• मत करो इसरार जी | Ishrar par kavita

    मत करो इसरार जी ( Mat karo ishrar ji )   हर किसी को चाहिए, अधिकार ही अधिकार जी। कोई भी करता नहीं , कर्तव्यहित व्यवहार जी।। बिन दिए मिलता नहीं है, बात इतनी जान लो, प्यार गर पाना है तो, देना पड़ेगा प्यार जी।। दूसरो को दोगे इज्जत, होगी तब हासिल तुम्हें, कब भला…

  • अहंकार | Ahankaar par kavita

    अहंकार ( Ahankaar )    किस बात का गुरूर,क्यों नर मगरूर तू। क्या तुमने कर दिया, क्यों नशे में चूर तू। गर्व ही करना कर, वतन की शान पर। बोल मीठे बोल प्यारे, हो जा मशहूर तू। मत कर अभिमान, नशे में होकर चूर। चंद सांसों का खेल है, जी ले भरपूर तू। हम हैं…

  • औघड़ दानी | Aughad dani par kavita

    औघड़ दानी ( Aughad dani )   जब कोई ना हो सहारा रिश्तो के बंधन से हारा फिरता जब तू मारा मारा देता एक ही साथ तुम्हारा औघड़ दानी बाबा प्यारा जिसने भवसागर को तारा मिले नदी को जैसे किनारा वह हरता है संकट सारा वह जाने कष्ट है हमारा करता जीवन में उजियारा जो…

  • हिंदुस्तान | Hindustan par kavita

    हिंदुस्तान! ( Hindustan )   मोहब्बत की जमीं का नाम है हिंदुस्तान, अनेकता में एकता का नाम है हिंदुस्तान। अखिल विश्व को जो मानता अपना कुटुंब, उस वसुधैव कुटुंबकम का नाम है हिंदुस्तान। जिस पावन धरती पर राम वन गमन किये, उस त्याग – तपस्या का नाम है हिंदुस्तान। देश की आजादी में चूमें फांसी…

  • कुशल राजनीतिज्ञ थे वाजपेयी ‌| Vajpayee ji par kavita

    कुशल राजनीतिज्ञ थे वाजपेयी ‌ ( Kushal rajnitigya the Vajpayee )   अपनें आदर्शों से बनाई जिन्होंने ख़ास पहचान, ऐसे कुशल राजनीतिज्ञ‌ थें वें प्रधानमंत्री महान। अटल जिनके इरादें एवं अटल बिहारी था नाम, ढ़ेर कविताएं लिखी इन्होंने बरसे‌ जिससे ज्ञान।।   वें प्रेरणादायक ऐसी रचनाएं हुई प्रसिद्ध संसार, ज्ञान ध्यान वें करते रोज़ाना सबसे…

  • अपनत्व दिखावा तो नहीं | Apnatva par kavita

    अपनत्व दिखावा तो नहीं ( Apnatva dikhawa to nahi )   अपनापन अनमोल भाई कोई दिखावा तो नहीं। अपनों से परिवार सुखी कोई छलावा तो नहीं। अपनो की महफिल में महके खिलते चमन दिलों के। दिखावे की दुनिया में मिलते कदम कदम पे धोखे। घट घट प्रेम सरिताएं बहती पावन प्रेम की रसधार। सुख आनंद…

  • हृदयांगन की साहित्यिक यात्रा कानपुर होकर पहुंची हरिद्वार

    हृदयांगन की साहित्यिक यात्रा कानपुर होकर पहुंची हरिद्वार   साहित्य,सामाजिक,सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक राष्ट्रीय संस्था हृदयांगन परिवार साहित्यिक यात्रा अनवरत मुंबई से चलकर उन्नाव लखनऊ कानपुर होते हुए देहरादून की पावन नगरी हरिद्वार पहुंची। संस्था के संस्थापक अध्यक्ष विधु भूषण त्रिवेदी विद्यावाचस्पति जी ने राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी विनय शर्मा दीप को बताया। 11 दिवसीय हृदयांगन‌ संस्था…

  • ईमानदारी | Imandari par kavita

    ईमानदारी ( Imandari )    ईमानदारी बहुत दुखी है झूठ का बोलबाला है लूट खसोट निरंतर जारी निकल रहा दिवाला है   दीन ईमान की बातें सारी जनभाषण में बह जाती है छल कपट का राज हो रहा ईमानदारी दब जाती है   मेहनत मजदूरी जो करते सदा चलते सीना तान अटल रहे सच्चाई पर…

  • घर की देवी | Ghar ki devi par kavita

    घर की देवी ( Ghar ki devi )   ज्ञान के आभूषण से अलंकृत महत्वकांक्षी,आत्मसम्मान से भरी जीवन के संघर्षो से नही हारी सशक्त हूं तृष्णाओं से परे हूं ।।   ओज की ज्वाला जलाकर मैं मर्यादा के गहनों से ही अपनी नित देह को सजाती हूं स्त्री हूं रिश्ते सभी निभाती हूं।।   तपकर…

  • सुपात्र | Supatra par chhand

    सुपात्र ( Supatra par chhand ) सद्गुणों से भरपूर, कला से हो मशहूर। सुपात्र का हो सम्मान, कदम बढ़ाइए। विनय भाव संस्कार, दूर हो सारे विकार। जग बांटे प्रेम प्यार, उनको बुलाइए। दया धर्म दानशील, शुभ कर्म हो सुशील। गुणी विद्वान मनुज, संग में बिठाइए। कर्मवीर रणधीर, पुरुषार्थी नर वीर। सेवाभावी जान कोई, सम्मान दिलाइए।…