन में खिन्नता कभी…

  • अलख निरंजन | Alakh Niranjan

    अलख निरंजन ( Alakh Niranjan )   भज अलख निरंजन प्यारे, अलख निरंजन गाता जा। ये दुनिया सब मोह माया है, जग में प्यार लुटाता जा। अलख निरंजन गाता जा खाली मुट्ठी आया जग में, मानव हाथ पसारे जायेगा। क्या खोया क्या पाया नर, किसका हिसाब लगाएगा। यह दुनिया एक रंग मंच है, बस किरदार…

  • सुसंस्कार | Susanskar

    सुसंस्कार ( Susanskar )    सुसंस्कारों की सुगंधि से, जीवन उपवन महकता रहे शिक्षा ज्ञान सहज अवबोध , प्रयोग व्यवहार धरातल । निर्माण आदर्श चरित्र, भविष्य सदा उज्ज्वल । आत्मसात कर नूतनता, पुरात्तन भाव चहकता रहे । सुसंस्कारों की सुगंधि से, जीवन उपवन महकता रहे ।। मान सम्मान मर्यादा ज्योत, अपनत्व अप्रतिम प्रसरण । तन…

  • कार्तिक पूर्णिमा | Kartik Purnima

    कार्तिक पूर्णिमा ( Kartik purnima )   कार्तिक पूर्णिमा पावन पर्व स्नान ध्यान दान का। देव दिपावली त्योहार मनाते सनातन विधान का। गंगा धारा में दीपक पूजन अर्चन हो श्रद्धा भाव से। मनोकामना पूर्ण होती धन वैभव हो शुभ प्रभाव से। सहस्त्रों नर नारी नदी तट भाव भक्ति से करें स्नान। नारायण की पूजा होती…

  • लहर | Lehar

    लहर ( Lehar )   सागर की उठती गिरती लहरें भी देती हैं सीख हमे जीवन की करना है तैयार अगर मोती तो धरनी होगी राह संघर्ष की पर्याय नही कुछ सिवा प्रयास के रखना होगा विश्वास खुद पर भी वक्त के साथ संयम भी चाहिए सतत प्रयास करते रहना चाहिए कल कोरी कल्पना ही…

  • छत्तीसगढ़ी भाखा | Chhattisgarhi Bhakha

    छत्तीसगढ़ी भाखा ( Chhattisgarhi Bhakha )  गजब मीठ लागे भईया छत्तीसगढ़ी भाखा गजब मीठ लागे, ये सुग्घर छत्तीसगढ़ी भाखा ला बोलईया अपन कस लागे। गुरतुर सुग्घर ये बोली हा सुनईया के कान मा मीठ घोले, देस रहे चाहे परदेस अलग चिन्हारी पाए जेन एला बोले। छत्तीसगढ़ी के सात सुर मा करमा ददरिया सबला नचावय, सुग्घर…

  • कान्हा की आशनाई | Kanha par Kavita

    कान्हा की आशनाई ( Kanha ki Aashnai )    अगहन की ठिठुराई में, कान्हा की आशनाई सनातन धर्म द्वादश मास, अद्भुत अनूप पावन महत्ता । अंतर्निहित मांगलिक प्रभा, दिग्दर्शन सेतु परम सत्ता । मगसर माह दिव्यता अथाह, रोम रोम अनुभूत कन्हाई । अगहन की ठिठुराई में,कान्हा की आशनाई ।। जनमानस हर्षित गर्वित , नदी सरोवर…

  • उपेक्षा | Upeksha

    उपेक्षा ( Upeksha  )   गहरी जड़ें कारण होती हैं आसमान में वृक्ष के मजबूती से उठ खड़े होने में गहरी नींव कारण होती हैं धरती पर घर के मजबूती से उठ खड़े होने में गहरी अंधेरी कारण होती हैं हृदय में डर के मजबूती से उठ खड़े होने में गहरी ख़ामोशी कारण होती हैं…

  • आदमियत | Aadamiyat

    आदमियत ( Aadamiyat )   आया हुआ आज रुकता नही आनेवाले कल को कोई रोक सकता नहीं इन्ही के बीच भागती हुई जिंदगी मे भी कोई समरसता नहीं क्या खो चुके हो और क्या खो दोगे यह आपके समझ की बात है किंतु,वसीयत मे क्या रख पाओगे यह आपके निर्णय की बात है स्वयं आपका…

  • हमरंग पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित पुस्तकों में प्रकाशित होगी लोकप्रिय रचनाकार उदय की रचनाएं

    हमरंग पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित होने वाली तीन पुस्तकों में प्रकाशित हो रही है उदय की कविताएं जिनका नाम होली के रंग, बोलता बचपन एवं मुसाफ़िर है आप सबको बता दे कि हमरंग पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित स्याही की आवाज़ साझा काव्य संग्रह में उदय की (पहली बार) पेपर बैंक पुस्तक में रचनाएं प्रकाशित हुई थी जो…