अभिमान | Poem abhimaan
अभिमान ( Abhimaan ) किस बात का गुरूर है क्यों है मगरूर तू क्या तूने कर दिया क्यों है नशे में चूर तू गर्व ही करना तो कर ले वतन की शान पे बोल मीठे बोल प्यारे धरती पर इंसान से होकर नशे में चूर तू मत करना अभिमान चंद सांसों का…
अभिमान ( Abhimaan ) किस बात का गुरूर है क्यों है मगरूर तू क्या तूने कर दिया क्यों है नशे में चूर तू गर्व ही करना तो कर ले वतन की शान पे बोल मीठे बोल प्यारे धरती पर इंसान से होकर नशे में चूर तू मत करना अभिमान चंद सांसों का…
जल गये लोग उसको गुलाबी कहाँ! ( Jal gaye log usko gulabi kahan ) जल गये लोग उसको गुलाबी कहाँ! फूल सा खिलता जब शबाबी कहाँ अंजुमन में ख़िलाफ़ हो गये लोग सब जब उसे आज अपना ज़नाबी कहाँ हो गया है यहाँ आपस यूं फ़साद जब उसे यूं लोगों ने…
मैंने अपने होंठ बंद कर लिए ( Maine apne honth band kar liye ) वक्त ने करवट बदली रिश्तो में दिखावा भर दिया इतनी दरारें आई घर में घट घट छलावा कर दिया हम हितेषी हो उनके दुख दर्द बांटने चल दिए लड़ने को तैयार वो बैठे मैंने होंठ बंद कर लिए …
काश वो भी याद करें ( Kash wo bhi yaad kare ) अक्सर वो सपनों में रहते उनसे हम फरियाद करे। दिल तक दस्तक देने वाले काश वो भी याद करें। हम तो उनके चाहने वाले मधुर सुहानी बात करें। आ जाए वो भी महफ़िल में मस्तानी प्रभात करें। यादों में सौम्य…
ठाणे, मुंबई डा0 काशिनाथ घाणेकर प्रेक्षागार में शुक्रवार, 26 अगस्त 2022 को आजादी की 75वीं वर्षगाँठ – अमृत महोत्सव पर राष्ट्रीय कविसम्मेलन आयोजित किया जा रहा है । कविसम्मेलन के साथ ही नामचीन साहित्यकारो एव समाजसेवी महानुभावों का सम्मान किया जायेगा।। संस्था के संस्थापक अध्यक्ष श्री विधुभूषण त्रिवेदी ‘विद्यावाचस्पति’ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस मे बताया कि…
लालसा ( Laalasa ) लालसा न चाह का है ,जीवन में कुछ पाने को लालसा न बड़ा बनू, न बहुत कुछ कर जाने को छीन कर खुशियां किसी की, रोटियां दो वक्त की मैं चलूं तारों को लाने,छोड़ इन्हें मर जाने को धिक्कार है जीवन को ऐसे,धिक्कारता हूं लोग को जो अपनी ही खुशियों…
मां ( Maa ) मां को समर्पित एक कविता कहां है मेरी मां उससे मुझको मिला दो l हाथों का बना खाना मुझको खिला दो l दो पल की जिंदगी मुझको दिला दो l एक बार गुस्से से अपनी डांट पिला दो l फूल मेरे आंगन में मां तुम खिला दो…
मौन बोलता है ( Maun bolata hai ) कभी-कभी एक चुप्पी भी बवाल खड़ा कर देती है। छोटी सी होती बात मगर मामला बड़ा कर देती है। मौन कहीं कोई लेखनी अनकहे शब्द कह जाती है । जो गिरि गिराए ना गिरते प्राचीर दीवारें ढह जाती है। मौन अचूक अस्त्र मानो धनुष…
गीतों को सौगात समझना ( Geeton ko saugaat samajhna ) काव्य भावों को समझ सको तो हर बात समझना मैंने लिखे हैं गीत नए गीतों को सौगात समझना दिल का दर्द बयां करते उर बहती भावधारा मधुर तराने प्यारे-प्यारे हर्षित हो सदन सारा शब्द शब्द मोती से झरते बनकर चेहरे की मुस्कान…
छिंदवाड़ा – साहित्य, संस्कृति एवं अध्यात्म जगत से जुड़ी अनुभूति शर्मा को साहित्य संस्कृति के क्षेत्र मे किये गए उत्कृष्ट कार्यो के लिए ‘शब्द आराधना सम्मान ‘ और ‘बेटी प्रतिभा’ सम्मान प्रदान किया। उल्लेखनीय है कि मधुकर शोध संस्थान संयोजक विनोद मिश्र जी द्वारा राष्ट्रीय मधुकर सम्मान समारोह का आयोजन बड़ी भव्यता के साथ हुआ…