• साहित्यकार | Sahityakar

    साहित्यकार ( Sahityakar )    जीता है जो औरों की खातिर साहित्यकार वही कहलाता है करता नही प्रहार गलत पर खंजर से लेखन से ही वह युगदृष्टा बन जाता है साहित्य नही केवल शब्दों का संचय यह तो विष और अमृत दोनो का समन्वय आवश्यकता होती है जब जैसे साहित्य का होता है सृजन तब…

  • मेरे हमसफर | Mere Humsafar

    मेरे हमसफर ( Mere humsafar )   पुष्पक्रम से भरी पगडंडी जो कि– रंगीन फुलवारी से सजी जिसकी भीनी-भीनी महक पूरे वातायन में हवा में तैरती है। वहीं उन पर अनगिनत तितलियाँ मंडराती हुई अहसास कराती तुम्हारे अपने होने का। जहाँ तक देखती हूँ उन्हें कैद कर लेना चाहती हूँ इन रंगीन खुशबू को भी…

  • मै फक्र से कहती हूं | Phakar se

    मै फक्र से कहती हूं ( Mai phakar se kahti hoon )   मेरे पास भी दोस्त है, अंधेरी रातो मे खड़ा मेरा प्यार है, मुझे रोशनी देता वह चाँद है ।। हाँ मै चाँदनी नहीं, मैं तो फूल हू जिसे पाने उसने काटो से रिश्ता जोड़ा है । मेरे पास दोस्तों की महफिल नही…

  • हे हृदय प्रिया | Hriday Priya

    हे हृदय प्रिया ( He hriday priya )    सुंदरता में भी सुंदरतम कृति हो तुम आई हुई स्वर्ग की अनुपम छवि हो तुम ऋतुओं मे सावन सी मन भावन हो तुम प्राकृतिक सौंदर्य मे भी सर्वोत्तम हो तुम गंगा सी निर्मल,चांदनी सी धवल हो तुम मानसरोवर में जैसे खिला कमल हो तुम सुंदरता की…

  • न रुकी जंग तो | Na Ruki Jang to

    न रुकी जंग तो…! ( Na ruki jang to ) ( नज़्म )   बुराई बढ़ेगी, तो अच्छाई भी बढ़ेगी, ये दुनिया आज है,तो कल भी रहेगी। सदियों से एक साथ रहते हम आए, मोहब्बत की तासीर न फीकी पड़ेगी। अम्न का रास्ता बनाओ दुनियावालों, जड़ से जुड़ी कायनात,जुड़ी ये रहेगी। ऐसे तो मुक्कमल कोई…

  • लौट आ अब तू कहाँ है | Laut aa Ab

    लौट आ अब तू कहाँ है ( Laut aa ab tu kahan hai )    तू दिखा यूं मत गुमाँ है और भी देखो मकाँ है फूल दूँ कैसे उसे अब वो नहीं अब दरमियाँ है दिल यहाँ लगता नहीं अब वो हुआ जब से निहाँ है उस हसीं से तू मिला दे ये ख़ुदा…

  • झूठ की दौड़ | Jhoot ki Daud

    झूठ की दौड़ ( Jhoot ki daud )    झूठ के मुरब्बों में मिठास तो बहुत होती है किंतु,देर सबेर हाजमा बिगड़ ही जाता है झालर मे रोशनी,और कागजी फूलों की महक जैसे…. हमाम मे तो नंगे होते हैं सभी बाहर मगर निकलते कहां हैं दाल मे नमक बराबर ही हो तो अच्छा शक्कर बराबर…

  • उम्मीदों का दामन | Umeedon ka Daman

    उम्मीदों का दामन ( Umeedon ka daman )   उम्मीदों का दामन यूं कभी ना छोड़िए। उम्मीद पे दुनिया टिकी मुंह ना मोड़िए। आशाओं के दीप जला खुशियां पाईए। प्यार के अनमोल मोती जग में लुटाइए। हारकर जो थक चुका हौसला बढ़ाइए। बढ़कर जरा थामिए हमें यूं ना गिराइए। मिलने को है आतुर थोड़ा शीघ्र…

  • हरियाणा-दिवस पर काव्य-गोष्ठी का आयोजन

    जनवादी लेखक संघ कुरुक्षेत्र-व डा. ग्रेवाल अध्ययन संस्थान द्वारा काव्य-गोष्ठी का आयोजन – ‘हरियाणा-दिवस‘ पर कवियों ने ‘हवाओं में खुशबू बनकर बिखरने‘ का दिया संदेश -मानवता, इन्साफ, यादों, जिन्दगी, बराबरी का गुलदस्ता पेश किया । कुरुक्षेत्र:– यहां ‘हरियाणा-दिवस’ के अवसर पर जनवादी लेखक संघ व डॉ.ग्रेवाल संस्थान की ओर से एक भावोत्तेजक काव्य-गोष्ठी का आयोजन…

  • ज़मीरों की तिज़ारत | Zamiron ki Tijarat

    ज़मीरों की तिज़ारत ( Zamiron ki tijarat )   कुछ लोग ज़मीरों की तिज़ारत नहीं करते रंजिश में रक़ीबों की ख़िलाफ़त नहीं करते। ये दौर ज़रा फ़र्क ज़रा अजनबी सा है मतलब न हो तो लोग मुहब्बत नहीं करते। है फ़ितरतों में अपनी वफ़ा और अकीदत हम दोस्ती में यार सियासत नहीं करते। कब तक…