• एक ही रास्ता

    “मम्मी जी, मैं बहुत दिनों से आपसे मन की बात कहना चाह रही थी।” पिंकी बोली। “क्या बात है बेटा? बताओ मुझे। मुझसे बताने को भी इतना सोचना पड़ रहा है।” पिंकी की मम्मी बोली। “मम्मी जी, आप पापा से कहो कि वह मेरे लिए इधर-उधर लड़का ना ढूंढे। मुझे एक लड़का पसंद है।” “कौन…

  • अति

    6 माह पुरानी बात है। रोज की तरह जैसे ही मैं स्कूल पहुँचा तो मुझे पता चला कि आज राजू के दोनों बच्चे स्कूल नहीं आये हैं। कारण पूछने पर पता चला कि बच्चों के पिता राजू ने पंखे पर फांसी का फंदा लगाकर जान देने की कोशिश की है। उक्त घटना को सुनकर मुझे…

  • प्रतिभा पाण्डेय “प्रति” की कविताएं | Pratibha Pandey Poetry

    परछाई राधा बन जायें मुरली मधुर बजाते छवि देखी कृष्ण कीप्रेम रस भीनी मधुर मुरली बजाती,राधा नजर आयें,प्रेम का संसार अनोखा सखि रे,देखूँ कृष्ण को साक्षात पर,परछाई राधा बन जायें ।असीमानंदित अभिव्यक्ति प्रेम काकृष्ण छवि अपनी निहारें,निरीह-सी राधाकृष्ण को प्रेम से निहारें,एक के अंदर एक विराजते,प्रेम सुधि में प्रेम के सहारे।सखी रे,ना देखी ना सुनी…

  • डॉ पल्लवी सिंह ‘अनुमेहा’ की कविताएं | Dr. Pallavi Singh ‘Anumeha’ Poetry

    सच्चा प्रतिवाद तुम्हारे बेतरतीब बरताव सेमैं अभिप्रहत हुई…किन्तु रोई नहीन ही मैं चिल्लाईऔर न ही मैंने तुम्हें पुकारान कोई आरोप लगाया ….बस शनै:-शनै: तुम्हारी जिंदगी सेपृथक कर लियानिर्वाक रुखसत हो ली।तुमने कदाचित,सोचा कि फतहहासिल कर ली मुझसे…..लेकिन कालांतर मेंये मौनतुम्हारी अंतरात्मा के ड्योढ़ी परआहट देगातुम बचना भी चाहो इससेलेकिन यह मौन रुकेगा नही…क्योंकि सच्चा प्रतिवादकभी…

  • अखिल विश्व में

    अखिल विश्व में अखिल विश्व में ऐसा मौसम ,फूले और फले ।पुरवाई से पछियाओ भी ,खुलकर मिले गले।। छोटे और बड़े का कोई ,कभी न दम्भ भरे ।एक दूसरे के भावों का ,आदर हुआ करे ।मानवता का दीप क्षितिज पर ,जगमग सदा जले ।।अखिल विश्व में —– कोयल कुहके महके अमुआ ,बजे नित मल्हार ।शब्दों…

  • चॉकलेट डे

    चॉकलेट डे तेरी यादों की मिठास से, हर लम्हा गुलजार है, तेरे बिना भी ये दिल तुझसे ही सरोकार है।हर एहसास, हर ख्वाब बस तुझसे है जुड़ा,जैसे चॉकलेट की खुशबू में लिपटा दिकुप्रेम का प्यार है। आज चॉकलेट डे पर तेरा एहसास पास लगे,तेरी मुस्कान ही मेरे प्यार की मिठास लगे।हर लफ़्ज़, हर धड़कन बस…

  • जीने के लिए सोचा ही नही दर्द सम्भालने होंगे

    वृद्धाश्रम में मेरी बेटी ने महसूस किए जीवन के नाशुक्रे लम्हे आज मेरी बेटी कु. गुड़िया विजय तोरावत जैन ने अपने स्कूली सहपाठियों के साथ अकोला के वृद्धाश्रम को भेंट दे कर निराधर.. बेघर.. अपनो के हाथों लुटे गए.. कुचले गए, बुजुर्गों को थोड़े समय के लिए ही सही मगर दुनिया भर की खुशिया दी।…

  • लौटेगी कुछ दिन में

    ‘लौटेगी कुछ दिन में’ आंखों में खुशी मन में कुंभ की छाया बसी थी। लौटूंगी कुछ दिन में घर की,की व्यवस्था थी। निकल पड़ी गंगा मैया का नाम लेकर, आंखों में बस चंचलता थी। कुंभ नहाने के लिए छोड़ी उसने अपनी गली बस्ती थी। क्या मालूम था उसे की कुंभ में सांसें बडी सस्ती थी।…

  • इन्दु सिन्हा “इन्दु” की कविताएँ | Indu Sinha Poetry

    प्रेम – दो चित्र (1) “प्रेम एक याद” प्रेम क्या है ?क्या सिर्फ एक दैहिक रिश्ता ?एक छत के नीचे रहना दो अजनबियों के समान ?खोखली जंजीरों में जकड़े रिश्ते,हर पल फिसलते,मुट्ठी में दबी रेत के समान |नहीं नहीं यह तो प्रेम नहीं है ,प्रेम तो एक याद है,वो याद जो दिलों में जिंदा है,वहाँ…

  • विनोद कश्यप शर्मा की ग़ज़लें | Vinod Kashyap Sharma Poetry

    सावन तेरी बाहों में प्यारे सावनतूने दी है दस्तकअपनी प्यारी -प्यारीबादलों की बूंदों सेतेरी ठण्डी-ठण्डी हवाएं, काली घटाएंदे रही हैं मस्तीदिखती है तेरी अद्भुत मायाआ जाता है मौसम में यौवनदिल लेता है हिल्लौरेंबादलों की गरज की मीठी-मीठी आवाज़ेंहर लेती है मुझ जैसे प्रेमी का दिलमुस्कुराती है हरियाली।फूटतीं हैं वृक्षों पर कोंपलें, खिलखिलाते हैं कुसुम,गर्मी में…