Meri Maati mera Desh

रहे दिलों में मुहब्बत वतन की

रहे दिलों में मुहब्बत वतन की

दुआ मांगता हूँ हमेशा अमन की ?
रहे दिलों में मुहब्बत वतन की

न बरसात हो नफ़रतों की कभी भी
सलामत रहे बस बहारें वतन की

मेरी जान कुर्बान है इस वतन पर
यहीं आरज़ू है मेरे यार मन की

वतन से करो प्यार इतना दिलों से
हमेशा महके हर कली ही चमन की

करे है हिफाज़त सैनिक जो हमारी
उन्हें ही सलामी आओ दे नमन की

मिटा दो अदू सैनिकों देश के सब
असर हो न दिल पे किसी भी दमन की

वतन की फिज़ां में रहे प्यार आज़म
कभी खुशबुएँ हो न कम सुमन की

शायर: आज़म नैय्यर

(सहारनपुर )

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • खामोशी | Khamoshi Shayari

    खामोशी ( Khamoshi )    नहीं कुछ भी है कहने को तो ओढ़ी आज खामोशी ज़रा सुनिए तड़पते दिल की है आवाज़ खामोशी। समंदर सी है गहरी जलजले कितने समेटे है छुपाए है हज़ारों ग़म हज़ारों राज़ खामोशी। नहीं लब से कहा उसने मगर सब कुछ बयां करती वो उसका हाले दिल बदले हुए अंदाज़…

  • मुहब्बत में वफ़ा-परवर खड़े हैं

    मुहब्बत में वफ़ा-परवर खड़े हैं मुहब्बत में वफ़ा-परवर खड़े हैंलगा के ताज को ठोकर खड़े हैं न थामा हाथ भी बढ़कर किसी नेयूँ तन्हा हम शिकस्ता-तर खड़े हैं करूँ कैसे तुम्हारा मैं नज़ाराज़माने में सौ दीदा-वर खड़े हैं शजर आता न कोई भी नज़र अबबशर सब धूप में थक -कर खड़े हैं मिरे ज़हनो गुमाँ…

  • परवरदिगार दे

    परवरदिगार दे तासीरे-इश्क़ इतनी तो परवरदिगार देदेखे मुझे तो अपनी वो बाँहें पसार दे यह ज़ीस्त मेरे साथ ख़ुशी से गुज़ार देइस ग़म से मेहरबान मुझे तू उबार दे मुद्दत से तेरे प्यार की ख़्वाहिश में जी रहायह जांनिसार तुझ पे बता क्या निसार दे इतनी भी बे नियाज़ी मुनासिब नहीं कहींजो चाहता है वो…

  • उनके होंठों पे थी हंसी कल शब

    उनके होंठों पे थी हंसी कल शब उनके होंठों पे थी हंसी कल शब।रोशनी सी थी तीरगी कल शब। चांद उतरा था अपने आंगन में।हम पे बरसी थी चांदनी कल शब। कुछ क़दम भी हमारे बहके थे।कुछ हवा भी थी मधभरी कल शब। जो भी कहना था कह दिया उनसे।आ गई काम मयकशी कल शब।…

  • पहली मुलाकात | Ghazal Pehli Mulaqat

    पहली मुलाकात ( Pehli Mulaqat )   धीरे-धीरे वो घूँघट उठाने लगे । धड़कनें मेरे दिल की बढ़ाने लगे ।। १ आ गई रात वो जब मुलाकात की। देखते ही हमें वो लजाने लगे ।। २ देख जबसे लिया यार मैनें सनम । क्या कहूँ की कदम लड़खड़ाने लगे ।। ३ हार कर ही सदा…

  • मंदिर मस्जिद | Poem on Mandir Masjid

    मंदिर मस्जिद ( Mandir Masjid )   करना क्या है ? मंदिर मस्जिद और खाना है ! मंदिर मस्जिद भर रक्खी है नफ़रत दिल में कर रक्खा है मंदिर मस्जिद खूब लड़े हैं भाई भाई मुद्दा क्या है ? मंदिर मस्जिद आपका बेटा पढ़ा लिखा है क्या करता है ? मंदिर मस्जिद ख्वाहिश जो पूछो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *