• आज का रंग- गाइड के संग

    जो खुद के लिये जीता उसका एक दिन मरण पर जो…दूसरों के लिये जीता हमेशा उसका स्मरण…!!!मिडिल क्लास होने का फायदा-चाहे BMW का भाव बढ़े या AUDI का या फिर नये वर्जन का I PHONE लॉन्च हो जाये,कोई फर्क नहीं पड़ता…!!दर्जी शायर भी था- नाप लेते बोला-अपने ज्यादा हों तो आस्तीन में गुंजाइश रख दूँ…!!!जरूरी…

  • अब चली आओ

    अब चली आओ तेरी राहों में हर दिन गुजरता है,तेरी यादों में हर पल सिसकता है,दिल को समझाऊँ कैसे,अब तुम ही बताओ,अब नहीं सहा जाता, बस जल्दी से चली आओ। सपनों में आकर फिर दूर चली जाती हो,दिल की पुकार को अनसुना कर जाती हो,बेकरार दिल को अब और ना तड़पाओ,अब नहीं सहा जाता, बस…

  • सीमा पाण्डेय ‘नयन’ की ग़ज़लें | Seema Pandey Nayan Poetry

    दिल क़रार आए तो खिलेंगे गुल भी मगर ये बहार आए तो,है बेक़रार बहुत दिल क़रार आए तो। तमाम किस्से हैं बातें तमाम करनी हैंवो मेरा हम नवाज़ ग़म गुसार आए तो। यकीं है पास मेरे लौट के वो आएगा,है बदगुमान अभी ऐतिबार आए तो। असीर उसको बना लूंगी फिर मैं जुल्फों का,कभी जो हाथ…

  • टूटते हुए परिवार-बेघर स्त्रियां

    टूटते हुए परिवार-बेघर स्त्रियां टूटते हुए परिवार की कहानी बहुत दर्दनाक है,बेघर स्त्रियों की जिंदगी बहुत मुश्किल है।वह अपने परिवार से दूर हो जाती है,और अपने बच्चों को अकेला छोड़ जाती है।उसकी जिंदगी में दर्द और पीड़ा होती है। बेघर स्त्रियों की जिंदगी बहुत संघर्षपूर्ण है,वह अपने परिवार के लिए संघर्ष करती है।लेकिन उसके संघर्ष…

  • सशक्त मैं समय हूँ

    सशक्त मैं समय हूँ वस्त्र मैं हूँ – अस्त्र मैं हूँ,शस्त्रों में शशक्त मैं हूं। धड़ कटे प्रलय मचे जो मैं रुकूं ना हो सके ये,समय मैं, समर्थ मैं जो रुकूं मैं ना हो सके ये। हो जाए संभव अगर यह बोलूं ना समय मैं खुदको,खंजरों-कटारों से जो सर्व शक्तिमानों से। बेड़ियों से जकड़ लो,तुम…

  • स्वाभिमानी लड़का | लघु कथा

    अरूण स्वाभिमानी लड़का था। वह कक्षा‌ में सदैव प्रथम आता था। सब पूछते ” अरूण तुम घर में कितने घंटेपढ़ते हो आखिर रोज ?वह बोलता ” मुझे घर पर समय ही कहां मिलता है।दो गायें और एक भैंस है। उनको सानी पानी देना और फिर घूम घूम कर दूध बेचना आदि में व्यस्त हो जाता…

  • भविष्य से एक पत्र

    बसंती दीपशिखा जब अपनी लेखनी में खोई हुई थीं, तभी दरवाज़े पर एक हल्की सी दस्तक हुई। उन्होंने दरवाजा खोला तो सामने कोई नहीं था। लेकिन नीचे ज़मीन पर एक सुनहरे रंग का लिफाफा रखा था, जिस पर लिखा था—“भविष्य से एक पत्र” उन्होंने कौतूहल से लिफाफा खोला और पत्र पढ़ने लगीं— प्रिय बसंती “दीपशिखा”,…

  • शिव पथ

    शिव पथ शिव पथ अतृप्ति का ऐसासुखद मार्ग है जिसमेंअभोग ,त्याग , आस्थाआदि सहायक होते है ।रोटी खाई, भूख बुझी नहीं ।पानी पिया, प्यास बुझी नहीं ।धन का अर्जन किया ,लालसा बुझी नहीं आदिक्योंकि इस क्षणिक तृप्तिके पीछे अतृप्ति काविशाल सुखद साम्राज्य हैजिससे प्यास बुझे कैसे?यह एक अबूझ पहेली है ।पदार्थ का भोग तृप्तिका आभास…

  • दिकु, अब लौट भी आओ

    दिकु, अब लौट भी आओ तू दूर गई तो साँसें भी रूठ गई हैं,आँखों की दुनिया वीरान होकर छूट गई हैं।तेरे बिना ये दिल बेज़ार सा है,हर लम्हा मेरा जैसे अंधकार सा है। हवा से कहूँ या बादलों से बोलूँ,तेरी यादों का किस्सा, मैं किस किस से तोलूँ?राहों में बैठा तेरा इंतज़ार करता हूँ,तू लौट…

  • समझदारी

    रात होने को थी। करीब 8:00 के आस पास का वक्त था। रजनीश अपने कमरे में बैठकर सुबह का अखबार पढ़ रहा था। (रजनीश को सुबह ऑफिस के लिए जल्दी निकलना होता था, तो अखबार पढ़ने का वक्त ही नहीं मिल पाता था) अचानक रजनीश को अपनी पत्नी ममता और माता शकुंतला (70 वर्षीय) की…