• ऐ अँधेरे | Ai andhere kavita

    ऐ अँधेरे ( Ai Andhere )   ऐ अँधेरे तूने मुझे बहुत रुलाया है समेट कर सारी रोशनी मुझे सताया है तुझ से दूर जाने के किये बहुत यतन जाने क्यूं मेरी जिन्दगी को बसेरा बनाया है ऐ अँधेरे तूने वाकयी बहुत रुलाया है समेट कर सारी रोशनी मुझे सताया है कौन सी धुन मे…

  • प्रीत की यही रीत है | Geet preet ki yahi reet hai

    प्रीत की यही रीत है ( Preet ki yahi reet hai )     मन से मन का मिलन ही दिल के तारों का संगीत है। दिल से दिल जब मिले धड़कने गाती प्यारा गीत है। प्रीत की यही रीत है हद से ज्यादा हुई चाहत कोई सबसे प्यारा लगे। चैन आ जाए मन को…

  • हद से ज्यादा फूलो मत | Geet phoolo mat

     हद से ज्यादा फूलो मत ( Had se jyada phoolo mat )     गफलत मे रह झूलो मत, मर्यादा कभी भूलो मत। हद से ज्यादा फूलो मत, अपनों को भी भूलो मत। मर्यादा कभी भूलो मत अपने अपने ही होते हैं, अतुलित प्रेम भरा सागर। मोती लुटाते प्यार भरा, अपनों से ही मिलता आदर।…

  • पहले के रिश्ते | Rishte kavita

    “पहले के रिश्ते” ( Pahale ke rishte )   पहले के लोगो में रिश्तो का ज्ञान था औरत की इज्जत का सबको ध्यान था।   बड़े और छोटों की घर में थी पहचान कच्चे थे घर उनके मगर पक्के थे ईमान।   मान सम्मान से बंधी थी रिश्तो की डोरी विश्वास और मर्यादा में नहीं…

  • कवि की दुनिया जैसे न्यारी है | Kavi par kavita

    कवि की दुनिया जैसे न्यारी है  ( Kavi ki duniya jaise nyari hai )      शब्द-शब्द पिरोकर लेखक बुक माला बना देते, भाव अपनें मन के ये इसी क़लम से लिख देते। इन कवियों की दुनिया सब से अलग हीं लगती, कविता से कहानी कहानी से कविता बना देते।।   कल्पना से सोचकर लेखक…

  • पीरियड्स | Periods par kavita

     पीरियड्स ( Periods )    तेरह वर्ष की उम्र में मुझको हुआ पहली बार, पेट के नीचे दर्द हुआ जैसे फूटा कोई गुब्बार। कमर दुखना चक्कर आना क्या हुआ है यार, किसको बताऊॅं रक्तस्राव हुआ योनी के द्वार।।     घबराई एवं शरमाई डरते-डरते घर तक आई, क्या हुआ है मेरे साथ सोच कर मैं…

  • मानवता हनन | Manavata hanan par kavita

    मानवता हनन ( Manavata hanan )    हे प्रभु इस धरती पर नर को दानवता क्यों भाती है। ईर्ष्या द्वेष नफरते हावी सारी मानवता खा जाती है।   लालच लोभ स्वार्थ में नर इंसानियत क्यों भूल गया। मतलब कि इस दुनिया में क्यों मझधार में झूल गया।   लूट खसोट भ्रष्टाचार की नर राहें क्यों…

  • विद्यार्थी | Vidyarthi par kavita

    विद्यार्थी ( Vidyarthi )    एक यही होती विद्यार्थियों की पहचान, मंजिल को पाना और बनना है महान। एक जैसी युनिफॉर्म ये जूतें एवं जुराब, अध्यापकों का सदैव करतें वे गुणगान।।   पढ़ते है जीवनी जैसे यह राम व रहीम, गुरुग्रंथ एवं बाईबल गीता और क़ुरान। ना कोई जानते क्या है जाति क्या धर्म, होते…

  • कलयुगी दोहे | Rastogi ke dohe

    कलयुगी दोहे ( Kalyugi dohe )    झूठ बराबर तप नही,सांच बराबर पाप। जाके हृदय झूठ है,ताके हृदय है आप।।   रिश्वत लेना धर्म है,सच बोलना है पाप। दोनो को अपनाइए,मिट जाएंगे संताप।।   माखन ऐसा लगाईये, बॉस खुश हो जाए। बिना काम के ही,प्रमोशन जल्दी हो जाए।।   गंगा नहाए से पाप धुले,मै सागर…

  • लाचार नारी | Poem on nari in Hindi

    लाचार नारी ( lachar nari )    एक नारी थी वक्त की मारी थी दुनिया में कोई बेचारी थी। मानवता का स्वांग करने वालों पे फिर भी चोट भारी थी।   लाचार नारी तड़पती रही दर्द से लोग वीडियो बनाते रहे। दरिंदो की दरिंदगी वो वहशीपन का नाना खेल रचाते रहे।   दुनिया की भीड़…