• भारतीय संविधान | Samvidhan par kavita

    भारतीय संविधान ( Bhartiya samvidhan )    कोटि कोटि कंठो से निकली एक यही स्वर धारा है सबसे न्यारा सबसे प्यारा सुसंविधान  हमारा  है,   शत् शत् नवल प्रणाम तुम्हें एक तुम्हीं सहारा है बहते दरिया में नावों का सुंदर एक किनारा है ,   समता का अधिकार दिया यह शिक्षा का उजियारा है नारी…

  • माँ की ममता | Maa ki mamta par kavita

    माँ की ममता ( Maa ki mamta )    आंचल में छुपाकर के अपने ममता के स्नेह से नहलाती है करती मां दुलार बच्चों को मोती प्यार भरे लुटाती है   सुकून सा मिल जाता है आंचल की ठंडी छांव में डांट फटकार लगती प्यारी मां स्वर्ग बसा है तेरे पांव में   मीठी मीठी…

  • मोक्ष पाओगे | Moksh par kavita

    मोक्ष पाओगे! ( Moksh paoge )   राम को हराकर बता क्या पाओगे, सत्य को पछाड़कर भी क्या पाओगे? अगर सत्य के पाले में खड़े रहे तो, जाते – जाते धरा से मोक्ष पाओगे।   कौन होगी अंतिम साँस, किसे पता, मिसाइलें सजाकर तुम क्या पाओगे? बढ़े तो बढ़ाओ भाई पुण्य की गँठरी, झूठ बोलकर…

  • अब ख़ुद ही निखरना है | Hindi kavita on motivation

    अब ख़ुद ही निखरना है ( Ab khud hi nikharna hai )   अपनें आपको तपाकर अब ख़ुद ही निखरना है, उलझनों को सुलझाकर आगे बढ़ते ही रहना है। राह भले ही मुश्किलों की हो पर चलतें जाना है, अब यें कीमती वक्त स्वयं पर ही ख़र्च करना है।।   साहस एवं हिम्मत से हर…

  • जीने के लिए | Kavita jeene ke liye

    जीने के लिए  ( Jeene ke liye )    कक्षा में बिल्कुल पीछे पिछले सीट पर मैला कुचैला निराश उदास बैठा सबसे दूर, न कापी न कलम न पढ़ने का मन, मैंने डांटा धमकाया पर दबा दबा सा मुझे देखा देखता रहा अंततः कुछ न बोला, फिर प्यार से स्नेह और दुलार से पूछा, उसने…

  • घर | Ghar par kavita

    घर ( Ghar )   सोने बैठने रहने का ठिकाना है सबसे सुंदर आशियाना है घर।। जहां मां बाप भाई हैं बेटा बेटी और लुगाई है जहां अपने है जीवन के सपने हैं जहां हर तरह का बहाना है ऐसा ठिकाना है घर….. थक हार कर जब स्कूल से आते हैं घर पर ही आराम…

  • सलीका सिखाएँगे | Kavita salika sikhayenge

    सलीका सिखाएँगे! ( Salika sikhayenge )   हम सिर्फ जिन्दा रहे,तो मर जाएँगे, देश के लिए जिएँ, तो जी जाएँगे। मुबारक हो उन्हें जो सोते रुपयों पे, हम तो वहाँ खाली हाथ जाएँगे।   तुम खफा न हो जमीं-आसमां से, हम सितारे जमीं पे उतार लाएँगे। अपने बसेरों से पंछी लौट न जाएँ, हम उनका…

  • संविधान दिवस | Samvidhan Divas par Kavita

    संविधान दिवस ( Samvidhan divas )  ( 2 )   प्रेरणा पुंज आभा में, हिंद धरा अभिजागर यथार्थ स्वतंत्रता परम प्रहरी, हर नागरिक हित रक्षक । शासन प्रशासन उत्तम सेवा, अंकुश राष्ट्र संसाधन भक्षक । लिखित प्रथम वैश्विक पटल, सांविधिक समाहर्ता महासागर । प्रेरणा पुंज आभा में, हिंद धरा अभिजागर ।। अनूप प्रयास अंबेडकर, सर्व…

  • घंटाघर की चार घड़ी | Poem ghanta ghar ki char ghadi

    घंटाघर की चार घड़ी ( Ghanta ghar ki char ghadi )   घंटाघर की चार घड़ी, चारो में जंजीर पड़ी। जब वो घंटा बजता था, रेल का बाबू हंसता था।।   हंसता था वो बेधड़क, आगे देखो नई सड़क। नई सड़क मे बोया बाजरा, आगे देखो दिल्ली शाहदरा।।   दिल्ली शाहदरा में लग गई आग,…

  • शीत | Hindi muktak

    शीत ( Sheet )   सर्द हवाएं ठंडी ठंडी तन ठिठुरन सी हो जाती है कंपकंपी छूटती तन बदन में सर्दी खूब सताती है ठंडा माह दिसंबर का सर्दी का कोप बड़ा भारी कोहरा धुंध ओस छा जाये बर्फबारी हो जाती है।   बस दुबके रहो रजाई में अलाव कहीं जला देना स्वेटर मफलर कोट…