• तुलसी | Tulsi par kavita

    तुलसी ( Tulsi )   हरी पूजन तुलसी बिना रहता सदा अधूरा हैl विष्णु आशीष से पूजित घर-घर तुलसी चौरा है l वृंदा के पतिव्रत के आगे नारायण भी हारे है l शालिग्राम से ब्याह रचाया तुलसी मान बढ़ाया हैl भोग बिना तुलसी के हरि को कब भाया हैंl नारी की सतीत्व ने हरि को…

  • नाराज मंजिलें | Poem naraz manzilen

    नाराज मंजिलें ( Naraz manzilen )   मंजिल नाराज़ हैं, और रास्ते गुमनाम से हैं जिन्दगी तू ही बता, हम यहां किस काम से हैं। दिखाने लगें है वो लोग भी आईना नाम जिनका मेरे नाम से है । संभलती नहीं दुश्वारियां मुकद्दर की और तू यँहा कितने आराम से हैं। तेरी मेहरबानी नहीं तो…

  • आया क्रिसमस का त्योहार | Poem on Christmas in Hindi

    आया क्रिसमस का त्योहार ( Aaya christmas ka tyohar )   आया क्रिसमस का त्योंहार सब खुशियाँ मनाओ अपार। आऐ प्रभु यीशु अपने द्वार सब खुशियाँ मनाओ हजार।।…२ एक यहूदी बढ़ई के घर जन्में प्रभु यीशु ।।…२ बेथलेहेम मरियम के गर्भ जन्में है प्रभु यीशु। ईसा से बनें यीशु मसीहा सबके कहलाएं।।…२ 12 वर्ष उम्र…

  • कलयुग | Kalyug par Bhojpuri Kavita

    ” कलयुग “ ( Kalyug )   धधक-धधक अब धधक रहल बा चिंगारी अब भड़क रहल बा लोगन में बा फुटल गुस्सा हर जान अब तड़प रहल बा कहीं आवाज अउर कहीं धुलाई धरती पे अब लालिमा छाइल जान प्यारा हऽ सबके भाई फिर काहे बा गुस्सा आइल कहीं ना बा कवनो लेखा जोखा भाई…

  • धन्य हैं किसान | Poem in Hindi on farmer

    धन्य हैं ” किसान “ ( Dhanya hai kisan)    धरती के पालक मित्र किसान तुम से सुसज्जित खेत खलियान गांव में ही बसते हैं जग के प्राण, तुमको हम करे हृदय से प्रणाम ।। गांव की धरती होती उपजाऊ, हीरा, मोती उगले मिटी भी हमारी जब पसीना बहाएं हमारे किसान तब मिलती सबको अन्न…

  • पंचतत्व में मिल जाना है | Panchtatva par kavita

     पंचतत्व में मिल जाना है ( Panchtatva mein mil jana hai )   पंचतत्वों से बना यह हमारा शरीर, दानव- मानव चाहें गरीब- अमीर। इनसे बना सृष्टि का प्रत्येक पदार्थ, आकाश वायु अग्नि पृथ्वी व नीर।।   सृष्टि के माने गए यह पंचमहाभूत, साफ़ स्वच्छ रखना सबको जरुर। बंद मुट्ठी आए खुल्ली मुट्ठी जाएंगे, एक…

  • कबड्डी | Bhojpuri bal kavita kabaddi

    ” कबड्डी ” (ल‌इकन के कविता)   आव कबड्डी खेली हम, रेखा के एने ठॆली हम, दऊड़-दऊड़ के पकड़ी हम, एने-ओने जकडी हम शोर मचाई दऊड़ल जाई उठा पटक हूडदूग मचाई कबो जियाई कबो मुआई जिया मुआ के गोल बनाई माटी में हम खूब लोटाई कबड्डी-कबड्डी आव चिल्लाई     कवि – उदय शंकर “प्रसाद” पूर्व…

  • किसान | Kisan par Kavita

    किसान! ( Kisaan ) ( 3 ) हर तरफ होता किसान हि किसान है फिर भी किसान हि क्यों बेपहचान है गर्मी हो या ठंडी गुजर रही सब खेतों में हर मौसम में जूझ रहा वही नादान है दाना दाना चुगकर करता जीवन यापन तब हि हर महलों में पहुँच रहा राशन है जीवन प्यासा…

  • माँ की ममता | Maa ki mamta poem

    माँ की ममता ( Maa ki mamta ) ( 4 )  माँ की ममता दिव्य है,माँ से है पहचान। माँ की कृपा-कटाक्ष से,बनता पुत्र महान।।1।। ममता के ऑंचल तले, मिलती ठंडी छाँव। जब तक माँ का साथ है, नहीं जलेगा पाँव।।2।। धरती की भगवान है, माँ का रूप अनूप। मातृ-चरण में स्वर्ग है, देवी का…

  • स्कूल | School par Bhojpuri kavita

    स्कूल ( School )    ज्ञान के अंगना में आवऽ, फिरु से हम पलि बढ़ी कहीं हिम्मत, कहीं बेहिम्मत, मिल के हम इतिहास गढ़ी कबो सर जी के आहट से चारों ओर सननाहट से ज्ञान से अजोर करी आवऽ फिर हम जोर करी कबो कबड्डी, कबो क्लास कबो झगड़े के प्रयास हर बात में रूठा…