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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Geet shikshak ka samman
    कविताएँ

    प्रथम हो शिक्षक का सम्मान | Geet shikshak ka samman

    ByAdmin September 5, 2022

    प्रथम हो शिक्षक का सम्मान ( Pratham ho shikshak ka samman )     गुरु है गुण निधियों की खान प्रथम हो शिक्षक का सम्मान गुरु है ज्ञान का सागर सारा भरा रग रग में स्वाभिमान प्रथम हो शिक्षक का सम्मान   बहाते ज्ञान की अविरल धारा बनाते उज्जवल जीवन सारा गुरु वचनों पे हमें…

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  • Poem sukh aur dukh
    कविताएँ

    सुख और दुःख | Poem sukh aur dukh

    ByAdmin September 5, 2022September 5, 2022

    सुख और दुःख ( Sukh aur dukh)     भेंट हुआ एक दिन सुख दुःख का दुःख ने खबर लिया तब सुख का,   दुःख बोली ओ! प्यारी बहना कितना मुस्किल तुमसे मिलना   रहती कहां?नहीं हो दिखती हर कोई चाहे तुमसे मिलना,   सुख ने दुःख को,गले लगा कर भर मन में मुस्कान,मनोहर,  …

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  • Poem shikshak diwas
    कविताएँ

    शिक्षक दिवस | Poem shikshak diwas

    ByAdmin September 5, 2022

    शिक्षक दिवस ( Shikshak diwas )   गुरु ज्ञान की गंगा पावन अनुभव भरा खजाना है शब्द शब्द अनमोल मोती गुरु श्रीमुख से पाना है   दिव्य प्रज्ञा जोत जलाते सन्मार्ग पर हमें ले जाते आराधक साधक शारदे नव प्रतिभा गढ़ पाते हैं   गुणों भरा सागर सारा गुरु दुनिया का ज्ञान कराते अहंकार मन…

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  • Bhojpuri kavita ho Shalu
    कविताएँ

    हो शालू | Bhojpuri kavita ho Shalu

    ByAdmin September 5, 2022September 5, 2022

    हो शालू! ( Ho Shalu )   झमकावेलू,   आंख देखावेलू   लचकावेलू,   मटकावेलू   धमकावेलू,   महटियावेलू   ना आवेलू,   अंठियावेलू   सुनावेलू,   सतावेलू।   लेखक-मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर सलेमपुर, छपरा, बिहार । यह भी पढ़ें : मंजूर के दोहे | Manzoor ke dohe

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  • Shikshak diwas par kavita
    कविताएँ

    शिक्षक की अभिलाषा | Shikshak diwas par kavita

    ByAdmin September 5, 2022

    शिक्षक की अभिलाषा ( Shikshak ki abhilasha )   चाह नहीं बी एल ओ बनकर, रोज गांव में टेर लगाऊं। चाह नहीं संकुल बी आर सी, चक्कर कांटू मेल बनाऊं।।   चाह नहीं डाकें भर भर के, बनूं बाबू सा मैं इतराऊं। चाह नहीं मध्यान्ह चखूं और, राशन पानी घर ले जाऊं।।   मुझे छोड़…

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  • Poem on pita
    कविताएँ

    पिता | Poem on pita

    ByAdmin September 4, 2022

    पिता ( Pita )   पिता एक चट्टान होता हैl पिता का साया जब होता हैl बेटा चैन की नींद सोता हैl पिता बच्चों के सपनों को अपनी आंखों में संजोता हैl गंभीर रहता है मगर भावनाओं से भरा होता हैl ख्वाहिशों की फेहरिस्त को पूरा कर ही सोता हैl बेटी की विदाई पर पिता…

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  • Zulm shayari
    शेरो-शायरी

    जुल्म का अब हिसाब करना है | Zulm shayari

    ByAdmin September 4, 2022

    जुल्म का अब हिसाब करना है ( Zulm ka ab hisab karna hai )     आज वो बेनकाब करना है जुल्म का अब हिसाब करना है   ख़ूब कर ली उसी ने अब चुगली कुछ तलब कुछ ज़वाब करना है   रोज़ कड़वी बातें बोले है वो रिश्ता उसको ख़राब करना है   फ़ासिले…

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  • Kavita jeevan dhaara
    कविताएँ

    जीवन धारा | Kavita jeevan dhaara

    ByAdmin September 3, 2022September 3, 2022

    जीवन धारा ( Jeevan dhaara )   हर्ष उमंग खुशियों की लहरें बहती जीवन धारा। मेहनत लगन हौसला धरकर पाते तभी किनारा।   भावों की पावन गंगा है मोती लुटाते प्यार के। पत्थर को भगवान मानते सुंदर वो संस्कार थे।   इक दूजे पे जान लुटाते सद्भावों की पावन धारा। क्या जमाना था सुहाना बहती…

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  • Aarti Gauri Vinayakam
    कविताएँ

    गौरी विनायकम | Aarti Gauri Vinayakam

    ByAdmin September 3, 2022

    गौरी विनायकम ( Gauri Vinayakam )   एकदंत दयावंत लंबोदर गौरी विनायकम कृपा दृष्टि कीजिए l सुखकर्ता दुखहर्ता विघ्नहर्ता कष्टों को दूर कर ज्ञान हमको दीजिए l वक्रतुंड महाकाय शंभू सुत पूज्य प्रथम आप तो सवार काज दीजिए l जय देव मंगल मूर्ति गणेश दुष्टों का दलन कर विघ्न हर लीजिए l रिद्धि सिद्धि भालचंद्र…

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  • Ghazal gulab hai chehra
    शेरो-शायरी

    गुलाब है चेहरा | Ghazal gulab hai chehra

    ByAdmin September 3, 2022

    गुलाब है चेहरा ( Gulab hai chehra )     बंद आज़म हिजाब है चेहरा जो यहाँ वो गुलाब है चेहरा   क्या मैं तारीफें  करुं उसकी वो ख़ुद में आफ़ताब है चेहरा   देखकर प्यार का नशा होता हुस्न जैसे शराब है चेहरा   आज तो वो नजर नहीं आया हुस्न का जो ज़नाब…

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