ईद का चांद | Eid ka Chand
ईद का चांद ( Eid ka chand ) देखते ही तुझको , तुझसे प्यार हो गया ऐसा लगा कि जैसे चमत्कार हो गया जन्नत की हूर सी लगी उतरी है चांद सी समझा कि ईद-ए-चांद का दीदार हो गया जुल्फों के बीच खिलखिलाने को क्या कहूं…
ईद का चांद ( Eid ka chand ) देखते ही तुझको , तुझसे प्यार हो गया ऐसा लगा कि जैसे चमत्कार हो गया जन्नत की हूर सी लगी उतरी है चांद सी समझा कि ईद-ए-चांद का दीदार हो गया जुल्फों के बीच खिलखिलाने को क्या कहूं…
पेड़ लगाओ ( Ped lagao ) पेड़ लगाओ मन भाएगा, नाम तुम्हारा जग गाएगा। नित आंगन चिड़ियां आयेगी, कलरव की वह धुन गायेगी। हरियाली धरती पर छाए, जीव- जन्तु के मन को भाए। घन आयेंगे नीलगगन में, खुशियां बरसेंगे तन- मन…
टिप-टिप करती बूंदे ( Tip-tip karti boonde ) आसमान से बरस रहा है आज झमाझम पानी, झूमो नाचों ख़ुशी मनाओ मिलकर दिल जानी। टिप टिप करती बूॅंदे लगती है सभी को सुहानी, चलों सोनू मोनू टीना बीना करें सभी मनमानी।। जूता-चप्पल कोई ना पहनो भागो दौड़ो सरपट, उछल कूद का आनन्द लो आओ सब…
बारिश के नाले ( Baarish ke naale ) बहुत जोर की ऐसी गर्मी पड़ी, हालत ख़राब फिर सबकी हुई। कुलर एवं पंखो ने दिया जवाब, देखें सभी मानसून के ख़्वाब।। रोड़ और नाले बन रहें थें नए, गाँव-शहर में काम चल रहे नए। अभी पूरा नही हुआ था यें काम, वर्षा ने शुरु किया…
कोई पेड़ प्यासा न मरे! ( Koi ped pyasa na mare ) भटके लोगों को रास्ते पर लाना पड़ता है, वनस्पतियों को जेवर पहनाना पड़ता है। बिना फूल के बहार आ ही नहीं सकती, तितलियों को भी बाग में लाना पड़ता है। कोई पेड़ प्यासा न मरे,समझो जगवालों, बादलों के हाथ मेंहदी लगाना पड़ता…
नज़र चुरा के सभी आज कल निकलते हैं ( Nazar chura ke sabhi aaj kal nikalte hain ) नज़र चुरा के सभी आज कल निकलते हैं न जाने किसलिए इक दूसरे से जलते हैं ऐ काश वक़्त पे हर काम कर लिया होता ये सोच सोच के हाथों को अपने मलते हैं जो सारे…
मिलता किसी भी मोड़ पे क्यों राहबर नहीं ( Milta kisi bhi mod pe kyon rehbar nahin ) मिलता किसी भी मोड़ पे क्यों राहबर नहीं इस शहरे-कामयाब की आसां डगर नहीं हर इक सफ़र में होता था जो हमसफ़र कभी वो भी तो आस-पास में आता नज़र नहीं। माना कि मुद्दतें हुईं बिछड़े…
ग़लत को ग़लत जो कोई भी कहेगा ( Galat ko galat jo bhi kahega ) ग़लत को ग़लत जो कोई भी कहेगा , यकीं मानिए मुश्किलों में फँसेगा । ग़लत के लिए साथ देंगे हज़ारों , सही बोलने पर अकेला रहेगा । ये दुनिया अजब चाल से चल रही है , हरिक आदमी एक…
वफ़ा का मेरी आज कुछ तो सिला दो ( Wafa ki meri aaj kuch to sila do ) वफ़ा का मेरी आज कुछ तो सिला दो मुझे छू के जानम मुकम्मल बना दो हज़ारों दिये साथ मिलके जलेंगे झलक एक अपनी अगर तुम दिखा दो नहीं बात करते सनम आजकल तुम हुई क्या ख़ता मेरी…
दिल मचलता है ( Dil machalta hai ) हमने तुमको तो कभी दिल से निकाला ही नहीं और तुमने तो कभी हमको पुकारा ही नहीं याद आती है तसव्वुर में ही जी लेते हैं तुमसे मिलने का यहाँ कोई बहाना ही नहीं ग़म की बदली तो बहरहाल नहीं छँटने की और मेरे पास में…