• कर्मफल | Karmaphal

    कर्मफल ( Karmaphal )   आपके चतुर्विध सोच और कर्म का निष्कर्ष ही कहलाता है कर्मफल यही है आपका भाग्य या प्रारब्ध…. कर्मों का परिणाम उदित होता है समय अनुसार ही जिसके प्रभाव ही करते हैं संचालित आपके वर्तमान को और आप बढ़ते है कल की ओर…. भाग्य ,आपका भविष्य नही वर्तमान भी पूर्ण नही…

  • ले गया सकूँ | Sukoon Shayari in Hindi

    ले गया सकूँ ( Le gaya sukoon )    न रही उसको अब उल्फ़त है ? ले गया सकूँ सब राहत है चोट लगी ऐसी दग़ा की कल अब उल्फ़त दिल से रुख़सत है गुल न लिया चाहत का उसने टूटी दिल की ही हसरत है उल्फ़त में ऐसा टूटा दिल न यहाँ दिल को…

  • नई संसद का श्री गणेश | Nai Sansad

    नई संसद का श्री गणेश ( Nai sansad ka shree ganesh )    नई संसद का श्री गणेश, नारी शक्ति वंदन से नव संसद नवल सत्र, अद्भुत अनुपम व विशेष । अथाह मुदित हिंद धरा, रज रज खुशियां अशेष । द्वि सदन अहम बिल पारित, सहर्ष बहुमत आभा मंडन से । नई संसद का श्री…

  • दिल की अभिलाषा | Dil ki Abhilasha

    दिल की अभिलाषा ( Dil ki abhilasha )    चाह नहीं मैं चाहत बनकर प्रेमी-युगल को तड़पाऊं चाह नहीं, खिलौना बनकर टूटू और बिखर जाऊं चाह नहीं, पत्थर बनकर निर्मम,निष्ठुर कहलाऊं चाह नहीं, बंधन में पड़कर स्पंदन की प्रीत जगाऊं चाह मेरी है धड़कन बनकर रहूं सदा कुर्बान और तिरंगे में लिपट कर हो जाऊं…

  • बूंद जो सागर से जा मिली | Prem ki Kahani

    सायंकल का वक्त गोधूलि बेला में सूरज की लालिमा वातावरण में मिलकर चलने की तैयारी में है। फूलों की सुगंधों से चारों ओर का माहौल मदमस्त हो रहा है। ऐसे में पवन देव ने भी कृपा की मंद मंद मधुर हवाएं चलने लगी तो साथ ही वर्षा की टप टप करती बूंदे भी पड़ने लगी…

  • विश्व शांति दिवस | Poem on World Peace Day in Hindi

    विश्व शांति दिवस ( Vishwa shanti divas )    शुचिता के प्रसून खिलते,शांति के उपवन में तन मन पुनीत पावन, अलौकिक मृदु अहसास । पटाक्षेप सघन तम, दर्शित चहुं दिशा उजास । रग रग अथाह मंगलता, मोहक सुरभि पवन में । शुचिता के प्रसून खिलते,शांति के उपवन में ।। शमन पथ अग्रसर, क्रोध वैमनस्य उग्र…

  • ३३ प्रतिशत आरक्षण | 33 Percent Aarakshan

    ३३ प्रतिशत आरक्षण   नारी बिल पारित हुआ मोदी जी ने सम्मान दिया और पूरे भारत ने भी यह माना है नारी शक्ति को फिर से पहचाना है ।। मातृशक्ति सदा रही सहाय , घर में रहे तो खयाल रखे सबका , घर के सदस्यों,परिवार जन का फिर क्यूं उसको रहने दे असहाय।। “राष्ट्रपति मुर्मू…

  • जय भीम | Jai Bhim

    जय भीम ( Jai Bhim )    जय भीम एक शब्द नही एक वर्ण नही एक जाति या सम्प्रदाय नही और ना ही किसी वर्ग या धर्म विशेष का परिचायक स्लोगन है। जय भीम एक नई क्रांति है सोच है शोध है ताकत है हौसला है चेतना है चिन्तन व प्रेरणा है। जय भीम नये…

  • माँ पर नरेन्द्र सोनकर की ४ कविताएँ

    माॅं कभी दगा नहीं देती जन्म देती है शिक्षा-संस्कार देती है लाड़-प्यार देती है आचार-विचार देती है रूप-आकार देती है पुष्टाहार देती है घर-परिवार देती है माॅं संसार देती है दुश्चरित होने पर भी लगा लेती है ऑंचल से हमें भगा नहीं देती माॅं कभी दगा नहीं देती मालती देवी ( जिस कोख से मैंने…

  • फर्स्ट नाईट | First Night

    फर्स्ट नाईट सुनने में ही कितना रोमेंटिक शब्द लगता है। रोमांस की अनुभूति से भरा हुआ । लेकिन सभी फर्स्ट नाईट रोमांटिक नहीं होती! यह कहानी है सुनिल नाम के नौजवान की पौने 6 फुट का हष्ट पुष्ट बन्दा। एक विवाहित पुरुष दो बच्चों का पिता। एक बार देखने में तो कोई भी धोखा खा…