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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Jeevan par Hindi kavita
    कविताएँ

    जीवन की परिभाषा | Jeevan par Hindi kavita

    ByAdmin November 25, 2022

    जीवन की परिभाषा ( Jeevan ki paribhasha )   हां! हम हर बात को बोलते है डंके की चोट, नही है हमारे मन में किसी प्रकार की खोट। पीठ- पीछे बोलें ऐसी आदतें नही है हमारी, चाहें रुठ जाऐ दुनियां अथवा बांटे हमें नोट।।   सही को सही एवं गलत को गलत है कहते, समझने…

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  • Geet in Hindi
    कविताएँ

    क्या चाहती हो सुन्दर नारी | Geet in Hindi

    ByAdmin November 25, 2022November 25, 2022

    क्या चाहती हो सुन्दर नारी ( Kya chahti ho sundar nari )   क्या चाहती हो सुंदर नारी विश्वास प्रेम से भरी हुई तुम राग प्रीत की मूरत हो जग को जीवन देने वाली क्यूं पीले पात सुखी आशा दामन में अपने रखती हो क्यूं जुगनू सी धीमे चलकर हर पल आगे तुम बढ़तीहो क्यूँ…

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  • Darpan par kavita
    कविताएँ

    दर्पण कभी झूठ नही बोलता | Darpan par kavita

    ByAdmin November 24, 2022November 24, 2022

     दर्पण कभी झूठ नही बोलता ( Darpan kabhi jhooth nahi bolta )    दर्पण कभी कोई झूठ नही बोलता, पक्षपात यें किसी से भी ना करता। जैसा है वैसा यें प्रतिबिम्ब दिखाता, जो इसमें देखता ‌इठलाता-शर्माता।।   सामनें आकर सभी इसके सॅंवरता, बहुत ही गहरा इससे सबका नाता। अनेंको चेहरे यह बनाकर दिखाता, दर्पण कभी…

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  • Kavita Jada aaya
    कविताएँ

    जाड़ा आया | Kavita Jada aaya

    ByAdmin November 24, 2022November 24, 2022

    जाड़ा आया  ( Jada aaya )   आया जाड़ा की ऋतु प्यारा बदल गया है मौसम सारा फसल पाकि गय कटि गय धान ढोंइ अनाज लइ जाय किसान पड़य शीत खूब ठरै बयार कबहूं पाला कबहुं तुषार शीत ठरै कापैं पशु पक्षी धूप लगै तब तन को अच्छी जाड़े की हैं बात निराली धूप लगे…

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  • Kavita mere piya phase hain pradesh
    कविताएँ

    मेरे पिया फंसे है परदेश | Kavita mere piya phase hain pradesh

    ByAdmin November 24, 2022November 24, 2022

    मेरे पिया फंसे है परदेश ( Mere piya phase hain pradesh )      मेरे पिया फंसे है परदेश, वहां से दिया है मुझे निर्देश। बाहर का खाना नही खाना है, भीड़ में बिलकुल नही जाना है।।   कहा है रहना तुम निवास, और रखना प्रभु पर विश्वास। धीरज बिलकुल नही खोना है, सफाई का…

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  • Haal-e-Dil Shayari
    शेरो-शायरी

    हाले दिल | Haal-e-Dil Shayari

    ByAdmin November 24, 2022November 24, 2022

    हाले दिल ( Haal-e-Dil )      याद परदेश में आता परिवार है दिल मिलने को बहुत यार लाचार है   हाल दिल का सुनाऊँ किसे मैं यहाँ इस नगर में नहीं कोई भी यार है   ज़िंदगी भर ख़ुदा उस हंसी से मिला जिस हंसी का हुआ आज दीदार है   मुफ़लिसी हूँ मिलाया…

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  • साहित्यकार श्री सुधाकर श्रीवास्तव का कन्हैयालाल सहल पुरस्कार से सम्मान
    साहित्यिक गतिविधि

    साहित्यकार श्री सुधाकर श्रीवास्तव का कन्हैयालाल सहल पुरस्कार से सम्मान

    ByAdmin November 23, 2022

    स्व. कन्हैयालाल सहल की पुण्यतिथि पर कवि, लेखक व साहित्यकार, षिक्षक श्री सुधाकर श्रीवास्तव का कन्हैयालाल सहल पुरस्कार से सम्मान ।  अलायंस क्लब नवलगढ़ चेतना साहित्यिक संस्था राष्ट्रीय संस्था शब्दाक्षर के संयुक्त तत्वावधान में जांगिड अस्पताल परिसर में राजस्थान प्रसिद्ध साहित्यकार स्व कन्हैयालाल सहल नवलगढ़ निवासी की पुण्यतिथि पर उनको भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम…

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  • Ooni kapda par kavita
    कविताएँ

    ऊन का चोला | Ooni kapda par kavita

    ByAdmin November 23, 2022

    ऊन का चोला ( Oon ka chola)      यह बदन है सभी का भैया मिट्टी का ढेला, ना जानें कब हो जाऍं किसका फिसलना। शर्म ना कर प्राणी पहन ले ऊन का चोला, बिठूर रहा है बदन जरा संभलकर चलना।।   पहनकर घूमना फिर चलना चाहें अकेला, हॅंसना-हॅंसाना पहनकर फिर तू उछलना। न करना…

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  • Lekhni par kavita
    कविताएँ

    हृदय की पीर लेखनी | Lekhni par kavita

    ByAdmin November 23, 2022

    हृदय की पीर लेखनी ( Hrdaya ki peer lekhni )    जब हृदय की पीर कागज पे भावों से बहकर आती है कलम की धार बने कविता दिल को बहुत लुभाती है   ओज प्रेम करुणा बरसती शब्द सुरीले प्यारे-प्यारे कुदरत करे श्रंगार अगणित कलम के बहते धारे   देशभक्ति राष्ट्रप्रेम की अलख जगाती रही…

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  • Bhagwan Jagannath par kavita
    कविताएँ

    रोम-रोम में बसे हो भगवान जगन्नाथ | Bhagwan Jagannath par kavita

    ByAdmin November 22, 2022November 23, 2022

    रोम-रोम में बसे हो भगवान जगन्नाथ ( Rom-rom mein base ho Bhagwan Jagannath )   हमारे रोम-रोम में बसे हो भगवान आप जगन्नाथ, हिंदुओं के चारधाम में एक माना जाता जगन्नाथ। ना कागज़‌ क़िताब फिर भी रखतें सबका हिसाब, मुझको भी अपने धाम बुलालो पुरी श्री जगन्नाथ।।   भारत के उड़िशा में है आपका भव्य…

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