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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Faraz ki Ghazal
    ग़ज़ल

    सरफ़राज़ हुसैन फ़राज़ की ग़ज़लें | Sarfraz Husain Faraz Poetry

    ByAdmin February 5, 2025June 7, 2025

    नज़्में कहा करूं न मैं ग़ज़लें कहा करूं नज़्में कहा करूं न मैं ग़ज़लें कहा करूं।वो चाहते हैं उन पे क़स़ीदे पढ़ा करूं। उन पर कहां ये ज़ोर वो मेरी सुनें कभी।मुझको ये ह़ुक्म है के मैं उनकी सुना करूं। आंखों की आर्ज़ू है के देखूं जहांन को।दिल चाहता है उनके ही दर पर रहा…

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  • प्रकृति हूं मैं कदर करो
    कविताएँ

    प्रकृति हूं मैं कदर करो

    ByAdmin February 5, 2025February 5, 2025

    प्रकृति हूं मैं कदर करो जल मैं, अग्नि मैं, वायु मैं ।वृक्ष,जीव,प्राणी, अचल हूं मैं ।। स्वर्ग का द्वितीय रूप मैं ।ईश्वर का महा चमत्कार मैं।। मनमोहक सा दिखता हूं ।मनमोहित मैं करता हूं ।। जिधर देखो , उधर हूं मैं ।हर तरफ हर जगह हूं मैं ।। चंद्र मैं , सूर्य मैं , भू…

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  • 55वाँ मासिक ऑनलाइन कवि सम्मेलन एवं मुशायरा
    साहित्यिक गतिविधि

    55वाँ मासिक ऑनलाइन कवि सम्मेलन एवं मुशायरा

    ByAdmin February 4, 2025February 4, 2025

    तिरंगा काव्य मंच के 55वें मासिक ऑनलाइन कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन डॉ कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड,(कोलकाता) और वरिष्ठ शायर श्री विनय सागर जायसवाल(बरेली) की अध्यक्षता में संचालिका द्वय विनीता निर्झर एवं डॉ कामिनी व्यास रावल के द्वारा किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सर्वप्रथम चंचल हरेंद्र वशिष्ट द्वारा विद्या दायिनी माँ सरस्वती की वंदना/ईश…

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  • Jeevan Basant
    कविताएँ

    मस्त मद में बसन्त-सन्त है सखी

    ByAdmin February 4, 2025February 4, 2025

    मस्त मद में बसन्त-सन्त है सखी आ रहा बसंत बसंतपुर से सखी, मन मस्त जोशीले कसक में सखी, पुराने गमगीन पत्तों का यूँ गिरना! नये सुकून की खुशली है सखी। मधुर मधुर हवा मंद-मंद ठण्डक, गुलाबी मौसम, बॉंधती गण्डक, लुभावन दिन और शीतल रात सखी, नये सुकून की उल्लास है सखी । होली सी रंग-बिरंगी…

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  • हालाते जिंदगी
    आलेख

    ये जिंदगी

    ByAdmin February 4, 2025February 4, 2025

    यह फ़िल्म आप देख रहे हो न.. राजकपूर जी की मौत.. मौत के बाद मातम मनाने वालो का मेला.. एक से बढ़कर एक फिल्मी हस्तियां.. सब लोग शोकाकुल है.. कपूर परिवार को ढांढस बंधा रहे है.. दुनिया गमगीन है। महान सितारा अस्त हो गया है.. वही आम दृश्य जो कि हम सब अक्सर देखते है…..

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  • डॉ. आलोक रंजन कुमार
    कहानियां

    डॉ. आलोक रंजन कुमार की कविताएँ | Dr. Alok Ranjan Kumar Poetry

    ByAdmin February 4, 2025June 15, 2025

    पिता : भविष्य का तक़दीर है माता यदि ऑक्सीजन है,तो पिता हाइड्रोजन है।दोनों के मिलन से ही,शरीर में भरता जल है। माता यदि आज है तो ,पिता आज और कल है।पिता अनन्त आकाश हैपिता भरा पूरा बादल है । पिता अतीत व वर्तमान भी हैभविष्य भी है,उसका फल है।पिता सर का साया भी है ,बाहर…

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  • दुनिया के
    ग़ज़ल

    दुनिया के

    ByAdmin February 4, 2025February 4, 2025

    दुनिया के भाग फूटे पड़े हैं दुनिया के।पांव उखड़े पड़े हैं दुनिया के। खेल बिगड़े पड़े हैं दुनिया के।दाम उतरे पड़े हैं दुनिया के। दौर कैसा है यह तरक़्क़ी का।काम सिमटे पड़े हैं दुनिया के। जिस तरफ़ देखिए धमाके हैं।ह़ाल बिगड़े पड़े हैं दुनिया के। बन्दिशों के अ़जब झमेले हैं।हाथ जकड़े पड़े हैं दुनिया के।…

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  • भारतीय काव्य मंच
    साहित्यिक गतिविधि

    बसंत पंचमी के अवसर पर अखिल भारतीय काव्य मंच के सौजन्य से कवि सम्मेलन का आयोजन संपन्न

    ByAdmin February 4, 2025February 4, 2025

    वसंत पंचमी के शुभ अवसर पर अखिल भारतीय काव्य मंच मुंबई संस्था के सौजन्य से एक शानदार ऑनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शामिल होने वाले कवियों में वाराणसी की लोकप्रिय कवयित्री शिवांगी सिंह “कृष्णाबावरी” और गाजियाबाद की लोकप्रिय कवयित्री प्रेरणा सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं। झारखंड से मीनाक्षी…

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  • Abha Gupta Poetry
    कविताएँ

    आभा गुप्ता की कविताएं | Abha Gupta Poetry

    ByAdmin February 3, 2025August 27, 2025

    श्री गणेश श्री गणेश, प्रथमेश, गजानन,करूँ तुम्हारे चरण मे वंदन,करते दूर दुखियों के क्रंदन,तन, मन, धन हम करें समर्पन, हे शिव पुत्र, पार्वती दुलारे,धन्य नयन दर्शन से तिहारे,जब तेरा हम नाम पुकारें,कट जाऐ सब विघ्न हमारे,कर जोड़ नमन कर जोड़ नमनचरणों में नमन करती हूँ,श्री गणेश, प्रथमेश, गजानन,करूँ तुम्हारे चरण मे वंदन, मूसक वाहन मे…

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  • मां शारदे
    कविताएँ

    वंदन माता शारदे

    ByAdmin February 3, 2025February 3, 2025

    वंदन माता शारदे प्रफुल्ल ज्ञानरूपिणी, प्रवीण मातु शारदे।विधायिनी सुवादिनी, सरस्वती उबार दे।। निरंजना प्रभामयी, महाश्रया सुवासिनी।सुपूजितां महाभुजा, मनोरमा सुभाषिनी।।करें प्रणाम श्रीप्रदा, प्रबुद्ध भारती सदा।उतारते प्रियंवदा, सुजान आरती सदा।।सुबोध माँ प्रशासनी, सुभक्ति माँ अपार दे। अकूत शास्त्ररूपिणी, करो कृपा महाफला।अनंत प्रेम दायिनी, सुहासिनी महाबला।।नमो दयालु शारदे, स्वयंप्रभा दिवाकरी।प्रशस्त मातु पंथ भी,सुखारिणी सु-अंबरी।।पयोधि ज्ञान दायिनी, नमामि माँ…

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