• रेत का ताजमहल | Ret ka Taj Mahal

    रेत का ताजमहल ( Ret ka taj mahal )    दरअसल था महल रेत का ढह गया ताजमहल रेत का स्वप्न है या असल कि पुनः बन गया ताजमहल रेत का प्रेम-मोहब्बत पर पलल खा रहल बड़ा भाव ताजमहल रेत का धनकुबेरो का करें खूब सारिका सेवा-टहल ताजमहल रेत का   डॉ. सारिका देवी अमेठी…

  • जोकर | Laghu Katha Joker

    भीड़ खचाखच थी। रंगमंच आधुनिक रंगों से सज़ा था। गांधी पर ‘ शो’ चल रहा था लेकिन बहुत अधिक मनभावन दृश्य न होने से घंटे भर में ही लोग झपबकाने लगे। उसने इसलिए नहीं कि श्रोताओं को मानसिक संतुष्टि नहीं मिल रही थी बल्कि कुछ के सोने का समय हो रहा था और कुछ टकटकी…

  • नहीं पचा पाओगे | Nahi Pacha Paoge

    नहीं पचा पाओगे ( Nahi pacha paoge )    हम क्या तार्किक या नास्तिक बुद्धि वाले या तुम्हारे पोंगापंथ की बखिया उधेड़ने वाले आतंकवादी लगते हैं तुम्हें नक्सलवादी या आईएसआईएस के उन्मादी ? ये तुम्हारा धर्म ये तुम्हारा मजहब ये तुम्हारा पंथ या ये तुम्हारे ईश्वर, पैगम्बर या गॉड या ये तुम्हारे मानवीय काले दिल…

  • बेख़बर हूं | Bekhabar Hoon

    बेख़बर हूं ( Bekhabar Hoon )    जलता है खैरलांजी, जलता है मेरा मन गोहाना की राख सुलगती है अब भी मेरे लहू में, गोधरा की ट्रेन से झांकती वे मासूम आंखें करती हैं मेरा पीछा, बदायूं के बगीचे में शान से खड़े पे़ड़ पर टंगी दो लाशें दुपट्ट्टे पर खून के धब्बे, धब्बों में…

  • दिव्यांश मौर्य की कविताएँ | Divyansh Maurya Poetry

    मैं कविताएं तब लिखता हूं। मैं कविताएं तब लिखता हूं, जब मेरा मन रोने लगता। जीवन के दुःख दर्दों को जब , मन अश्रु से धोने लगता। मैं कविताएं तब लिखता हूं, जब मेरा मन रोने लगता। बोल नहीं जब मैं कुछ पाता, पर मन ही मन हूं चिल्लाता। जब मन भावुक हो जाता है,…

  • मैं हूं प्रयागराज | Prayagraj

    मैं हूं प्रयागराज ( Main Hoon Prayagraj )    इतिहास के पृष्ठों पर स्तंभ-अभिलेखों पर पथराई नजरों से ठंडे हाथों से नदी-नालों का खेत-खलिहानों का शहर-नगरी में तपती दुपहरी में संगम के तट पर कण-कण छानते हुए देख अतीत के अपने रूप-नक्शे दिखा इलाहाबाद उदास! उदास! उदास बोला उदास मन से रखना मेरे अतीत को…

  • डॉक्टर बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर | Dr. Bhimrao Ambedkar par Kavita

    डॉक्टर बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ( Dr. Baba Saheb Bhimrao Ambedkar )   देश विदेश में बुद्धजीवियों के मध्य बाबा साहेब ने धाक जमाया था देश विदेश के विश्व विद्यालयों से सबसे सर्वोच्च बहुत डिग्री पाकर शिक्षा के क्षेत्र में प्रसिद्धि पाया था भारत में जारी छुआछूत,असमानता को दूर भगाया था दलितों,पिछड़ों, गरीब सवर्णों और…

  • हमारे वृद्ध | Hamare Briddh

    हमारे वृद्ध ( Hamare Briddh )    बुजुर्गों के हाथ आशीर्वाद के लिए उठे तो अच्छे लगे यह दौलत, शोहरत ,नाम यही छूट जाना है रहना है सिर्फ इंसानियत और इंसान यह चिंतन मनन और मंथन अनुभव, तजुर्बा, गहनता वृद्ध फलदार वृक्ष की तरह हंसते, मुस्कुराते आशीष देते तटस्थता, सहजता, सरलता प्रकृति से सब कुछ…

  • भवंर | Bhanwar

    भवंर ( Bhanwar )    चित्त का भवंरजाल भावनाओं की उथलपुथल एक बवंडर सा अन्तस में और हैमलेट की झूलती पक्तियां टू बी और नाॅट टू बी जद्दोजहद एक गहन.. भौतिक वस्तुएं आस पास रहते लोग सामाजिक दर्जे और हैसियत क्षणिक और सतही खुशी के ये माध्यम नही करवा पाते चित्त को आनन्द की अनुभूति……

  • आरक्षण : एक अभिशाप या वरदान

    आजकल आरक्षण का मुद्दा काफी उठ रहा है । कुछ का कहना है कि इसके वजह से देश में काबिलियत की कमी आ रही है तो कुछ का कहना है आरक्षण की वजह से शोषित वर्ग को ऊपर उठने का मौका मिल रहा है। अभी हाल ही में हमारे पड़ोस में रहने वाले मिश्रा जी…