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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Shanti doot par kavita
    कविताएँ

    शान्ति दूत | Shanti doot par kavita

    ByAdmin November 22, 2022November 23, 2022

    शान्ति दूत ( Shanti doot )   हम है ऐसे शान्ति के दूत, माॅं भारती के सच्चे सपूत। वतन के लिए मिट जाएंगे, क्योंकि यही हमारा वजूद।।   सीमा पर करते रखवाली, सेवा निष्ठा के हम पुजारी। देश भक्त निड़र व साहसी, हर परिस्थितियों के प्रहरी।।   जीना- मरना इसी के संग, बहादूर एवं सैनिक…

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  • Insan par kavita
    कविताएँ

    तुम कैसा इंसान हो | Insan par kavita

    ByAdmin November 22, 2022

    तुम कैसा इंसान हो ( Tum kaisa insan ho )    बांट बांट कर धरती सागर बांटते आसमान हो, तुम कैसा इंसान हो! जाति धर्म में रंग बटा है अब बांटते इमान हो, पशु भी बांटा पक्षी बांटा क्यूं बांटते श्मशान हो, तुम कैसा इंसान हो! भाषा बोली पुस्तक बांटा बांट रखे परिधान हो प्यार…

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  • Jaade ki dhoop par kavita
    कविताएँ

    जाड़े की धूप | Jaade ki dhoop par kavita

    ByAdmin November 22, 2022

    जाड़े की धूप ( Jaade ki dhoop )    बादलों की झुरमुट से झांकता सूरज मानों खेलता नन्हा ओज से भरा बालक झांक रहा हो, चमकता तेज सुनहरा बदन रक्त लालिमायुक्त धीरे धीरे मानव दुनिया में कदम रख एक टक ताक रहा हो, मानव में कुलबुलाहट शुरू हो गई आहट पाते ही सूरज का, किसी…

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  • Prabhu ki prathna Hindi mein
    कविताएँ

    मेरे प्रभु | Prabhu ki prathna Hindi mein

    ByAdmin November 22, 2022November 22, 2022

    मेरे प्रभु ( Mere prabhu )    आपके चरणों में थोड़ी जगह मुझे दे देना प्रभु, जीवनभर संग निभाना आप हमारे प्यारे प्रभु। सद्मार्ग मुझको दिखाना जीवन पथ पर हमेशा, कठिनाई एवं समस्याओं से उभारना मेरे प्रभु।।   ज़िन्दग़ी मेरी कठिन हो तो नैया पार लगा देना, भवसागर से पार प्रभु मुझको आप करा देना।…

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  • Bacchon ki kavita
    कविताएँ

    बहादुर चिड़िया | Bacchon ki kavita

    ByAdmin November 22, 2022November 22, 2022

    बहादुर चिड़िया ( Bahadur chidiya )      एक बार लगी जंगल मे आग, भाग गये पशु-पक्षी और बाघ। बैठी थी अकेंली चिड़िया उस पेड़, छोड़कर नही जा रहीं थी वह पेड़।।   चिल्ला रहा था आग-आग बंदर, बोला छोड़कर चलो अब जंगल। बोली चिड़िया नही चलूंगी में आज, में तो रहूंगी यही इस पेड़…

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  • WhatsApp par kavita
    कविताएँ

    व्हाट्सएप का संसार | WhatsApp par kavita

    ByAdmin November 22, 2022November 26, 2022

    व्हाट्सएप का संसार  ( WhatsApp ka sansar )    आज मैं व्हाट्सएप की गलियों में घूम आया , फिर सोचा मैंने वहां क्यों समय गवाया। मैसज देखकर जब अपने अंदाज से मोबाइल में कुछ समूह को मैंने फुलफिल भरा भरा सा पाया, कुछ समूह का आनंद लिया,बाते करके मैंने बहा कुछ में जाकर टांग अड़ाया,उत्तर…

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  • Papa par kavita
    कविताएँ

    पिता की स्नेहाशीष पाती | Papa par kavita

    ByAdmin November 21, 2022

    पिता की स्नेहाशीष पाती ( श्रृद्धांजलि )  एक स्नेहाशीष चिट्ठी को तरसता मेरा मन आज बरबस दिवंगत पिता को याद करता है दस बरस पहले अनायास जो चले गए थे तुम आज भी आप की चिट्ठी की राह तकती हूँ कईं पत्रों को भेजकर कुशल पूछा करते थे अक्सर बेटी को नेह देने का तरीका…

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  • अन्तर्राष्ट्रीय साहित्य संगम पर लगा देश विदेश के चुनिंदा साहित्यकारों का मेला
    साहित्यिक गतिविधि

    अन्तर्राष्ट्रीय साहित्य संगम पर लगा देश विदेश के चुनिंदा साहित्यकारों का मेला

    ByAdmin November 21, 2022November 21, 2022

    आद० श्री मुन्नालाल प्रसाद जी के सयोजन में धमाकेदार , सफल एवं रंगारंग काव्यांजलि सम्पन्न हुई हिन्दी साहित्य में छायावाद के प्रवर्तक बहुमुखी प्रतिभा संपन्न कलाकार जयशंकर प्रसाद एक ऐसे महाकवि थे जिन्होंने अपनी रचनाओं में भारत के गौरवशाली इतिहास एवं संस्कृति के संदर्भ में वर्तमान की व्याख्या की है। इनके साहित्य के मूल में…

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  • हमको नशा है | Kavita in Hindi on desh bhakti
    कविताएँ

    हमको नशा है | Kavita in Hindi on desh bhakti

    ByAdmin November 21, 2022November 21, 2022

    हमको नशा है ( Humko nasha hai )      हमको नशा है अपने वतन के ध्वज का, भारत के प्यारे अपने इस संविधान का। राष्ट्रीय-गीत और हमारे राष्ट्रीय-गान का, हिन्द का गौरव इस हिंदी राजभाषा का।।   राष्ट्रीय पक्षी मोर व राष्ट्रीय पशु बाघ का, खेल में हाकी व राष्ट्रीय मुद्रा रुपया का। चिन्ह…

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  • Kavita swarg narak ka dwar
    कविताएँ

    स्वर्ग नर्क का द्वार यही है | Kavita swarg narak ka dwar

    ByAdmin November 21, 2022

    स्वर्ग नर्क का द्वार यही है ( Swarg narak ka dwar yahi hai )   आज सभी की ज़िंदगी थोड़ी अस्त व्यस्त है, लेकिन हाॅं यह फिरभी बड़ी जबरदस्त सी है। इसको जबरदस्ती से कोई नही जीना यारों, स्वयं को जबरदस्त बनाकर इसको जीना है।।   सोच समझकर ये अपनें क़दम आगे रखना, अपनें कर्म…

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